निशिन में भारत और पाकिस्तान के बीच एशियन गेम्स गोल्ड मेडल मुकाबले से पहले टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच ऋषिकेश कानितकर को 28 साल पुरानी एक शाम याद आ गई. साल 1998 में ढाका के बंगबंधु स्टेडियम में उन्होंने पाकिस्तान के सकलैन मुश्ताक की गेंद को डीप मिडविकेट के ऊपर से चौका लगाकर भारत को यादगार जीत दिलाई थी.
कानितकर का इंटरनेशल करियर बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन भारत-पाकिस्तान फाइनल में लगाया वह छक्का उन्हें भारतीय क्रिकेट की यादगार कहानियों का हिस्सा बना गया.
एशियन गेम्स फाइनल शनिवार (3 अक्टूबर) को होना है. शुक्रवार को मैच की पूर्व संध्या पर कानितकर ने कहा कि बड़े मुकाबलों में निर्णायक पलों को जीतना बेहद जरूरी होता है. उन्होंने विराट कोहली और तिलक वर्मा के उदाहरण भी दिए.
कानितकर ने कहा कि विराट ने 2022 टी20 वर्ल्ड कप में ऐसा किया था, जबकि तिलक वर्मा ने पिछले साल हारिस रऊफ के खिलाफ छक्का लगाकर बड़े पल को अपने नाम किया था. उनके मुताबिक हाई-स्टेक्स फाइनल में ऐसे ही छोटे-छोटे निर्णायक पल मैच का रुख तय करते हैं.
वॉलीबॉल और हॉकी के नतीजों का दबाव?
कानितकर से पूछा गया कि पाकिस्तान के खिलाफ वॉलीबॉल टीम की 0-3 हार और हॉकी टीम की सेमीफाइनल में 4-3 की करीबी जीत का असर क्रिकेट टीम पर होगा क्या. उन्होंने इससे साफ इनकार किया.
उनका कहना था कि इंटरनेशनल क्रिकेट में हर मैच प्रेशर वाला होता है. खिलाड़ियों को अपने खेल पर ध्यान देना होगा और बाकी शोर से खुद को अलग रखना प्रोफेशनल खेल का हिस्सा है.
भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर भारी चर्चा के बावजूद कानितकर ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए यह आखिरकार गेंदबाज बनाम बल्लेबाज की लड़ाई है. उनके मुताबिक खिलाड़ी इसी पर फोकस करेंगे.
दूसरे लगातार गोल्ड पर नजर
कानितकर ने कहा कि टीम इंडिया लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का गोल्ड जीतने को लेकर उत्साहित है. उन्होंने इसे देश के पदक खाते में जुड़ने वाला खास मौका बताया.
उन्होंने कहा कि देश के लिए पदक जीतना आसान नहीं होता और भारतीय खिलाड़ी इसके लिए काफी मेहनत करते हैं. ऐसे में टीम इस मुकाबले को लेकर बेहद उत्साहित है और गोल्ड देश के पदक खाते में जोड़ना उनके लिए गर्व का पल होगा.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क