क्या है Muse AI जिसने एक दिन में Meta CEO मार्क जकरबर्ग की नेटवर्थ में जोड़ दिए 25 बिलियन डॉलर?

मार्क जकरबर्ग ने मेटा कनेक्ट इवेंट में Muse Charm पेश किया. ये एक छोटा गैजेट है जो आपके रोजमर्रा के काम कर सकता है. MuseAI हाल ही में टिकट बुक करता भी दिखा था. रिपोर्ट के मुताबिक निवेशकों को MuseAI पसंद आ रहा है और मेटा को खूब फायदा हुआ जिससे जकरबर्ग की नेटवर्थ एक दिन में इतनी बढ़ गई कि उन्होंने गूगल के सर्गेई ब्रिन को पीछे छोड़ दिया.

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मेटा कनेक्ट में मार्क जकरबर्ग (Photo: AP) मेटा कनेक्ट में मार्क जकरबर्ग (Photo: AP)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST

सोशल मीडिया की दुनिया से शुरू हुई मेटा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां उसका अगला बड़ा दांव Facebook या Instagram नहीं है. बल्कि, एक ऐसा AI है जो सिर्फ आपके सवालों का जवाब नहीं देगा, बल्कि आपके लिए काम भी करेगा. इसी दांव का नाम है Muse.

सितंबर में Muse की शुरुआत के बाद मेटा के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला और कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 200 अरब डॉलर तक बढ़ा. इसी तेजी का असर मार्क जकरबर्ग की निजी संपत्ति पर भी पड़ा.

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Forbes के मुताबिक, सिर्फ बुधवार को उनकी संपत्ति 4 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ी और वह दुनिया के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए. इससे पहले एक दिन में उनकी संपत्ति करीब 25 अरब डॉलर बढ़ने की रिपोर्ट भी सामने आई थी. हालांकि, शेयर बाजार की इस तेजी को सिर्फ म्यूस की वजह मानना सही नहीं होगा, क्योंकि मेटा का ऐड्स कारोबार और पूरे टेक सेक्टर की चाल भी इसमें शामिल है. 

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ChatGPT की तरह सिर्फ जवाब नहीं, काम भी करेगा Muse

मेटा ने म्यूस को एक ऐसे AI एजेंट के तौर पर पेश किया है जिसे आप बस अपना काम बता सकते हैं. उदाहरण के लिए ईमेल भेजना, यात्रा बुक करना, ऑनलाइन खरीदारी करना या किसी बड़े काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसकी योजना बनाना.

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मेटा के मुताबिक म्यूस ब्राउजर खोल सकता है, वेबसाइट पर फॉर्म भर सकता है और जरूरत पड़ने पर आपकी तरफ से बातचीत भी कर सकता है. सबसे बड़ा फर्क यह है कि काम शुरू करने के बाद आपको हर समय स्क्रीन के सामने बैठे रहने की जरूरत नहीं है. म्यूस बैकग्राउंड में काम जारी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर आपसे मंजूरी मांग सकता है. 

मेटा ने म्यूस इसे सिर्फ टेक्नोलॉजी के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी अगली बड़ी स्ट्रैटिजी के हिस्से के तौर पर पेश किया है. कंपनी अब पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस की बात कर रही है. इसका मतलब है ऐसा AI जो सिर्फ सामान्य जानकारी न दे, बल्कि व्यक्ति की जरूरत, पसंद और रोजमर्रा के काम को समझकर उसके लिए ज्यादा पर्सनल तरीके से काम करे. 

जकरबर्ग का बड़ा दांव AI डिवाइस?

यहां मेटा का असली प्लान और दिलचस्प हो जाता है. Muse सिर्फ फोन तक नहीं है. Meta Connect 2026 में कंपनी ने बताया कि म्यूस को उसके AI ग्लासेज के साथ जोड़ा जा रहा है. यानी फ्यूचर में AI से बात करने या कोई काम करवाने के लिए फोन निकालने की जरूरत कम हो सकती है.

