'मुझे मरने में भी सुकून मिलेगा...', क्यों मृत्युदंड से पहले ये क्यों बोल रहा था रेपिस्ट

एक रेपिस्ट ने मौत की सजा मिलने से कुछ समय पहले एक अजीब सा बयान दिया. उसने कहा कि जल्दी से मुझे फांसी पर लटका दो या फिर जैसे भी हो मृत्यु दंड दे दो. क्योंकि, मैं इसके मजे लेना चाहता हूं. अब मरने से ही मुझे सुकून मिलेगा.

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रेप के बाद एक बच्ची की हत्या करने वाले शख्स ने 50 साल तक अपने मौत का इंतजार किया (Photo - AI Generated) रेप के बाद एक बच्ची की हत्या करने वाले शख्स ने 50 साल तक अपने मौत का इंतजार किया (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:45 PM IST

50 साल तक मौत की सजा का इंतजार करने वाला एक कैदी आखिरकार फांसी के फंदे तक पहुंच गया. लेकिन मौत से ठीक पहले उसने ऐसा बयान दिया, जिसे सुनकर लोग हैरान रह गए. कैदी ने कहा था कि उसे मरने में मजा आएगा. यह वही शख्स था, जिसने करीब पांच दशक पहले एक 16 साल की लड़की की बेरहमी से हत्या कर दी थी.

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अमेरिका के फ्लोरिडा में 74 साल के हेरोल्ड जीन लुकास को 1 सितंबर 2026 को मौत की सजा दी गई. फ्लोरिडा स्टेट जेल में शाम करीब 6:18 बजे तीन दवाओं के जरिए उसे मृत्युदंड दिया गया. सजा के दौरान दरिंदे की शिकार बनी लड़की का भाई भी जेल के उस कमरे में मौजूद थे, जहां से उसने अपनी बहन के हत्यारे की मौत देखी.

राज्यपाल रॉन डेसेंटिस के कार्यालय के मुताबिक, फांसी की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. लेकिन लुकास की मौत से पहले कही गई एक बात ने इस पूरी घटना को और भी खौफनाक बना दिया.

'जितनी जल्दी हो जाए, उतना अच्छा... मैं इसका मजा लूंगा'
लुकास करीब 50 साल से डेथ रो यानी मौत की सजा पाने वाले कैदियों के लिए तय जेल में बंद था. जब उसका डेथ वारंट जारी हुआ तो उसने आखिरी वक्त में अदालत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से भी इनकार कर दिया.

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उसने जज से कहा कि वह अपने सभी बचे हुए कानूनी अधिकार छोड़ना चाहता है. उसका कहना था कि वह इस मामले से अब थक चुका है. लुकास ने कहा था कि मैं 50 साल से डेथ रो पर हूं और अब इसे आगे नहीं ले जाना चाहता. जितनी जल्दी यह खत्म हो जाए, उतना अच्छा है. मैं इसका मजा लूंगा.

हालांकि, यह रवैया उसके पूरे 50 साल के कानूनी सफर से बिल्कुल अलग था. इन वर्षों में उसने अपनी मौत की सजा से बचने के लिए कई कानूनी कोशिशें की थीं.

16 साल की बच्ची को बनाया था निशाना
यह मामला 1976 का है. उस समय लुकास 24 साल का था और फ्लोरिडा के बोनिता स्प्रिंग्स में जिल पाइपर के परिवार के लिए काम कर चुका था. वह जिल को करीब चार साल से जानता था. दोनों पहले डेट भी कर चुके थे. लुकास ने एक दोस्त से यहां तक कहा था कि वह जिल से शादी करना चाहता है.

लेकिन बाद में दोनों के रिश्ते बिगड़ गए. जिल ने उसके व्यवहार को लेकर उससे दूरी बना ली थी. अगस्त 1976 में लुकास को जिल के घर में घुसने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था.

