उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में चार लोगों की हत्या और तीन बच्चों को बंधक बनाने वाले अरविंद सिंह को लेकर उसके बचपन के दोस्त आशुतोष सिंह ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आशुतोष ने आज तक से बातचीत में बताया कि साल 2018 में बड़े भाई सुनील सिंह की मौत के बाद अरविंद के व्यवहार में बड़ा बदलाव आ गया था. वह पूजा-पाठ से चिढ़ने लगा था, लोगों से दूरी बनाने लगा और धीरे-धीरे नशे का आदी हो गया था.
भाई की मौत के बाद बदल गया था व्यवहार
आशुतोष के मुताबिक, बड़े भाई की मौत के बाद अरविंद ने दोस्तों और गांव के लोगों से मिलना-जुलना लगभग बंद कर दिया था. वह ज्यादातर अकेला रहता था और अपने बेटे-बेटी के साथ ही आता-जाता था. उसके व्यवहार में ऐसा बदलाव आया कि उसके घर आने वाले लोग भी उससे डरने लगे थे.
बताया गया कि अरविंद को अक्सर यह डर या आशंका रहती थी कि उसके साथ कुछ गलत हो सकता है. यहां तक कि जो भी घर में आता था, उसे लगता था कि उसकी हत्या कर देगा. इसी दौरान उसका झुकाव नशे की तरफ बढ़ गया. आशुतोष का दावा है कि अरविंद गांजा पीने लगा था और उसका सामाजिक दायरा लगातार सिमटता चला गया.
पूजा के दौरान हुआ था हंगामा, बुलानी पड़ी पुलिस
आजमगढ़ में हुई इस खौफनाक वारदात से ठीक पहले भी घर का माहौल तनावपूर्ण था. आशुतोष के मुताबिक, सोमवार को घर में पूजा-पाठ चल रहा था. इसी दौरान अरविंद ने हंगामा कर दिया था. स्थिति बिगड़ने पर परिवार के लोगों ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को बुलाया था.
पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह मामला शांत कराया. हालांकि इसके बाद भी घर के भीतर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था.
'भाई की आत्मा का साया है'... फिर शुरू हुआ महामृत्युंजय जाप
आशुतोष ने बताया कि पूजा कराने आए पुरोहितों ने परिवार से कहा था कि अरविंद के बड़े भाई की आत्मा को शांति नहीं मिली है और घर पर उसका साया है. इसके बाद परिवार ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू कराया था.
इसी पूजा-पाठ और अरविंद के विरोध के बीच घर का माहौल और तनावपूर्ण हो गया था. हालांकि भाई की मौत और पूजा-पाठ को लेकर अरविंद के व्यवहार के संबंध में सामने आई ये बातें उसके दोस्त के बयान पर आधारित हैं.
भाई की विरासत वाली रिवॉल्वर से वारदात
इस मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि अरविंद ने वारदात में जिस रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया. वह उसके बड़े भाई सुनील सिंह की विरासत में मिली थी. इसी हथियार के साथ उसने घर में खौफनाक वारदात को अंजाम दिया.
इसके बाद उसने तीन बच्चों को घर के भीतर बंधक बना लिया. पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने और अरविंद को काबू करने के लिए लंबा ऑपरेशन चलाया. करीब आठ घंटे तक चले इस ऑपरेशन में पुलिस को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा. आखिरकार पुलिस कार्रवाई में अरविंद मारा गया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया.
अब इस पूरे मामले में पुलिस वारदात के पीछे की वजह, अरविंद के बदले व्यवहार, पारिवारिक विवाद और घटना से पहले की गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. वहीं, उसके बचपन के दोस्त के इन खुलासों ने आरोपी की जिंदगी में 2018 के बाद आए बदलाव पर सवाल खड़े किए हैं.
संतोष शर्मा