कहते हैं इंसान रिश्तों से चलता है. हर रिश्ते की अपनी एक तासीर होती है. पापा की डांट, मां की ममता और दादी के बुजुर्ग हाथों का स्पर्श... इन रिश्तों से मिली सीख जिंदगी के मुश्किल दौर में अक्सर काम आती है. उम्र के थपेड़ों से गुजरकर दादी जो अनुभव हासिल करती हैं, वही कई बार जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बन जाते हैं. ऐसी ही एक दादी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हैं.
लुधियाना की 88 साल की दिलजीत कौर अपने अनुभवों और जिंदगी से जुड़ी सीख वाले वीडियो शेयर करती हैं और लोगों का ध्यान खींच रही हैं.
रिटायर्ड टीचर दिलजीत कौर उम्र के इस पड़ाव पर भी बेहद सक्रिय हैं. उनके पोते वीडियो बनाने में उनकी मदद करते हैं. इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने वाले उनके वीडियो भारत ही नहीं, पाकिस्तान में भी लोगों को पसंद आ रहे हैं. उनकी सादगी और जिंदगी के अनुभवों से जुड़ी बातें लोगों को अपने घर की दादी-नानी की याद दिलाती हैं.
88 साल की उम्र में दी 30 साल की सीख
दिलजीत कौर का एक वीडियो खास तौर पर चर्चा में है. इसमें उन्होंने बताया कि अगर उन्हें दोबारा 30 साल की उम्र में जाने का मौका मिले तो वह सबसे पहले दूसरों से अपनी तुलना करना बंद कर देंगी.
उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि एक समय उन्हें भी लगता था कि दूसरे लोग उनसे आगे निकल रहे हैं. लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि जिंदगी ऐसी दौड़ नहीं है, जिसमें हर व्यक्ति को एक ही समय पर मंजिल तक पहुंचना हो. हर इंसान का अपना समय और अपनी रफ्तार होती है.
यही उनकी इस सीख का सबसे अहम हिस्सा है. वह कहती हैं कि दूसरों की जिंदगी देखकर खुद को कमतर समझने के बजाय अपनी राह पर ध्यान देना चाहिए. अपनी गति से आगे बढ़ना और छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करना ही जिंदगी को बेहतर बनाता है.
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युवाओं को भी क्यों पसंद आ रही दादी की बातें?
आमतौर पर इंस्टाग्राम को युवाओं की दुनिया माना जाता है, लेकिन दिलजीत कौर की बातें जेन-जी से लेकर जेन अल्फा तक के लोगों को आकर्षित कर रही हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि उनकी बातें किसी किताबी सलाह जैसी नहीं लगतीं. वह अपनी जिंदगी के अनुभवों से बात करती हैं.
वह बिल्कुल वैसी ही लगती हैं, जैसी हर परिवार में एक दादी होती हैं. जब जिंदगी की मुश्किलों में उलझन बढ़ जाती है, तो दादी के अनुभव से निकली छोटी-सी सलाह भी रास्ता दिखा देती है.
सोशल मीडिया के दौर में लोग अक्सर दूसरों की सफलता, करियर और लाइफस्टाइल देखकर खुद को पीछे समझने लगते हैं. ऐसे में तुलना और पीछे छूट जाने का डर यानी एफओएमओ भी बढ़ सकता है. दिलजीत कौर की सीख इसी सोच को चुनौती देती है.
उनका संदेश है कि अपनी जिंदगी को दूसरों की जिंदगी से न तौलें. छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करें, ईमानदारी से मेहनत करते रहें और अपनी रफ्तार से आगे बढ़ें.
रिटायरमेंट के बाद शुरू हुआ सोशल मीडिया का सफर
दिलजीत कौर लंबे समय तक टीचर रहीं. रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने खुद को सक्रिय रखा. इसके बाद पोते की मदद से उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करना शुरू किया.
धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उनकी अपनी एक पहचान बन गई. उनके वीडियो की खासियत उनकी सरल भाषा और जिंदगी के अनुभव हैं. यही वजह है कि कई लोग उनमें अपनी दादी या नानी की झलक देखते हैं.
उनके वीडियो पर आने वाली प्रतिक्रियाओं में लोग बताते हैं कि उनकी बातें सुनकर उन्हें सुकून मिलता है और सकारात्मक सोचने की प्रेरणा मिलती है. यही जुड़ाव उनके कंटेंट को दूसरे प्रेरणादायक वीडियो से अलग बनाता है.
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