Google की नौकरी छोड़ी तो क्या मिला? पंजाब लौटे युवक की कहानी वायरल

गूगल की करीब 83 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर पंजाब लौटे मंतज सिंह सिद्धू की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. उन्होंने अपने चचेरे भाई के साथ ऑर्गेनिक खेती का ऐसा मॉडल शुरू किया, जिसमें शहरों में रहने वाले परिवारों को खेत का एक हिस्सा अलॉट कर उनके लिए सब्जियां उगाई जाती हैं.

Advertisement
मंतज मूल रूप से पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं.(Photo:Insta/@gillorganics) मंतज मूल रूप से पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं.(Photo:Insta/@gillorganics)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों मंतज सिंह सिद्धू की कहानी खूब वायरल हो रही है. डबलिन में गूगल की करीब 83 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर पंजाब लौटने और ऑर्गेनिक खेती से जुड़ा अपना काम शुरू करने का उनका फैसला लोगों को प्रेरित कर रहा है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों और उसे खुद पर भरोसा हो, तो वह अपनी राह कहीं भी बना सकता है. आइए जानते हैं मंतज सिंह सिद्धू की वह कहानी, जिसकी इन दिनों खूब चर्चा हो रही है.

Advertisement

मंतज सिंह सिद्धू के पास डबलिन (आयरलैंड) में गूगल की मोटी सैलरी वाली नौकरी, शानदार करियर और करीब 83 लाख रुपये का पैकेज था. भारत में लोगों की नजर में यह ऐसी जॉब है, जिसके लिए लोग दिन-रात मेहनत करते हैं. लेकिन मंतज ने 2022 में यह नौकरी छोड़ दी. वजह थी एक एहसास कि वह जिस सीढ़ी पर चढ़ रहे थे, वह शायद कहीं नहीं ले जा रही थी.

पटियाला से डबलिन और फिर पंजाब वापसी

मंतज मूल रूप से पंजाब के पटियाला के रहने वाले हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से एमबीए करने के बाद टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग के शौक ने उन्हें आयरलैंड पहुंचा दिया. उन्होंने करीब पांच साल गूगल में काम किया. शुरुआत हैदराबाद ऑफिस से हुई और बाद में वह डबलिन टीम में चले गए. यहां वह यूके की बड़ी एडवरटाइजिंग एजेंसियों के लिए बिजनेस स्ट्रैटेजी पर काम करते थे. 

Advertisement

लेकिन करियर में आगे बढ़ते-बढ़ते उनके मन में सवाल उठने लगा कि आखिर वह किस दिशा में जा रहे हैं. उन्हें लगा कि उनसे आगे बढ़े लोगों की जिंदगी में पैकेज का फर्क जरूर था, लेकिन रूटीन और काम का दबाव लगभग वैसा ही था. इसी एहसास ने उन्हें अपनी जिंदगी की दिशा बदलने पर मजबूर किया.

देखें ेये पोस्ट

 

दादाजी की विरासत बनी नई राह

पंजाब लौटने के बाद मंतज ने अपने चचेरे भाई डॉ. बलजीत सिंह गिल के साथ Gill Organics की शुरुआत की. दोनों अपने दिवंगत दादा सरदार बलदेव सिंह सिद्धू की जीवनशैली से प्रेरित रहे हैं. परिवार के मुताबिक, वह ऑर्गेनिक लाइफस्टाइल में गहरी आस्था रखते थे और 94 साल की उम्र तक बेहद स्वस्थ रहे. यही सोच आगे चलकर इस वेंचर की नींव बनी.

बलजीत ने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से पीएचडी की है और पटियाला जिले के फतेहपुर गांव स्थित गिल फार्महाउस में पले-बढ़े हैं. आज यही फार्म इस पूरे वेंचर का बेस है.

खेत का टुकड़ा, आपके परिवार के नाम

Gill Organics का मॉडल सामान्य तरीके से सब्जियां खरीदने से अलग है. शहरी परिवारों को खेत का एक हिस्सा कुछ समय के लिए अलॉट किया जाता है, जहां उनके लिए सीजनल सब्जियां उगाई जाती हैं. परिवार चाहें तो फार्म पर जाकर खुद सब्जियां तोड़ सकते हैं या घर बैठे डिलीवरी ले सकते हैं.

Advertisement

टीम का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ ऑर्गेनिक उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि इस शब्द के गलत इस्तेमाल के बीच लोगों का भरोसा दोबारा कायम करना और डिमांड-सप्लाई के गैप को कम करना भी है. गार्जियन की रिपोर्ट बताती है कि  शुरुआत में यह प्रोजेक्ट सिर्फ 35 परिवारों तक सीमित था. अब इसकी वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो चुकी है कि Gill Organics की वेबसाइट के मुताबिक अगली बुकिंग सितंबर 2026 में खुलेगी.

रेवेन्यू ज्यादा, लेकिन जेब में पहले से कम पैसा

Gill Organics का रेवेन्यू अब मंतज की गूगल की सैलरी से भी ज्यादा हो चुका है. हालांकि ऑपरेशनल खर्च और बिजनेस में दोबारा निवेश के कारण उनकी निजी कमाई पहले से कम है.

मंतज का कहना है कि गूगल में कमाया गया हर पैसा उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा किसी और के विजन के लिए देने की कीमत थी. आज बैंक बैलेंस भले पहले जितना मजबूत न हो, लेकिन उनका समय और मेहनत पूरी तरह उनके अपने काम और अपने विजन के लिए है.

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »