'जलन, गुस्सा या नफरत...', क्या संन्यास लेने वाले हैं मोहम्मद शमी? टीम में नहीं मिला मौका तो सरेआम छलका दर्द

टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपने तेवरों से साफ कर दिया है कि उनका सफर अभी थमा नहीं है. 36 साल की उम्र में भी खुद की फिटनेस को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताने वाले शमी टीम इंडिया में सेलेक्शन नहीं होने पर दिल की बात कही है.

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शमी ने खोले कई बड़े राज. (PHOTO: AP/ITGD) शमी ने खोले कई बड़े राज. (PHOTO: AP/ITGD)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने दिल की बात कही है. टीम इंडिया से लगातार नजरअंदाज किए जाने, सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रायल और संन्यास की चर्चाओं पर शमी ने बेहद बेबाक अंदाज में बात की है. 

टीम में चयन न होने के सवाल पर शमी ने दो टूक कहा कि अगर उनका प्रदर्शन और फिटनेस इस काबिल है कि उन्हें टीम में जगह मिलनी चाहिए तो उन्हें जरूर चुना जाना चाहिए. अगर चयनकर्ताओं को लगता है कि वह योग्य नहीं हैं तो उन्हें बिल्कुल बाहर रखें और उनसे बेहतर किसी और खिलाड़ी को मौका दें, क्योंकि अंत में देश जीतना चाहिए.

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स्पोर्ट्स तक से बात करते हुए शमी ने तंज कसते हुए कहा कि मेरे मन में किसी के प्रति कोई जलन, गुस्सा या नफरत नहीं है. लेकिन यह सवाल मुझसे क्यों पूछा जा रहा है? मैं तो एक खिलाड़ी हूं, परफॉर्मर हूं. यह सवाल उस जगह और उन लोगों से पूछा जाना चाहिए जिनके पास इसका अधिकार है.

आजकल क्रिकेटर्स के संन्यास और उनके करियर को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे तमाशे पर शमी ने जमकर अपनी भड़ास निकाली. उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों का जिक्र करते हुए कहा कि आज यह एक सोशल मीडिया ट्रायल बन गया है. कुछ लोग सिर्फ व्यूज और लाइक्स के लिए छोटी-छोटी बातों का बवंडर बना देते हैं.

संन्यास के सवाल पर क्या बोले शमी?

संन्यास के सवाल पर शमी ने दिल जीतने वाला जवाब देते हुए कहा कि भाई, मेरा नाम मोहम्मद शमी है. मैंने देश के लिए बहुत कुछ हासिल किया है. जिस दिन मुझे सुबह 6:30 या 7:00 बजे उठकर मैदान पर जाने से बोरियत होने लगेगी, उस दिन मैं खुद कह दूंगा कि बस, अब बहुत हो गया. लेकिन अभी मैं बोर नहीं हुआ हूं. जब तक शरीर में जान है, मैं खेलता रहूंगा.

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'यह खिलाड़ी का निजी फैसला होना चाहिए'

शमी ने बहुत साफ शब्दों में कहा कि जिस खिलाड़ी ने देश के लिए 15 से 17 साल दिए हैं, अपने ही रिकॉर्ड तोड़े हैं और मैदान पर पसीना बहाया है. उसके संन्यास का फैसला लेने का हक सिर्फ और सिर्फ उसी खिलाड़ी का है. कोई दूसरा बाहर बैठकर यह तय नहीं कर सकता कि अब आपका समय खत्म हो गया है.

उन्होंने कहा कि आप परफॉर्मेंस के आधार पर मुझे मत चुनो, इसमें कोई दिक्कत नहीं है. परफॉर्मेंस ऊपर-नीचे हो सकती है, हम कोई मशीन नहीं इंसान है. लेकिन जब बात संन्यास या करियर खत्म करने की आती है तो यह फैसला उस खिलाड़ी पर छोड़ देना चाहिए. आप या कोई और यह तय करने वाले कौन होते हैं?

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