विश्व रिकॉर्ड... चारों तरफ तालियां... और हर जुबान पर एक ही नाम- वैभव सूर्यवंशी. महज 15 साल 118 दिन की उम्र में पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया.
... लेकिन इस पारी की सबसे बड़ी कहानी रिकॉर्ड नहीं थी.
असली कहानी सिर्फ तीन शॉट्स की थी. तीन गेंदें... तीन अलग जवाब... और तीनों ने बता दिया कि भारतीय क्रिकेट इस लड़के को लेकर इतना उत्साहित क्यों है.
नई गेंद थी. सामने थे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज रिचर्ड नगारवा. गेंद हवा में भी हरकत कर रही थी और पिच से अतिरिक्त उछाल भी मिल रहा था. ऐसे हालात में ज्यादातर बल्लेबाज कुछ ओवर निकालने की कोशिश करते हैं. लेकिन वैभव ने शुरुआत से ही एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने इंतजार नहीं किया... उन्होंने हमला किया.
ओवर- 1.2
पहली गेंद, जो उनके रेंज में आई, उसे स्क्वॉयर लेग के ऊपर से स्टैंड में पहुंचा दिया. यह सिर्फ ताकत का शॉट नहीं था, बल्कि गेंद की रफ्तार का शानदार इस्तेमाल था.
ओवर- 1.3
अगली ही गेंद पर तस्वीर पूरी तरह बदल गई. इस बार ओवरपिच गेंद थी. पैर लगभग अपनी जगह पर रहे, लेकिन सिर स्थिर, बैलेंस कमाल का और हाथ इतने मुलायम कि गेंद अतिरिक्त कवर को चीरते हुए चौके के लिए निकल गई. पिछला शॉट ताकत का था, यह शॉट क्लास का था.
ओवर- 1.4
और फिर आई तीसरी चुनौती. नगारवा ने लाइन और लेंथ बदली, लेकिन वैभव ने जवाब भी बदल दिया. बैकफुट पर जाकर गेंद को लॉन्ग ऑफ के ऊपर से बाउंड्री के पार पहुंचा दिया. यह सिर्फ शॉट नहीं था, बल्कि गेंदबाज के दिमाग पर हमला था.
यही वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत है
वह सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि आक्रामक सोच वाले बल्लेबाज हैं. वह गेंदबाज को उसकी पसंदीदा लेंथ पर लगातार गेंदबाजी करने ही नहीं देते. हर गेंद के साथ गेंदबाज को नई योजना बनानी पड़ती है... और टी20 क्रिकेट में यही सबसे बड़ा हथियार है. जिस पल गेंदबाज अपनी योजना छोड़कर बल्लेबाज की योजना पर खेलने लगे, उसी पल मैच का संतुलन बदल जाता है.
नगारवा ही नहीं, ब्रैड इवांस के साथ भी यही हुआ. इवांस जैसे ही गेंदबाजी पर आए, वैभव ने पहले चौका और फिर छक्का जड़ दिया. दो गेंदों में गेंदबाज का आत्मविश्वास डगमगा गया. यही वह मानसिक दबाव है, जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टी20 बल्लेबाज बनाते हैं.
महज 15 साल की उम्र में वैभव का सफर भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. आईपीएल में धमाकेदार आगाज, भारत के लिए डेब्यू, फिर प्लेइंग इलेवन से बाहर होना और अब शानदार वापसी. इतने कम समय में इतने उतार-चढ़ाव किसी भी युवा खिलाड़ी को विचलित कर सकते थे, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में न घबराहट दिखी, न हड़बड़ी. बल्कि ऐसा लगा कि हर अनुभव ने उन्हें और परिपक्व बना दिया है.
उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 19 गेंदों में 50 रनों की पारी में 4 चौके और 4 छक्के लगाए. भारत ने 126 रन का लक्ष्य महज 13.2 ओवरों में हासिल कर लिया.
... लेकिन मैच के बाद जो बात सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वह उनका नजरिया है. विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद भी वैभव ने BCCI.TV से कहा कि रिकॉर्ड उनकी मंजिल नहीं हैं. उनका लक्ष्य हर मैच में भारत की जीत में योगदान देना है.
यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है. रिकॉर्ड उनकी उम्र बता रहे हैं, लेकिन उनकी क्रिकेटिंग समझ उम्र से कहीं आगे दिखाई देती है.
और अगर अब भी कोई यह कह रहा है कि 'सामने तो सिर्फ जिम्बाब्वे था', तो उसे स्कोरकार्ड नहीं, वे शुरुआती तीन शॉट दोबारा देखने चाहिए. क्योंकि बड़े खिलाड़ी विरोधी टीम देखकर नहीं बनते, बल्कि नई गेंद, तेज गेंदबाज और मुश्किल परिस्थितियों में लिए गए फैसलों से पहचाने जाते हैं.
वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ विश्व रिकॉर्ड नहीं बनाया. उन्होंने यह भी बता दिया कि भारतीय क्रिकेट को शायद अपना अगला बड़ा मैच-विनर मिल चुका है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क