क्या सच में एक पतली चट्टान के बीच से निकलने पर मोक्ष मिलता है? तमिलनाडु के एक मंदिर में हुई दर्दनाक घटना के बाद यह सवाल फिर से चर्चा में है. एक 36 वर्षीय श्रद्धालु की इसी संकरे रास्ते में फंसने से मौत हो गई. इसके बाद कुछ महीने पुराना एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला उसी जगह पर फंसी हुई नजर आ रही है. यह हादसा तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई स्थित अरुणाचल पहाड़ी पर हुआ. यहां हर साल हजारों श्रद्धालु 14 किलोमीटर लंबी गिरिवलम (परिक्रमा) करते हैं. इसी रास्ते में इडुक्कू पिल्लयार मंदिर के पास एक बेहद संकरा चट्टानी रास्ता है, जिसे स्थानीय लोग'मोक्ष मार्गम' यानी 'मुक्ति का रास्ता'कहते हैं.
कैसे हुई श्रद्धालु की मौत?
24 जुलाई को आंध्र प्रदेश के रहने वाले 36 वर्षीय मणिकुमार दर्शन के लिए यहां पहुंचे थे. परिक्रमा के दौरान उन्होंने भी मोक्ष मार्गम से निकलने क कोशिश की. लेकिन चट्टानों के बीच बनी बेहद तंग जगह में उनका शरीर फंस गया. कुछ ही मिनटों में उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. बाद में फायर एंड रेस्क्यू सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला. हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी.
फिर वायरल हुआ पुराना वीडियो
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ महीने पहले का एक वीडियो फिर से वायरल होने लगा. वीडियो में एक महिला उसी मोक्ष मार्गम से गुजरने की कोशिश करती दिखाई देती है. महिला बीच रास्ते में फंस जाती है. वह न आगे बढ़ पाती है और न ही पीछे लौट पाती है. कई मिनट तक उसकी हालत बेहद खराब बनी रहती है. सांस लेने में भी उसे परेशानी होने लगती है. आसपास मौजूद श्रद्धालु लगातार उसे बाहर निकालने की कोशिश करते हैं. काफी देर की मेहनत के बाद आखिरकार महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है. अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो यह घटना भी बड़ा हादसा बन सकती थी.
आखिर क्यों गुजरते हैं लोग इस रास्ते से?
स्थानीय लोगों के बीच वर्षों से यह मान्यता चली आ रही है कि इस संकरी चट्टान से निकलने पर इंसान की परेशानियां दूर होती हैं. कई लोग मानते हैं कि इससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करते हैं. हालांकि, धार्मिक विद्वानों और आध्यात्मिक गुरुओं का कहना है कि इस विश्वास का कोई ठोस धार्मिक प्रमाण नहीं है. यह मान्यता स्थानीय लोककथाओं से जुड़ी हुई है.
धार्मिक ग्रंथों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि किसी संकरी चट्टान से निकलने भर से मोक्ष मिल जाता है. आध्यात्मिक दृष्टि से मोक्ष का अर्थ आत्मज्ञान, अच्छे कर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने से माना जाता है.
अब उठ रही सुरक्षा बढ़ाने की मांग
मणिकुमार की मौत के बाद श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि इस जगह पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. लोगों ने मांग की है कि यहां साफ चेतावनी वाले बोर्ड लगाए जाएं, अधिक वजन या बड़े शरीर वाले लोगों को इस रास्ते में जाने से रोका जाए, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बेहतर व्यवस्था की जाए. कई लोगों का मानना है कि आस्था अपनी जगह है, लेकिन किसी भी धार्मिक परंपरा की वजह से किसी की जान खतरे में नहीं पड़नी चाहिए.
आस्था से बढ़कर है इंसानी जिंदगी
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. अगर समय रहते उचित इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं. मोक्ष की तलाश में कोई श्रद्धालु अपनी जान गंवा दे, यह किसी भी समाज के लिए चिंता की बात है. इसलिए अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाता है.
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