बॉस ने WhatsApp पर लिखा ‘OK’, 2 दिन की छुट्टी लेकर लौटा तो हुआ सस्पेंड, जानें पूरा मामला

बॉस ने वॉट्सअप पर ‘ओके’ लिखा, तो कर्मचारी ने दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी ले ली. लेकिन ऑफिस लौटने पर उसे सस्पेंड कर दिया गया. कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली.

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जानिए आखिर  वॉट्सअप  पर मिला ‘ओके’ छुट्टी की मंजूरी का पक्का सबूत क्यों नहीं माना गया. ( Photo: ITG) जानिए आखिर  वॉट्सअप  पर मिला ‘ओके’ छुट्टी की मंजूरी का पक्का सबूत क्यों नहीं माना गया. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:38 AM IST

कई बार ऑफिस में छुट्टी लेने के लिए कर्मचारी अपने बॉस को वॉट्सअप पर मैसेज करते हैं. बॉस की तरफ से ‘ओके’ का जवाब मिलते ही उन्हें लगता है कि छुट्टी मंजूर हो गई है. लेकिन क्या वॉट्सअप पर मिला सिर्फ ‘ओके’ छुट्टी की आधिकारिक मंजूरी माना जा सकता है? रेलवे के एक कर्मचारी से जुड़ा मामला इसी सवाल को लेकर चर्चा में है. कर्मचारी ने दावा किया कि उसके सीनियर अधिकारी ने वॉट्सअप पर दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी के लिए मंजूरी दी थी. लेकिन जब वह छुट्टी से वापस लौटा, तो उसे सस्पेंड कर दिया गया.

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बाद में उसका ट्रांसफर भी कर दिया गया. कर्मचारी ने इस फैसले को चैलेंज दी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उसकी याचिका खारिज कर दी. ट्रिब्यूनल ने कहा कि वॉट्सअप पर मिला ‘ओके’ अपने आप में इस बात का पक्का सबूत नहीं है कि छुट्टी आधिकारिक रूप से मंजूर हो गई थी.

तीन दिन की छुट्टी के बाद मांगे दो दिन और
यह मामला नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के कर्मचारी प्रिया रंजन कुमार से जुड़ा है. वह प्रयागराज में तैनात थे. कर्मचारी के मुताबिक, उन्होंने 14 से 16 जुलाई 2025 तक अपने गांव जाने के लिए तीन दिन की छुट्टी ली थी. इसके बाद उन्होंने 17 और 18 जुलाई की छुट्टी बढ़ाने के लिए वॉट्सअप पर अपने सीनियर अधिकारी को मैसेज किया. कर्मचारी का दावा था कि अधिकारी ने जवाब में ‘ओके’ लिखा था. उन्होंने इसे दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी की मंजूरी माना. कर्मचारी ने यह भी कहा कि उन्होंने इस बारे में दूसरे अधिकारी को फोन पर जानकारी दी थी. हालांकि, रेलवे प्रशासन का कहना था कि संबंधित अवधि में छुट्टी मंजूर करने की जिम्मेदारी दूसरे अधिकारी के पास थी. रेलवे के अनुसार, छुट्टी की आधिकारिक मंजूरी के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था.

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छुट्टी से लौटते ही सस्पेंड, फिर ट्रांसफर
कर्मचारी के मुताबिक, जब वह 21 जुलाई 2025 को ड्यूटी पर लौटे, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. इसके चार दिन बाद, 25 जुलाई को उनका ट्रांसफर प्रयागराज से फतेहपुर कर दिया गया. इसके बाद 31 जुलाई को उन्हें विभागीय कार्रवाई से जुड़ा आरोपपत्र भी जारी किया गया. कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में अपने ट्रांसफर को चुनौती दी. उनका तर्क था कि छुट्टी को लेकर हुए विवाद के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और ट्रांसफर भी इसी वजह से किया गया. दूसरी तरफ, रेलवे ने कहा कि फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर नया एंट्री और बुकिंग ऑफिस विकसित किया जा रहा था. वहां कामकाज के लिए कर्मचारियों की जरूरत थी. रेलवे ने इसी प्रशासनिक जरूरत को ट्रांसफर की वजह बताया.

ट्रिब्यूनल ने वॉट्सअप के ‘ओके’ पर क्या कहा?
इलाहाबाद स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वॉट्सअप पर मिला ‘ओके’ अपने आप में इस बात का पक्का सबूत नहीं है कि सक्षम अधिकारी ने छुट्टी मंजूर कर दी थी. यहां सक्षम अधिकारी का मतलब उस अधिकारी से है, जिसे नियमों के मुताबिक छुट्टी मंजूर करने का अधिकार मिला हुआ है. रेलवे का पक्ष था कि संबंधित अधिकारी उस समय ट्रेनिंग पर थे और विभाग का काम दूसरे अधिकारी देख रहे थे. छुट्टी मंजूर करने का अधिकार भी उसी दूसरे अधिकारी के पास था. रेलवे ने यह भी कहा कि छुट्टी के लिए तय आधिकारिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था.

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ट्रिब्यूनल ने रेलवे की दलीलों पर विचार करने के बाद माना कि कर्मचारी केवल वॉट्सअप के ‘ओके’ के आधार पर यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी अतिरिक्त छुट्टी आधिकारिक रूप से मंजूर हुई थी.

ट्रांसफर को सजा मानने की दलील भी खारिज
कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि उनका ट्रांसफर सामान्य प्रशासनिक जरूरत के बजाय उन्हें परेशान करने के लिए किया गया था. हालांकि, रेलवे ने ट्रिब्यूनल को बताया कि फतेहपुर में नए बुकिंग ऑफिस के लिए कर्मचारियों की जरूरत थी और ट्रांसफर इसी कारण किया गया. ट्रिब्यूनल ने रेलवे की इस दलील को स्वीकार किया. उसे ऐसा ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित होता कि ट्रांसफर का मकसद कर्मचारी को सजा देना था. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने 7 अक्टूबर 2026 को कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी और ट्रांसफर के फैसले को बरकरार रखा.

नौकरीपेशा लोगों के लिए क्या है सबक?
यह मामला उन कर्मचारियों के लिए अहम है, जो छुट्टी बढ़ाने या मंजूरी लेने के लिए सिर्फ वॉट्सअप मैसेज पर भरोसा कर लेते हैं. अगर बॉस ‘ओके’ लिखकर जवाब देता है, तो इससे हर स्थिति में यह साबित नहीं होता कि छुट्टी की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. खासकर तब, जब मैसेज का जवाब देने वाले अधिकारी के पास छुट्टी मंजूर करने का अधिकार ही न हो. इसलिए छुट्टी बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सही अधिकारी ने मंजूरी दी है और ऑफिस की तय प्रक्रिया पूरी हो गई है. जहां एचएमआरएस पोर्टल या कोई दूसरा आधिकारिक सिस्टम इस्तेमाल होता है, वहां मंजूरी का रिकॉर्ड भी चेक कर लेना चाहिए.

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