गॉल टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका के खिलाफ शिकंजा तो कस दिया, लेकिन एक ऐसी दीवार से टकरा गए जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी. बाएं हाथ के युवा स्पिनर मानव सुथार ने अपनी फिरकी से श्रीलंकाई टॉप ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया था. लंच तक मेजबान टीम 99 रन पर 5 विकेट गंवा चुकी थी और लग रहा था कि भारत की पहली पारी के 462 रनों के जवाब में श्रीलंका की पारी जल्द ही सिमट जाएगी.
अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय शतक के साथ दिनुषा ने भारतीय गेंदबाजों के सामने ऐसा संयम दिखाया, जिसने श्रीलंका को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला. अनुभवी निरोशन डिकवेला के साथ मिलकर उन्होंने छठे विकेट के लिए 146 रनों की साझेदारी की और भारत को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाए रखा. आखिरकार श्रीलंका पहली पारी में 284 रनों पर ऑलआउट हुआ, लेकिन भारत ने 178 रन की बड़ी बढ़त हासिल कर ली.
99 पर 5 विकेट, फिर अचानक बदली कहानी
श्रीलंका को पहली पारी में बड़ा स्कोर खड़ा करने के लिए मजबूत शुरुआत चाहिए थी, लेकिन मोहम्मद सिराज ने दूसरी ही गेंद पर निशान फर्नांडो को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिला दी. फर्नांडो का बल्ला सिराज की बाहर जाती गेंद और उछाल के सामने नहीं आया और गेंद देवदत्त पडिक्कल के हाथों में चली गई.
इसके बाद मानव सुथार ने मोर्चा संभाल लिया.
पहली ही गेंद पर दिमुथ चांदीमल का हल्का किनारा ऋषभ पंत के दस्तानों में पहुंचा. इसके बाद सुथार ने लगातार अपनी लाइन, फ्लाइट, डिप और टर्न से श्रीलंकाई बल्लेबाजों को परेशान किया. 85 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंद को हवा में तैराते हुए वह पिच से भी मदद निकाल रहे थे.
लाहिरु उदारा ने कुछ देर उनका सामना किया और कुछ आकर्षक पुल और कट शॉट लगाए, लेकिन सुथार ने आखिरकार उनका भी रास्ता खोज लिया. गेंद पर कमजोर सा प्रहार हुआ और यशस्वी जायसवाल ने गली में कैच लपक लिया.
कामिंदु मेंडिस भी ज्यादा देर नहीं टिक सके. कुलदीप यादव की गेंद पर उनका ऊपरी शॉट शुभमन गिल की शानदार डाइविंग कैच का शिकार बन गया. कप्तान धनंजय डी सिल्वा को रवींद्र जडेजा ने केएल राहुल के हाथों स्लिप में कैच कराया.
99 रनों पर श्रीलंका के पांच विकेट. भारत की पकड़ बेहद मजबूत थी.
... फिर आई दिनुषा की पारी
लेकिन क्रिकेट में मुकाबला सिर्फ आंकड़ों से नहीं चलता. श्रीलंका को उस समय एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो हालात को समझकर पारी को संभाले. सोनल दिनुषा ने वही किया.
निरोशन डिकवेला के साथ उन्होंने भारतीय स्पिनरों के खिलाफ जल्दबाजी नहीं दिखाई. दोनों ने अपने शॉट्स का चयन बेहद सावधानी से किया. स्वीप उनका पसंदीदा हथियार बना और स्टंप की लाइन पर आने वाली गेंदों को दोनों ने पैरों का इस्तेमाल करते हुए प्रभावी ढंग से बाउंड्री तक पहुंचाया.
डिकवेला ने 67 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि दिनुषा को इस मुकाम तक पहुंचने में 92 गेंदें लगीं. लेकिन यही धीमापन उनकी ताकत बना. वह रन बनाने की बजाय विकेट बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे.
दूसरे सेशन में श्रीलंका ने 116 रन जोड़े और एक भी विकेट नहीं गंवाया.
भारत के गेंदबाज लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन दिनुषा और डिकवेला ने भारतीय स्पिनरों को लंबे समय तक विकेट से दूर रखा. यह साझेदारी सिर्फ रन नहीं बना रही थी, बल्कि श्रीलंका की उम्मीद भी बचा रही थी.
डिकवेला को मिला जीवनदान, फिर कृष्णा ने किया काम तमाम
डिकवेला 20 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान का फायदा उठा चुके थे. सुथार की गेंद पर स्लिप में केएल राहुल उनके कैच तक नहीं पहुंच सके. लेकिन दूसरी पारी में डिकवेला की किस्मत ने साथ नहीं दिया.
प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर उन्होंने बल्ला लगाया और गेंद सीधे ऋषभ पंत के दस्तानों में चली गई. डिकवेला 115 गेंदों पर 80 रन बनाकर आउट हुए. श्रीलंका को फिर एक बार लगा कि अब पारी जल्द खत्म हो जाएगी. लेकिन दिनुषा अभी बाकी थे.
उन्होंने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और धीरे-धीरे अपने पहले अंतरराष्ट्रीय शतक की ओर बढ़ते रहे. 167 गेंदों में उन्होंने तीन अंकों का आंकड़ा छुआ. यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक था और श्रीलंका की पारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण भी.
लेकिन शतक पूरा करते ही अगली गेंद पर कहानी खत्म हो गई.
रवींद्र जडेजा की गेंद पर दिनुषा एलबीडब्ल्यू हो गए. 100 रन, 168 गेंद और श्रीलंका को बचाने वाली एक शानदार पारी.
सुथार ने दिखाया क्यों खास हैं
दिनुषा की पारी ने श्रीलंका को संभाला, लेकिन इस पारी की सबसे बड़ी कहानी फिर भी मानव सुथार की गेंदबाजी रही.
पहली बार टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए खेल रहे सुथार ने श्रीलंकाई टॉप ऑर्डर के सामने जिस आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी की, वह इस टेस्ट की बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने 76 रन देकर चार विकेट लिए.
उनके साथ रवींद्र जडेजा ने 57 रन देकर तीन विकेट झटके. दोनों बाएं हाथ के स्पिनरों ने मिलकर श्रीलंका की पारी को लगातार दबाव में रखा.
श्रीलंका के बाकी बल्लेबाजों की तुलना में दिनुषा और डिकवेला का तरीका बिल्कुल अलग था. टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज कई बार शरीर से दूर जाकर शॉट खेलते दिखे और मुश्किल कैच दे बैठे. इसके उलट छठे विकेट की साझेदारी ने दिखाया कि अच्छी स्पिन गेंदबाजी के सामने सिर्फ आक्रामकता नहीं, धैर्य और तकनीक भी जरूरी है.
भारत ने दिन की शुरुआत 460/9 से की और सिर्फ दो रन जोड़कर 462 पर ऑलआउट हो गया. उसके बाद गेंदबाजों ने अपना काम किया.
श्रीलंका 284 पर सिमट गया. 178 रनों की बढ़त भारत के खाते में है.
सुथार ने श्रीलंका के टॉप ऑर्डर को हिला दिया, दिनुषा ने कुछ देर के लिए उस तूफान को रोक दिया, लेकिन अंत में भारत ने तीसरे दिन का खेल अपने नाम कर लिया. अब टेस्ट की तस्वीर साफ है- श्रीलंका को मुकाबले में बने रहने के लिए चौथी पारी में नहीं, उससे पहले ही भारत के सामने बड़ी चुनौती रखनी होगी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क