घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले जेक लिब्बी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने लिस्ट-ए क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ बैटिंग औसत के मामले में भारतीय स्टार ऋतुराज गायकवाड़ को पीछे छोड़ दिया है. लिब्बी के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि घरेलू क्रिकेट में शानदार आंकड़े होने के बावजूद वह अब तक इंग्लैंड की सीनियर टीम के लिए इंटरनेशनल डेब्यू नहीं कर पाए हैं. लिब्बी की उम्र 33 साल हो चुकी है, लेकिन इंग्लिश टीम से बुलावे का उनका इंतजार जारी है.
लिस्ट-ए क्रिकेट में मिनिमम 50 इनिंग्स खेलने वाले बल्लेबाजों में जेक लिब्बी का औसत अब सबसे बेहतर है. लिब्बी ने 56 लिस्ट-ए मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 53 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 2456 रन बनाए, जिसमें 13 मौकों पर वो आउट नहीं हुए. इसी कारण उनका लिस्ट-ए एवरेज 61.40 तक पहुंच गया है. लिब्बी के नाम इस फॉर्मेट में छह शतक भी दर्ज हैं. लगातार बड़ी पारियां खेलने की क्षमता ने उन्हें इस खास सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया है.
ऋतुराज का कैसा है लिस्ट-ए रिकॉर्ड?
बता दें कि जेक लिब्बी इंग्लिश घरेलू क्रिकेट में वूस्टरशायर का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनके आंकड़े बताते हैं कि 50 ओवर्स के क्रिकेट में उन्होंने निरंतरता के साथ रन बनाए हैं. ऋतुराज गायकवाड़ अब दूसरे स्थान पर आ गए हैं, जिनका लिस्ट-ए एवरेज 58.61 है. ऋतुराज ने 104 लिस्ट-ए मुकाबलों में 5334 रन बनाए हैं, जिसमें 21 शतक और 20 अर्धशतक शामिल रहे.
हालांकि दोनों के लिस्ट-ए करियर में बड़ा अंतर है. ऋतुराज गायकवाड़ ने जेक लिब्बी की तुलना में लगभग दोगुने मुकाबले खेले हैं और उनके नाम पांच हजार से ज्यादा रन हैं. इसके बावजूद औसत के पैमाने पर फिलहाल इंग्लिश बल्लेबाज आगे निकल गया है. ऋतुराज भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं. लिस्ट-ए क्रिकेट में 58 से ज्यादा का औसत उनकी निरंतरता को दिखाता है.
इसी प्रदर्शन के दम पर वह भारतीय टीम तक पहुंचे. इसके उलट जेक लिब्बी की कहानी अलग रही है. घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बावजूद वह इंग्लैंड की कैप हासिल नहीं कर पाए हैं. अब लिस्ट-ए क्रिकेट में शीर्ष बल्लेबाजी औसत हासिल करने के बाद उनके आंकड़ों ने एक बार फिर ध्यान खींचा है.
जेक लिब्बी के सामने सबसे बड़ा सवाल अब उनके इंटरनेशनल करियर को लेकर है. 33 साल की उम्र में इंग्लैंड की नेशनल टीम में जगह बनाना आसान नहीं है, क्योंकि चयनकर्ताओं के पास कई युवा विकल्प मौजूद हैं. इसके बावजूद उनके आंकड़ों को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क