डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ AI को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा समझौता किया. लेकिन इसी समझौते के आधिकारिक दस्तावेज में ऐसी गलती हो गई, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत पकड़ लिया.
सोचिए, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के CEO बैठे हों. AI के भविष्य, उसकी ताकत और उससे जुड़े खतरों पर गंभीर चर्चा हो रही हो. समझौते पर बड़े-बड़े नाम साइन कर रहे हों. लेकिन इसी बीच दस्तावेज में एक ऐसी गलती हो जाए, जिसे देखकर इंटरनेट कहे- भाई, ये क्या हो गया?
दरअसल, ट्रंप ने अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करने को लेकर एक समझौते की घोषणा की. इसमें AI के खतरों पर नजर रखने, सेफ्टी सिस्टम मजबूत करने और स्वतंत्र ऑडिट जैसी चीजों पर जोर दिया गया है.
इस समझौते में एंथ्रोपिक के डारियो अमोडेई, OpenAI के ग्रेग ब्रॉकमैन, गूगल के सुंदर पिचाई, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, एलॉन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग जैसे बड़े नाम शामिल थे.
फिर दस्तावेज में क्या गलती हुई?
अब आते हैं उस गलती पर, जिसने पूरी खबर को सोशल मीडिया पर मजेदार बना दिया. दस्तावेज में लिखा था "President of the Unites States". जबकि सही होना चाहिए था- "President of the United States".यानी अमेरिका का नाम लिखते समय United की जगह Unites हो गया. बस फिर क्या था. सोशल मीडिया यूजर्स की नजर इस छोटी-सी गलती पर पड़ गई और कमेंट्स आने शुरू हो गए.
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एक यूजर ने मजाक में लिखा कि कहीं ट्रंप अब ऐसा कार्यकारी आदेश ही न साइन कर दें, जिससे अमेरिका का नाम बदलकर "Unites States" हो जाए. एक दूसरे यूजर ने कहा कि अगली बार दस्तावेज को भेजने से पहले थोड़ी बेहतर प्रूफरीडिंग कर लेनी चाहिए थी.
असली मुद्दा AI की सुरक्षा है
ट्रंप और टेक कंपनियों के बीच हुए इस स्वैच्छिक समझौते में AI सिस्टम को सुरक्षित तरीके से विकसित करने पर जोर दिया गया है. कंपनियों ने जोखिम पहचानने के लिए आंतरिक व्यवस्था मजबूत करने और कई स्तरों पर जांच-पड़ताल की बात कही है. इसमें बाहरी ऑडिटर और स्वतंत्र मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं.
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि इसका मकसद लोगों और ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि AI तकनीक उसी तरह काम करेगी, जैसा कंपनियां चाहती हैं.
गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने भी AI के फायदों के साथ उसके जोखिमों को गंभीरता से लेने की बात कही. वहीं एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि AI में बड़े फायदे हैं, लेकिन इसके वास्तविक जोखिम भी हैं.
एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग ने भी कहा कि तकनीकी तरक्की और सुरक्षा एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. AI को आगे बढ़ाया जा सकता है और साथ ही उसे जिम्मेदारी से विकसित किया जा सकता है.
बड़ी बैठक, बड़ा समझौता... और छोटी सी गलती
कुल मिलाकर, व्हाइट हाउस में हुई बैठक का मकसद AI के भविष्य और उसकी सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर था. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI को सुरक्षित बनाने की बात कर रही थीं.लेकिन इंटरनेट ने फिलहाल एक छोटी-सी स्पेलिंग मिस्टेक पकड़ ली.
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