Most Peaceful Himalayan Villages: अक्टूबर का महीना आते ही लॉन्ग वीकेंड मिल रहा है, जिसके लिए लोग बहुत एक्साइडेट हैं. हालांकि हर छुट्टी में हर बार कसोल, मनाली, शिमला, नैनीताल और मसूरी जाने की जरूरत नहीं है. क्योंकि हिमाचल और उत्तराखंड की पॉपुलर जगहों पर जाकर तो ऐसा महसूस होने लगता है, जैसे आधी दिल्ली यहीं पर आ गई हो.
लंबा ट्रैफिक जाम, लंबी कतारें और होटल की बुकिंग की दिक्कतें पहाड़ों की शांति का मजा खराब कर देते हैं. ऐसे में इस बार दिल्ली से महज कुछ घंटों की दूरी पर बचे इन सुकून भरे गावों की सैर कर सकते हैं. अगर आप इस बार भीड़ से दूर किसी शांत हिमालयी गांव में कुछ दिन बिताना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ कम चर्चित गांवों का रुख कर सकते हैं.
यहां आपको नदी किनारे होमस्टे, हरे-भरे जंगल, पहाड़ों के शानदार नजारे, स्थानीय लोगों की सादगी और पहाड़ी खाने का स्वाद करीब से जानने का मौका मिलेगा. इनमें से कई जगहों तक दिल्ली से रातभर की बस यात्रा के बाद पहुंचा जा सकता है.
गुशैनी वैली, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल की तीर्थन नदी के किनारे बसा गुशैनी बेहद शांत इलाका है, यह जगह उन लोगों के लिए बेहतरीन होने वाली है, जो कम भीड़भाड़ से दूर नेचर के करीब सुकून भरी छुट्टियां बिताना चागते हैं. एक तो यहां पर आपको आराम से होमस्टे मिल जाएंगे, जहां से नदी किनारे आप अपनी शाम को आराम से चाय का लुफ्त उठा पाएंगे. यहां ट्राउट फिशिंग, नेचर वॉक और आसपास के जंगलों की सैर की जा सकती है. यह ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की ओर जाने का मैन एंट्री पॉइंट भी है. दिल्ली से रात की बस लेकर ऑट पहुंचें. यहां से करीब एक घंटे की टैक्सी यात्रा के बाद गुशैनी पहुंचा जा सकता है.
राशोल, पार्वती वैली
अगर आप ट्रेकिंग करना पसंद करते हैं तो आप राशोल का रूख कर सकते हैं, जहां आपको लॉन्ग वीकेंड पर गांव की लाइफ के साथ ट्रेकिंग का भी मजा मिल जाएगा. पार्वती वैली पर स्थित इस गांव तक सड़क से सीधे नहीं पहुंचा जा सकता. दिल्ली से आपको पहले कसोल तक बस से जाना होगा और फिर करीब 3 से 4 घंटे का ट्रेक करके आप राशोल पहुंचते हैं. हालांकि ट्रेक करके जब आप गांव तक पहुंचते हैं तो वहां से आपको पार्वती वैली की दिल छू लेने वाली नजारे देखने को मिलते हैं.
बरोट, मंडी
उहल नदी के आसपास बसा बरोट हिमाचल की शांत और खूबसूरत जगहों में से एक है. यहां नदी किनारे बैठने से लेकर जंगलों में कैंपिंग तक का मजा लिया जा सकता है. बरोट अपनी ट्राउट फार्मिंग के लिए भी जाना जाता है. आसपास की हरियाली और पुराने हॉलिज ट्रॉली रूट इसे बाकी पहाड़ी जगहों से हटकर एक्सपीरियंस देते हैं. यहां पहुंचने के लिए पहले आप दिल्ली से मंडी या जोगिंदर नगर तक रात की बस लें. इसके बाद करीब दो घंटे की सड़क यात्रा करके बरोट पहुंच सकते हैं.
चोपता, उत्तराखंड
उत्तराखंड का चोपता अपनी हरी-भरी घास की ढलानों और हिमालयी नजारों के लिए मशहूर है. इसे मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया भी कहा जाता है. चोपता, तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक का बेस भी है, यहां से सनराइस और आसपास की पहाड़ियों का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. दिल्ली से ऋषिकेश होते हुए चोपता पहुंचने में करीब 9 से 10 घंटे लग सकते हैं. इसलिए यहां का ट्रिप थोड़ा लंबा रखकर चलना बेहतर रहेगा.
कल्पा, पार्वती वैली
पार्वती वैली के शांत इलाकों में बसे कल्पा के आसपास छोटे गांव, सेब के बाग और घने जंगल देखने को मिलते हैं. कसोल की तुलना में यहां माहौल ज्यादा शांत महसूस होता है. अगर आप एक-दो दिन की बजाय कुछ समय पहाड़ों में रहकर स्थानीय जिंदगी को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह जगह आपको पसंद आ सकती है. दिल्ली से रात की बस लेकर भुंतर पहुंचें. इसके बाद टैक्सी से बरशैनी और फिर गांव की ओर जाना होगा.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क