भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा टी20 मुकाबला शनिवार को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेला जाएगा. दांव पर सिर्फ सीरीज में बढ़त नहीं, बल्कि टीम इंडिया के भीतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी होगी. मैदान पर मुकाबला इंग्लैंड से होगा, लेकिन ड्रेसिंग रूम में सबसे ज्यादा चर्चा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी की है. उन्होंने अभी तक भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला है, लेकिन उनकी मौजूदगी ने टीम के कई बल्लेबाजों पर दबाव कई गुना बढ़ा दिया है.
टीम प्रबंधन लगातार यह कह रहा है कि वैभव को जल्दबाजी में नहीं खिलाया जाएगा. लेकिन क्रिकेट में इंतजार उतना ही लंबा होता है, जितना सीनियर खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से उसे लंबा बनाए रखें. यही वजह है कि मैनचेस्टर टी20 में सबसे ज्यादा दबाव दो बल्लेबाज संजू सैमसन और तिलक वर्मा पर होगा.
संजू के लिए अब हर पारी 'ऑडिशन' जैसी
संजू सैमसन के लिए यह सिर्फ एक और टी20 नहीं है. पहले मुकाबले में वह 7 गेंदों पर सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हुए. इससे पहले भी उनका करियर एक बड़ी पारी और कई नाकामियों के बीच झूलता रहा है.
टी20 वर्ल्ड कप में लगातार मैच जिताने वाली पारियों ने उन्हें मजबूत स्थिति में जरूर पहुंचाया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट में नई प्रतिभा के आने के बाद पुरानी उपलब्धियां ज्यादा दिन तक सुरक्षा कवच नहीं बनतीं.
इंग्लैंड की सीम और स्विंग वाली परिस्थितियां हमेशा से संजू की परीक्षा लेती रही हैं. अगर मैनचेस्टर में भी उनका बल्ला नहीं चला तो सवाल सिर्फ उनकी फॉर्म का नहीं रहेगा, बल्कि उनकी जगह का भी होगा.
तिलक वर्मा भी सुरक्षित नहीं
तिलक वर्मा का मामला थोड़ा अलग है. वह लगातार टीम का हिस्सा हैं, लेकिन उनसे जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद की जाती है, वह अब तक नहीं दिखी है.
मध्य ओवरों में स्पिनरों के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट चिंता का विषय रहा है. 2026 में खेले 12 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनके बल्ले से सिर्फ 12 छक्के निकले हैं. यानी औसतन एक मैच में एक छक्का.
टी20 क्रिकेट में जहां मैच कुछ ओवरों में पलट जाते हैं, वहां ऐसे आंकड़े चयनकर्ताओं की नजर से नहीं बचते.
वैभव क्यों बने सबसे बड़ा खतरा?
क्योंकि वैभव सिर्फ एक युवा खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा प्रोजेक्ट माने जा रहे हैं.
15 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना ही बताता है कि चयनकर्ता उन्हें कितनी गंभीरता से देख रहे हैं. उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में जिस निडर अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने साफ कर दिया कि वह सिर्फ भविष्य का निवेश नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वर्तमान का विकल्प भी हैं.
यही वजह है कि हर मैच के बाद सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक एक ही सवाल गूंज रहा है- 'वैभव को मौका कब मिलेगा?'
अभिषेक ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
अभिषेक शर्मा ने लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करके अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. पिछले तीन टी20 मुकाबलों में उन्होंने 49 और 59 रन की पारियां खेली हैं.
ऐसे में अगर शीर्ष क्रम में बदलाव होता है तो सबसे पहले नजर उन खिलाड़ियों पर जाएगी, जो लगातार उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे.
गेंदबाजी में बदलाव मुश्किल
भारतीय गेंदबाजी में बदलाव की संभावना कम है. ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच स्पिनरों को भी मदद देती है, इसलिए रवि बिश्नोई और वरुण चक्रवर्ती अहम भूमिका निभा सकते हैं.
दूसरी ओर इंग्लैंड के पास हैरी ब्रूक, जोस बटलर, फिल सॉल्ट और टॉम बैंटन जैसे विस्फोटक बल्लेबाज हैं, जो किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की परीक्षा ले सकते हैं.
क्या मैनचेस्टर में बदलेगा टीम इंडिया का भविष्य?
हो सकता है वैभव सूर्यवंशी इस मैच में भी प्लेइंग इलेवन का हिस्सा न हों. लेकिन यह भी सच है कि उनकी मौजूदगी ने टीम इंडिया में प्रतिस्पर्धा का स्तर बदल दिया है.
मैनचेस्टर में अगर संजू सैमसन और तिलक वर्मा बड़ी पारियां खेलते हैं तो वैभव का इंतजार थोड़ा और लंबा हो सकता है. लेकिन अगर दोनों फिर नाकाम रहे, तो चयनकर्ताओं के लिए अगला फैसला लेना आसान हो जाएगा.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क