इसके करीब एक हफ्ते बाद एक ही दिन दोनों के बीच दो बार विवाद हुआ. दोनों घटनाओं के बीच कई घंटे का अंतर था. बाद में गवाहों ने अदालत में बताया कि बातचीत बिगड़ने के बाद लुकास ने जिल को जान से मारने की धमकी दी थी.

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नशे में था और दोस्तों से बोला- 'उसे गड्ढे में डाल दूंगा'
14 अगस्त 1976 की रात जिल अपने दोस्तों के साथ डांस के लिए गई थी. वह करीब आधी रात को घर लौटी. उसके साथ 17 साल की टेरी राइस और 19 साल के रिचर्ड बर्ड जूनियर भी थे. जिल लुकास से डरी हुई थी. इसलिए उसने दोनों दोस्तों से रात में उसके घर पर रुकने को कहा था. लेकिन लुकास पहले से वहां घात लगाकर बैठा था.

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, हत्या वाली रात लुकास ने शराब पी रखी थी और नशीली दवाएं भी ली थीं. इससे पहले एक पेट्रोल पंप पर उसका झगड़ा भी हुआ था. उसने अपने दोस्तों से कहा था कि वह उस लड़की को 'गड्ढे में डाल देगा.' इसके कुछ ही समय बाद उसने जिल और उसके दोस्तों पर हमला कर दिया.

पीछे से चार गोलियां मारीं, फिर बाहर खींचकर हत्या
लुकास ने बच्ची की पीठ में चार गोलियां मारीं. टेरी और रिचर्ड जान बचाने के लिए घर के अंदर भागे और मदद के लिए फोन करने लगे. बच्ची घायल हालत में अंदर की तरफ भागी. वह अपनी जान बचाने के लिए गिड़गिड़ा रही थी. लेकिन लुकास ने उसका पीछा किया और उसे खींचकर दोबारा बाहर ले आया.

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इसके बाद उसने उस लड़की को तीन और गोलियां मारीं. इनमें से एक गोली उसके सिर के पिछले हिस्से में लगी, जो उसकी जान लेने वाली गोली साबित हुई. लुकास ने पीड़िता के दोस्तों को भी नहीं छोड़ा. उसने रिचर्ड के पेट और टेरी के कूल्हे में गोली मारी. हालांकि दोनों हमले में बच गए. लुकास को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया.

एक ही केस में चार बार मिली मौत की सजा
लुकास को पहली बार मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन उसकी कानूनी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. अदालती और प्रक्रियात्मक गलतियों के कारण कई बार उसकी मौत की सजा रद्द हुई. उसे दोबारा सजा सुनाई गई और कुल मिलाकर उसे चार बार डेथ सेंटेंस दिया गया.

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इसी कानूनी प्रक्रिया के कारण 1976 में हुई हत्या के बाद लुकास को फांसी दिए जाने में पांच दशक लग गए. 1987 में हुए मुकदमे के दौरान अभियोजक जॉन डोमरिच ने जिल की हत्या को सीधे तौर पर 'एक फांसी' बताया था. उन्होंने जूरी से कहा था कि जिल ने जब अपनी जान की भीख मांगी, तब भी लुकास ने उसे मार डाला.

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आखिरी दिन क्या किया लुकास ने?
फांसी वाले दिन लुकास सुबह 5:45 बजे उठा था. बाद में उसकी बहन उससे मिलने जेल पहुंची. उसका आखिरी खाना स्टेक और फ्राइज था. उसने फांसी से पहले किसी धार्मिक या आध्यात्मिक सलाहकार से मुलाकात नहीं की. शाम 6 बजे के आसपास फांसी की प्रक्रिया शुरू हुई और 6:18 बजे लुकास को मृत घोषित कर दिया गया.

लुकास इस साल फ्लोरिडा में मौत की सजा पाने वाला 14वां कैदी था. राज्य के गवर्नर रॉन डेसेंटिस दो और डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जिनकी फांसी की तारीखें इसी महीने बाद में तय हैं.

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