एम्स गोरखपुर की डायरेक्टर की तबीयत बिगड़ी, इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल में रेफर, उठे सवाल

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विभा दत्ता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल से जुड़ी जांच के लिए प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया. एम्स में शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर हो गई थी.

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एम्स गोरखपुर की डायरेक्टर की तबीयत बिगड़ी, कैथ लैब न होने से प्राइवेट अस्पताल में हुई जांच.  (Image: https://aiimsgorakhpur.edu.in) एम्स गोरखपुर की डायरेक्टर की तबीयत बिगड़ी, कैथ लैब न होने से प्राइवेट अस्पताल में हुई जांच. (Image: https://aiimsgorakhpur.edu.in)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:31 PM IST

उत्तर प्रदेश के एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विभा दत्ता की बुधवार को तबीयत बिगड़ गई. उन्हें दिल से जुड़ी जांच के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया, क्योंकि एम्स गोरखपुर में कैथ लैब अभी तक शुरू नहीं हुई है. इससे पहले एम्स के डॉक्टरों ने इमरजेंसी विभाग में उनका इलाज किया, जिसके बाद उनकी हालत स्थिर हो गई थी.

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इसके बाद एहतियात के तौर पर उन्हें ऐसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां कैथ लैब की सुविधा मौजूद है. विभा दत्ता को शाम करीब 5 बजे निजी अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टरों ने उनकी जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि उन्हें पेसमेकर की जरूरत है या नहीं. जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि पेसमेकर की जरूरत नहीं है. वह रात करीब 8 बजे अपने घर लौट आईं.

एम्स गोरखपुर के एक वरिष्ठ डॉक्टर के मुताबिक, शुरुआती इलाज के बाद विभा दत्ता की हालत स्थिर हो गई थी. डॉक्टर ने बताया कि अब उनकी तबीयत ठीक है और उन्हें केवल आगे की जांच के लिए एहतियात के तौर पर निजी अस्पताल ले जाया गया था.

कैथ लैब शुरू नहीं होने पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एम्स गोरखपुर में कैथ लैब की सुविधा शुरू नहीं होने को लेकर सवाल उठे हैं. खास तौर पर इसलिए क्योंकि संस्थान की कार्यकारी निदेशक को ही दिल से जुड़ी जांच के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ा. एम्स गोरखपुर ने बाद में बताया कि कैथ लैब शुरू करने से जुड़ा करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. संस्थान के मुताबिक, जरूरी मेडिकल उपकरण और मशीनें मंगाई जा रही हैं और इनके जल्द पहुंचने की उम्मीद है. बाकी काम पूरा करने के बाद कैथ लैब को जल्द से जल्द शुरू करने की तैयारी है.

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एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर के मुताबिक, कैथ लैब दिसंबर तक शुरू होने की उम्मीद है. इसके शुरू होने के बाद गोरखपुर के साथ उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी दिल से जुड़ी कई जरूरी जांच और इलाज की सुविधा अपने आसपास ही मिल सकेगी. इसमें एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं.

2016 में रखी गई थी एम्स की नींव

एम्स गोरखपुर की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत रखी थी. 2017 में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने में तेजी आई और निर्माण से जुड़ी कई अड़चनें दूर की गईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2019 को एम्स गोरखपुर के आउट पेशेंट विभाग का उद्घाटन किया था. इसके बाद 7 दिसंबर 2021 को पूरे संस्थान का उद्घाटन किया गया.अब एम्स गोरखपुर कैथ लैब से जुड़े बाकी काम पूरे करने में जुटा है. इसके शुरू होने के बाद संस्थान की हृदय रोग से जुड़ी सुविधाएं और मजबूत होंगी और मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा.

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