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मेटा ने नए AI ग्लासेज और Ray-Ban Meta Audio भी पेश किए हैं. कंपनी के मुताबिक नए ऑडियो ग्लासेज 43 ग्राम के हैं और एक बार चार्ज करने पर 12 घंटे तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इनमें ओपन-ईयर ऑडियो और AI का इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी ने Ray-Ban Meta Gen 3 भी पेश किया है, जिसमें 12MP कैमरा, 3K वीडियो रिकॉर्डिंग और बेहतर बैटरी जैसे बदलाव हैं. 

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और फिर आया Muse Charm

इसी स्ट्रैटिजी का सबसे छोटा और शायद सबसे अजीब दिखने वाला हिस्सा है Muse Charm. यह एक छोटा AI डिवाइस है जिसे जेब या बैग में रखा जा सकता है. मेटा के मुताबिक इसका मकसद म्यूस को एक ऐसे छोटे डिवाइस में लाना है जिससे यूजर अपने पर्सनल AI Agent से बातचीत कर सके. इसमें रियल टाइम वॉयस मॉडल का इस्तेमाल किया गया है. मेटा ने फिलहाल इसकी पूरी कीमत और उपलब्धता की जानकारी नहीं दी है और कहा है कि इस साल बाद में और जानकारी दी जाएगी. 

यही चीज बताती है कि मेटा का मुकाबला सिर्फ ChatGPT जैसी AI सेवाओं से नहीं है. कंपनी AI के लिए पूरा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है.

Muse पर कितना भरोसा करेंगे लोग?

अगर कोई AI आपके ईमेल पढ़ सकता है, आपकी खरीदारी कर सकता है, यात्रा बुक कर सकता है, आपकी पसंद याद रख सकता है और आपके लिए फोन कॉल कर सकता है, तो उसे आपकी जिंदगी की बहुत सारी जानकारी मिलेगी. मेटा का कहना है कि म्यूस को सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसके लिए कंपनी ने म्यूस सिक्योर VM तैयार किया है, जिसमें AI और यूजर का डेटा एक अलग वर्चुअल कंप्यूटर में रखा जाता है. मेटा के अनुसार म्यूस को पासवर्ड और पेमेंट की जानकारी सीधे दिखाई नहीं देती और संवेदनशील काम करने से पहले यूजर की मंजूरी ली जाती है. यूजर यह भी तय कर सकता है कि म्यूस को किन ऐप्स का एक्सेस दिया जाए. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा अपने AI एजेंट के फोन कॉल फीचर में एक ह्यूमन कॉन्सीएर्ज यानी इंसानी सहायक की टेस्टिंग भी कर रही है, जिसमें कुछ कॉल इंसानी कॉन्ट्रैक्टर संभाल सकते हैं. कुछ कर्मचारियों ने इससे प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है. मेटा ने कहा है कि यह टेस्टिंग सुरक्षा और प्राइवेसी को बेहतर बनाने के लिए की जा रही है. 

निवेशकों ने म्यूस पर जताया भरोसा

म्यूस को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ एक नए AI ऐप को लेकर नहीं है. अगर लोग AI को अपने रोजमर्रा के काम सौंपना शुरू कर देते हैं, तो AI कंपनियों के लिए कमाई का तरीका भी बदल सकता है. Muse के फ्री वर्जन के अलावा 20 डॉलर और 100 डॉलर प्रति महीने के सब्सक्रिप्शन प्लान भी हैं. शुरुआती दौर में डाउनलोड और इस्तेमाल को लेकर भी मजबूत आंकड़े सामने आए हैं. 

Meta Connect 2026 में कंपनी ने मेटावर्स की पुरानी कहानी से ज्यादा AI, Personal Superintelligence और AI ग्लासेज पर जोर दिया. Muse, Muse Charm और AI ग्लासेज को एक साथ देखें तो तस्वीर और साफ होती है. मेटा ऐसा फ्यूचर बनाने की कोशिश कर रही है जिसमें AI आपके फोन के अंदर बंद ऐप नहीं, बल्कि आपके साथ चलने वाला डिजिटल सहायक हो. 

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