दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से ऐसा गदर मचाया है कि विरोधी टीम के पसीने छूट गए हैं. पहली पारी में 270 रनों की विशाल पारी खेलने के बाद ईशान किशन का बल्ला दूसरी पारी में भी शांत नहीं हुआ. उन्होंने एक बार फिर ताबड़तोड़ अंदाज में बल्लेबाजी कर फैन्स का ध्यान खींच लिया.
मैच के दौरान जहां युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी दूसरी पारी में कुछ खास नहीं कर सके और 16 गेंदों में सिर्फ 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. वहीं कप्तान ईशान किशन ने मोर्चा संभाले रखा. जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए ईशान ने पारी को संभाला और आक्रामक अंदाज में रन बनाते हुए टीम को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया.
ईशान किशन ने महज 98 गेंदों में 9 चौके और तीन छक्के की बदौलत 80 रन बनाने में सफल रहे. एमडी निधीश की गेंद पर वह देवदत्त पडिक्कल को कैच थमा बैठे. ईशान किशन के पास एक बार फिर शतक जड़ने का मौका था, लेकिन वह ऐसा करने से चूक गए.
पहली पारी में बनाया था रनों का पहाड़
इससे पहले पहली पारी में भी ईशान किशन का बल्ला जमकर हल्ला बोला था. उन्होंने 334 गेंदों का सामना करते हुए 30 चौकों और 7 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 270 रनों की मैराथन पारी खेली थी. चेन्नई की भीषण गर्मी में 250 रन पार करने के बाद वह शारीरिक थकान की वजह से कुछ देर के लिए रिटायर्ड हर्ट भी हुए, लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ. वह वापस मैदान पर आए और टीम का स्कोर 708 रन तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई.
कुमार कुशाग्र के शतक और निचले क्रम के बल्लेबाजों के सहयोग से ईस्ट जोन ने साउथ जोन के गेंदबाजों को लगभग दो दिनों तक मैदान पर खूब थकाया. पहली पारी के उस विशाल स्कोर के बाद अब दूसरी पारी में भी शतक जमाकर ईशान किशन ने साबित कर दिया है कि वह इस वक्त बेहतरीन फॉर्म में हैं और अकेले दम पर मैच का रुख बदलने का दम रखते हैं.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क