गरीबी के कारण जिस घर में 36 साल तक टीवी तो दूर, रेडियो तक नहीं था, वहां अब खुशियों की नई तस्वीर है. एशियन गेम्स 2026 में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली ट्रैप शटूर नीरू ढांडा के घर अब टीवी पहुंच गया है. खास बात यह है कि परिवार की यह ख्वाहिश नीरू की एक छोटी-सी बात के बाद पूरी हुई. आजतक ने उनके घर टीवी लगवाया, जिसके बाद नीरू के माता-पिता ने चैनल का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया.
टीवी आने की खुशी परिवार के लिए इतनी खास थी कि नीरू की मां सुदेश देवी ने हल्दी का तिलक लगाकर उसका स्वागत किया. परिवार ने इसे घर के नए सदस्य की तरह अपनाया. अब उनकी उम्मीद है कि इसी टीवी पर वे 2028 ओलंपिक में बेटी का मुकाबला देखेंगे और उसे गोल्ड मेडल जीतते हुए देखने का सपना पूरा करेंगे.
नीरू ढांडा की मां सुदेश देवी ने बताया कि उनकी शादी को 36 साल हो चुके हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इतने वर्षों तक घर में टीवी नहीं आ सका. हालात ऐसे थे कि रेडियो तक नहीं था. परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्हें जमींदार के यहां काम करना पड़ता था.
मुश्किलों के बीच परिवार ने बेटी को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. आज नीरू ढांडा की उपलब्धियों ने घर को पहचान दिलाई है. सुदेश देवी ने कहा कि बेटी की वजह से परिवार ने खुशियों के कई पल देखे हैं और अब टीवी आने से वे उसकी प्रतियोगिताएं भी देख सकेंगे.
आसान नहीं रहा है नीरू का सफर
हाल ही में नीरू ढांडा आजतक के एक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. वहां उन्होंने बताया था कि आर्थिक तंगी के कारण उनके घर में टीवी नहीं है. उनकी इस बात के बाद आज तक की टीम ने परिवार के घर टीवी लगवाने की व्यवस्था की. टीवी मिलने पर नीरू के पिता सुरेश ने भी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि बेटी ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर परिवार को गर्व करने का मौका दिया है. अब घर में टीवी आने से उनकी खुशी और बढ़ गई है. उन्होंने आजतक की टीम का आभार जताया.
सुरेश के परिवार ने लंबे समय तक आर्थिक परेशानियों का सामना किया है. करीब तीन साल पहले एक सड़क हादसे में उनकी टांग टूट गई थी, जिसके बाद से उन्हें चारपाई पर रहना पड़ रहा है. ऐसे हालात में बेटी की खेल उपलब्धियां परिवार के लिए हिम्मत और गर्व का बड़ा कारण बनी हैं.
सुदेश देवी को उम्मीद है कि उनकी बेटी ओलंपिक में भी गोल्ड मेडल जीतेगी. परिवार चाहता है कि उस ऐतिहासिक पल को वे अपने घर में लगे नए टीवी पर देखें. 36 साल बाद आई यह खुशी उनके लिए सिर्फ टीवी मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सफर की याद है जिसमें मुश्किल हालात के बावजूद बेटी ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत जारी रखी.
(इनपुट: सुनील कुमार)
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क