Jantar Mantar CJP Protest: इंटरनेट बंद, नेटवर्क नहीं, फिर भी चल रहे थे मैसेज! कैसे काम करते हैं ये सीक्रेट ऐप?

बिना नेटवर्क और इंटरनेट के जंतर मंतर प्रोटेस्ट में लोग एक दूसरे से बात कैसे कर रहे हैं? ऐसे कई ऐप्स हैं जो बिना नेटवर्क और इंटरनेट के काम करते हैं. ये ऐप्स मेश नेटवर्क का यूज करते हैं. आइए जानते हैं पूरा प्रोसेस.

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बिना इंटरनेट और नेटवर्क के कैसे होती है चैटिंग बिना इंटरनेट और नेटवर्क के कैसे होती है चैटिंग

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे CJP और स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच एक नई टेक्नोलॉजी चर्चा में आ गई है. बताया जा रहा है कि कुछ प्रदर्शनकारी ऐसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें चलाने के लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती.

इसी वजह से दिल्ली पुलिस भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर ये ऐप कैसे काम करते हैं और क्या इनकी मदद से भेजे गए मैसेज को ट्रैक किया जा सकता है. प्रोटेस्टर्स आरोप लगा रहे हैं कि पूरे इलाके में जैमर लगा दिया गया है और इस वजह से मोबाइल में नेटवर्क और इंटरनेट नहीं है.

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आम तौर पर WhatsApp, Telegram या Signal जैसे ऐप मैसेज भेजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कुछ खास ऐप ऐसे हैं जो इंटरनेट की जगह Bluetooth और कभी-कभी Wi-Fi Direct का इस्तेमाल करते हैं.

बिना नेटवर्क और इंटरनेट के कैसे हो रही है चैटिंग?

यानी अगर मोबाइल डेटा बंद हो, 4G-5G काम न कर रहा हो या इंटरनेट बंद कर दिया जाए, तब भी ये ऐप कुछ दूरी तक मैसेज भेज सकते हैं. 

इन ऐप का सबसे खास फीचर Mesh Network है. इसे आसान भाषा में समझें तो हर फोन एक छोटे टावर की तरह काम करता है. अगर आपके दोस्त का फोन आपसे 50 या 100 मीटर दूर है तो मैसेज सीधे उसके फोन तक पहुंच जाएगा.

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अगर वो शख्स ज्यादा दूर है, लेकिन बीच में उसी ऐप का इस्तेमाल करने वाले दूसरे लोग मौजूद हैं, तो मैसेज एक फोन से दूसरे फोन और फिर तीसरे फोन तक जाता हुआ आखिर में सही शख्स तक पहुंच सकता है. इसी वजह से इसे मेश नेटवर्क कहा जाता है.

इसी टेक की वजह से ऐसे मैसेज मोबाइल टावर या किसी एक सर्वर से होकर नहीं गुजरते. इसलिए इन्हें ट्रैक करना नॉर्मल इंटरनेट मैसेज की तुलना में मुश्किल हो सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें कभी भी जांचा नहीं जा सकता. जांच एजेंसियां दूसरे डिजिटल सबूत, CCTV, फोन या अन्य तरीकों से भी जानकारी जुटा सकती हैं.

बिना नेटवर्क और इंटरनेट के चलने वाले ऐप्स

इस समय जिन ऐप की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है उनमें Bridgefy, Briar और Bitchat शामिल हैं. Bridgefy ऐप ब्लूटूथ के जरिए आसपास मौजूद फोन को जोड़ता है और मैसेज एक फोन से दूसरे फोन तक पहुंचाता है. कंपनी का कहना है कि इसका इस्तेमाल इंटरनेट बंद होने, प्राकृतिक आपदा, बड़े कार्यक्रम या भीड़ वाली जगहों पर किया जा सकता है.

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Briar थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. इंटरनेट उपलब्ध होने पर यह Tor नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, लेकिन इंटरनेट न होने पर ब्लूटूथ और Wi-Fi के जरिए सीधे दूसरे फोन से जुड़ सकता है.

इस ऐप को खास तौर पर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ऐसे लोगों के लिए बनाया गया है जिन्हें सुरक्षित तरीके से बातचीत करनी होती है. 

What is Bluetooth Mesh?

Bitchat एक नया ऐप है जिसकी चर्चा हाल के दिनों में काफी बढ़ी है. इसमें फोन नंबर, ईमेल आईडी या किसी बड़े सर्वर की जरूरत नहीं होती. यह भी Bluetooth Mesh तकनीक पर काम करता है और आसपास मौजूद फोन के जरिए मैसेज आगे बढ़ाता है. 

ऐसे ऐप का इस्तेमाल सिर्फ प्रोटेस्ट में ही नहीं होता. जब भूकंप, बाढ़ या किसी दूसरी आपदा की वजह से मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए, तब भी इनका इस्तेमाल लोगों से संपर्क बनाए रखने के लिए किया जाता है. दुनिया के कई देशों में इंटरनेट बंद होने के दौरान भी ऐसे ऐप इस्तेमाल किए जा चुके हैं. 

हालांकि इन ऐप की भी अपनी लिमिटेशन्स भी हैं. ये वॉट्सऐप की तरह पूरी दुनिया में तुरंत मैसेज नहीं भेज सकते. इनकी रेंज ब्लूटूथ तक ही लिमिटेड होती है और बेहतर तरीके से काम करने के लिए आसपास उसी ऐप का इस्तेमाल करने वाले काफी लोगों का होना जरूरी है. अगर नेटवर्क में बहुत कम लोग होंगे, तो मैसेज आगे नहीं जा पाएगा. 

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यानी इंटरनेट बंद होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि लोगों के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म हो जाएगा. ब्लूटूथ मेश जैसी तकनीक मोबाइल नेटवर्क के बिना भी कुछ हद तक मैसेज भेजने की सुविधा देती है. यही वजह है कि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के दौरान इन ऐप की चर्चा अचानक तेज हो गई है. 

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