दुनिया मारती रही ताने, अंधी मां बनी ढाल! गोल्ड जीत इतिहास रचने वाली शर्मिला धनखड़ का छलका दर्द

हरियाणा की रहने वाली शर्मिला धनखड़ ने पैरा-एथलेटिक्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाकर 20 साल के सूखे को खत्म किया. इस जीत के बाद वह काफी इमोशनल नजर आईं. अपनी इस जीत को उन्होंने अपनी मां के नाम समर्पित किया.

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 जीत के बाद भावुक हुईं शर्मिला धनखड़ (PHOTO: PTI) जीत के बाद भावुक हुईं शर्मिला धनखड़ (PHOTO: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतकर शर्मिला धनखड़ ने इतिहास रच दिया. भारत की शर्मिला धनखड़ ने पैरा-एथलेटिक्स की महिला शॉट पुट (F57 इवेंट) में 9.81 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस थ्रो के साथ ही शर्मिला राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पैरा-एथलेटिक्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बन गई.

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शर्मिला धनखड़ की इस सफलता ने राष्ट्रमंडल खेलों के पैरा-एथलेटिक्स में भारत के 20 साल लंबे मेडल के इंतजार को खत्म कर दिया. इतना ही नहीं, यह मुकाबला भारत के लिए और भी खास रहा क्योंकि देश को इस इवेंट में एक और मेडल हासिल हुआ. 

भारत की शिल्पा शायला ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ 7.26 मीटर का थ्रो कर ब्रांज मेडल हासिल किया. शिल्पा को यह मेडल एक सफल पोस्ट-इवेंट विरोध और समीक्षा के बाद मिला, जिसमें नाइजीरियाई एथलीट के थ्रो को अमान्य करार दिया गया.

मां को लेकर कही दिल छू लेने वाली बात

जीत के बाद शर्मिला धनखड़ बेहद भावुक नजर आईं. उन्होंने यह मेडल अपनी मां को समर्पित किया. समाचार एजेंसी आईएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं यह मेडल अपनी मां को समर्पित करती हूं. मेरी मां देख नहीं सकतीं और दुनिया भर के तानों और आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने बचपन से मेरा साथ दिया है. मुझे बेहद खुशी है कि मैं अपनी मां का सपना पूरा कर सकी.

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'यह सपना सच होने जैसा है'

इतिहास रचने के बाद भी शर्मिला के लिए इस बड़ी उपलब्धि पर यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा था. उन्होंने कहा कि मुझे मेडल जीतकर बहुत खुशी है, लेकिन सब कुछ एक सपने जैसा लग रहा है. शायद 2-3 दिनों बाद मुझे पूरी तरह अहसास होगा कि मैंने गोल्ड जीता है.

आगे के लक्ष्यों पर बात करते हुए शर्मिला ने स्पष्ट किया कि उनका अगला निशाना पैरालंपिक खेल हैं. उन्होंने कहा कि यह तो बस शुरुआत है, इस मेडल ने उनके भविष्य की राह और रोशन कर दी है और वे देश के लिए ऐसे ही रिकॉर्ड बनाती रहेंगी.

आसान नहीं रहा है धनखड़ का सफर

शर्मिला धनखड़ के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड पाने का सफर काफी चुनौती भरा रहा है. हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली शर्मिला को दो साल की उम्र में तेज बुखार के बाद पोलियो हो गया था. जिंदगी के शुरुआती दिनों में ही उन्हें कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा था. हालांकि, जीवन के हर मोड़ पर उनकी मां मजबूत ढाल बनकर उनके साथ खड़ी रही.

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