सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में रथ यात्रा निकालेंगे. हालांकि, पार्टी के मुताबिक, यह चुनावी पीडीए यात्रा नहीं है, उसमें अभी थोड़ा समय शेष है. आज अखिलेश हरचंदपुर के सपा विधायक व ओबीसी नेता राहुल लोधी के घर जाएंगे. वहां सपा विधायक संग समाजवादी छात्रससभा के उन सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे, जिनकी झड़प 17 सितंबर और पुलिस अधिकारियों से हुई थी.
सपा के मुताबिक, अखिलेश जिन जिलों का दौरा करेंगे वहां अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे पीड़ित परिवारों से मिलेंगे, जिन्हें पुलिस या प्रशासन की किसी कार्रवाई से नाराज है. राजनीतिक जानकार इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए वोट बैंक को और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे है.
लोकसभा चुनाव के बाद से सब लगातार पीडीए फॉर्मूले को राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने में जुटी है. अखिलेश ने कई बार कह चुके है कि जो पीड़ित है, वह भी पीडीए है. पार्टी मानती है कि कोई बड़ा नेता सीधे पीड़ित के दरवाजे तक पहुंचता है तो इससे राजनीतिक विश्वास भी मजबूत होता है. ऐसे में यह यात्रा केवल सहानुभूति जताने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सामाजिक गठबंधन की राजनीति को मजबूत करने का प्रयास भी है.
रायबरेली से आगाज क्यो ? सीटों पर नजर या गठबंधन पर:
सपा अध्यक्ष रायबरेली से रथयात्रा शुरू करेंगे. हाल में सपा छात्रसभा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं में हुआ विवाद इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है. हालांकि इसके पीछे कई राजनीतिक समीकरण भी है.
ऊंचाहार सीटः
विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस से गठबंधन न होने के बावजूद सपा सदर सीट छोड़कर बाकी सभी चार सीटें जीती थी. अब सपा की नजर ऊंचाहार सीट पर भी है. यहां से तीन बार सपा के टिकट पर जीते डॉ. मनोज पांडेय अब भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री है.
गठबंधन में दबदबा:
आगामी चुनाव में कांग्रेस और सपा के गठबंधन की सभावना मजबूत है. ऐसे में रायबरेली में जनाधार का प्रदर्शन करना भी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि जिले की ज्यादातर सीटों पर उसका प्रभाव मजबूत है.
जानकारों की मानें तो रायबरेली जैसे हाई-प्रोफाइल जिले से अपनी यात्रा की शुरुआत करके अखिलेश यादव कांग्रेस को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सपा ही मुख्य विपक्षी पार्टी है और आगे जब सीट-शेयरिंग पर बात होगी, तो सपा रायबरेली ही अन्य जिलों में अपनी मजबूती को आधार बनाकर 'बड़े भाई' की भूमिका में रहने का दावा ठोकेगी. कुल मिलाकर सपा अधिक से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर सकेगी.
समर्थ श्रीवास्तव