अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय युवक ने वहां के हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर अपना अनुभव शेयर किया है. उसका कहना है कि भारत और अमेरिका में मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मिले इलाज और खर्च के अनुभव में जमीन-आसमान का अंतर रहा. इसी अनुभव के बाद अब वह अमेरिका में स्थायी रूप से बसने के बजाय भारत लौटने की योजना बना रहा है.
सोशल मीडिया पर अमेरिका की जिंदगी को दिखाते हुए कई वीडियो वायरल होते हैं. कई बार ये वीडियो अमेरिका और इंडिया की जिंदगी को कंपेयर करते हुए होते हैं. कुछ ऐसी वजहें भी होती हैं, जिनकी वजह से इंडिया की जिंदगी के मुकाबले अमेरिका की जिंदगी बेहतर लगती है, लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. अमेरिका में बहुत कुछ ऐसा भी है, जहां भारत उससे कई गुना बेहतर है. ऐसा ही एक वीडियो में युवान इबानेज, जो कि इंडियन हैं, अपना एक्सपीरियंस बता रहे हैं. उनके वीडियो पर बहस छिड़ी हुई है.
इस वीडियो में उन्होंने भारत और अमेरिका में अपने साथ हुई दो मेडिकल इमरजेंसी की तुलना की. उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले भारत में वह कई बार बेहोश हुए थे. परिवार उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर गया, जहां उनके मुताबिक बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के उन्हें तुरंत प्राइवेट रूम मिल गया.
युवान ने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी कई जांचें कीं. इनमें ECG, MRI, CT scan और शामिल थे. उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वह डॉक्टर से बात भी कर सकते थे. कुछ दिनों बाद उन्हें बीमारी की जानकारी और इलाज का प्लान बताया गया. युवान के मुताबिक, भारत में इस पूरे इलाज का बिल करीब 500 डॉलर आया था. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 47 हजार रुपये बैठती है.
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अमेरिका में सीने में तेज दर्द, अस्पताल पहुंचने में भी हुई परेशानी
इसके बाद युवान ने अमेरिका में हुई एक मेडिकल इमरजेंसी के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि वह बॉस्केटबॉल खेल रहे थे, तभी उनके सीने में तेज दर्द शुरू हो गया. दर्द इतना ज्यादा था कि उनके लिए सामान्य तरीके से चलना भी मुश्किल हो रहा था.
युवान का दावा है कि उन्होंने एंबुलेंस नहीं बुलाई, क्योंकि अमेरिका में इसके लिए हजारों डॉलर खर्च हो सकते हैं. इसके बजाय वह खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल पहुंचे.
उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक वेटिंग रूम में रहना पड़ा. उनके मुताबिक, इस दौरान फॉर्म और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी. बाद में डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उन्हें मिनी हार्ट अटैक हुआ था. इसके बाद कई तरह की जांच की गईं.
डॉक्टर से मिलने के लिए भी करना पड़ा इंतजार
युवान ने दावा किया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्हें डॉक्टर से मिलने में भी परेशानी हुई. उनका कहना है कि जब भी उन्होंने डॉक्टर से बात करने की इच्छा जताई, उन्हें बताया गया कि डॉक्टर व्यस्त हैं और बाद में आएंगे.
हालांकि, युवान ने यह भी कहा कि अमेरिका में अच्छी इन्फ्रास्ट्रक्चर और अच्छा मौसम है, लेकिन उनके लिए हेल्थकेयर सिस्टम सच में बेहद जर्जर है.
23 हजार डॉलर का बिल, बीमा के बावजूद जेब से देने पड़े 7 हजार डॉलर
युवान के मुताबिक, अमेरिका में उनके इलाज का कुल बिल 23,000 डॉलर यानी करीब 22 लाख रुपये आया. उन्होंने बताया कि उनके पास टॉप लेवल इंश्योरेंस भी था और इसके लिए वह हर महीने हजारों डॉलर खर्च कर रहे थे. इसके बावजूद युवान का दावा है कि उन्हें करीब 7,000 डॉलर यानी लगभग 6.67 लाख रुपये अपनी जेब से देने पड़े.
इसी अनुभव को बताते हुए उन्होंने अमेरिकी हेल्थकेयर की कड़ी आलोचना की. युवान ने आरोप लगाया कि अमेरिका में बीमार होना लोगों के लिए आर्थिक बोझ बन जाता है.
'भारत में मिले इलाज ने सोच बदल दी'
युवान ने बताया कि भारत में अपने अनुभव और अमेरिका में हुई मेडिकल इमरजेंसी की तुलना करने के बाद उनकी सोच बदली है. उनका कहना है कि हेल्थकेयर उन प्रमुख वजहों में से एक है, जिसके कारण वह भारत लौटने के बारे में सोच रहे हैं.
उनके वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी मेडिकल और अस्पताल से जुड़ी कहानियां शेयर कीं. एक यूजर ने लिखा कि इसीलिए मुझे भारत पसंद है.
एक अन्य यूजर ने अमेरिका में अपने ER के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां दो बार अस्पताल जाने के बाद भी उनसे काफी पैसे लिए गए और डॉक्टर यह नहीं बता सके कि समस्या क्या थी. एक अन्य यूजर ने लिखा कि भारत में बेहतरीन डॉक्टर और हेल्थकेयर उपलब्ध है.
अमेरिका में काम कर रहे हैं, भारत में बीता बचपन
वीडियो के कमेंट सेक्शन में युवान ने यह भी साफ किया कि वह भारतीय हैं. उन्होंने बताया कि वह पुणे में 16 साल तक बड़े हुए हैं और फिलहाल सिर्फ काम के सिलसिले में अमेरिका में रह रहे हैं.
हालांकि, युवान द्वारा शेयर किए गए अनुभव व्यक्तिगत हैं और अमेरिका या भारत की पूरी हेल्थकेयर व्यवस्था का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं करते. दोनों देशों में इलाज की लागत, इंश्योरेंस कवरेज और अस्पताल की व्यवस्था मरीज की स्थिति और हेल्थकेयर प्रोवाइडर के हिसाब से काफी अलग हो सकती है.
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