दक्षिण अफ्रीका में लड़कों के पारंपरिक खतना समारोह 'उल्वालुको' को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. एक स्कूल में 11 साल के बच्चे के साथ जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया. ब्रेक के दौरान चार बड़े छात्रों ने छोटे बच्चे को स्कूल के टॉयलेट में ले जाकर जबरन खतना कर दिया. बच्चे को धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे पीटा जाएगा.
इस घटना के सामने आने के बाद दक्षिण अफ्रीका में बच्चों की सुरक्षा और पारंपरिक खतना समारोहों में बरती जाने वाली लापरवाही को लेकर बहस तेज हो गई है. खासकर उन अवैध केंद्रों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां बिना पर्याप्त प्रशिक्षण वाले लोग बच्चों का खतना करते हैं.
स्कूल के टॉयलेट में 11 साल के बच्चे के साथ क्या हुआ?
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला प्रिटोरिया से करीब 20 मील उत्तर में स्थित सोशांगुवे टाउनशिप के सिंक्वाबिले प्राइमरी स्कूल का है. यहां पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले 11 साल के बच्चे को चार सातवीं कक्षा के छात्रों ने स्कूल के टॉयलेट में घेर लिया. आरोप है कि तीन लड़कों ने उसे पकड़कर नीचे दबा लिया, जबकि चौथे ने उसके कपड़े नीचे खींच दिए.
इसके बाद बच्चे का जबरन खतना किया गया. घटना के बाद उसे किसी को कुछ भी बताने से मना किया गया और धमकी दी गई कि अगर उसने मुंह खोला तो उसे पीटा जाएगा. डरा हुआ बच्चा किसी तरह घर पहुंचा. लेकिन वह अपनी मां को भी यह बताने की हिम्मत नहीं जुटा सका कि स्कूल में उसके साथ क्या हुआ है.
कुछ दिनों बाद बच्चे की मां ने गौर किया कि उसका बेटा अजीब तरीके से चल रहा है. जब उन्होंने इसकी वजह पूछी तो बच्चे ने बात टालते हुए कहा कि यह चलने का नया 'फैशनेबल तरीका' है. लेकिन अगले दिन तक उसकी हालत ऐसी हो गई कि वह दर्द के कारण बिस्तर से उठकर स्कूल भी नहीं जा सका. आखिरकार उसने अपनी मां को बताया कि स्कूल में उसके साथ कुछ हुआ है.
मां ने बताया कि बच्चे ने अपने शरीर में आई सूजन दिखाई, जिसके बाद वह उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर गईं. वहां पता चला कि चार छात्रों ने स्कूल में ही उसका जबरन खतना कर दिया था. मां ने पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराया है. बेटे की सुरक्षा को लेकर वह उसे स्कूल भेजना नहीं चाहती थीं. हालांकि पुलिस की मदद से बच्चे को स्कूल ले जाया गया, जहां उसने पहचान परेड के दौरान कथित तौर पर उन चार छात्रों की पहचान की.
उल्वालुको क्या है?
दक्षिण अफ्रीका में कुछ समुदायों में लड़कों का पारंपरिक खतना उल्वालुको नाम की रस्म का हिस्सा है. इसे लड़के के बचपन से निकलकर पुरुष बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. यह रस्म साल में दो बार आयोजित होने वाले पारंपरिक 'विंटर' और 'समर' स्कूलों में होती है. इस दौरान लड़कों का खतना किया जाता है और उन्हें समुदाय की परंपराओं और जिम्मेदारियों के बारे में बताया जाता है.
परंपरा के मुताबिक, इस प्रक्रिया के बाद लड़कों को समुदाय से जुड़े कुछ अधिकार मिलते हैं. मसलन, वे जनजातीय बैठकों में शामिल हो सकते हैं और आगे चलकर शादी कर सकते हैं. किन समस्या तब पैदा होती है, जब यही परंपरा गैरकानूनी और असुरक्षित केंद्रों में पहुंच जाती है.
43 बच्चों की मौत ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में पारंपरिक खतना समारोहों के दौरान 43 लड़कों की मौत की खबर सामने आई. इसके बाद एक बार फिर इन समारोहों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे. पिछले साल भी इन समारोहों के दौरान 93 लड़कों की मौत हुई थी, जबकि 11 बच्चों को अपने शरीर का कोई हिस्सा गंवाना पड़ा था.
पुलिस के मुताबिक, कई अवैध केंद्रों में बच्चों का खतना ऐसे लोगों से कराया जाता है. इनके पास इसके लिए जरूरी प्रशिक्षण नहीं होता. खराब उपकरण और मेडिकल देखभाल की कमी के कारण संक्रमण, गैंगरीन और सेप्सिस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में ये जानलेवा भी साबित होती हैं.
पुलिस ने 42 अवैध केंद्र बंद कराए
बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस साल दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने अवैध खतना केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज की है. पुलिस ने 42 अवैध केंद्रों को बंद कराया. 40 लोगों को गिरफ्तार किया और करीब 180 लड़कों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला.
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हालांकि, देश में सभी पारंपरिक खतना केंद्र अवैध या असुरक्षित नहीं हैं. दक्षिण अफ्रीकी सरकार कई ऐसे केंद्रों को कानूनी लाइसेंस देती है, जहां प्रशिक्षित मेडिकल एक्सपर्ट और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. यानी विवाद परंपरा को लेकर नहीं, बल्कि उन जगहों और लोगों को लेकर है जहां बच्चों की जान और सेहत को खतरे में डालकर यह प्रक्रिया की जाती है.
परंपरा के नाम पर बच्चों की सुरक्षा से समझौता?
11 साल के बच्चे के स्कूल में जबरन खतना किए जाने की घटना ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है. यह मामला पारंपरिक उल्वालुको समारोह से अलग है, क्योंकि घटना किसी वैध दीक्षा केंद्र में नहीं, बल्कि स्कूल के टॉयलेट में हुई. चार बड़े छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने एक छोटे बच्चे को धमकाकर उसके साथ यह किया.
दूसरी तरफ, पारंपरिक समारोहों में होने वाली मौतों का आंकड़ा भी चिंता पैदा करता है. एक ऐसी रस्म, जिसे लड़कों के जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, अगर गलत तरीके से कराई जाए तो वही परंपरा उनके लिए जानलेवा बन सकती है.
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यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि उल्वालुको की परंपरा कैसे निभाई जाए, बल्कि यह भी है कि इसे निभाते वक्त बच्चों की जान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता कैसे दी जाए.
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