दुनिया में ‘सुपर-डुपर अल-नीनो’ तेजी से मजबूत हो रहा है. WMO के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच पैसिफिक ओशन के बीच और पूर्वी हिस्से में सी सरफेस टेम्परेचर सामान्य से करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है. इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के टेम्परेचर और बारिश पर पड़ सकता है.
WMO ने कहा है कि अल-नीनो दिसंबर के आसपास अपने सबसे मजबूत लेवल पर पहुंच सकता है. इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है. इस दौरान दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है. कुछ जगहों पर बारिश कम हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश का खतरा बढ़ सकता है.
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इस बार अल-नीनो काफी मजबूत है. इसे नीनो 3.4 रीजन के सी सरफेस टेम्परेचर से भी समझा जा सकता है. जून 2026 में यहां टेम्परेचर सामान्य से 1.6 डिग्री ज्यादा था. अगस्त तक यह बढ़कर 2.5 डिग्री ज्यादा हो गया.
अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसके 3.7 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच नीनो 3.4 का टेम्परेचर करीब 2.6 डिग्री तक बढ़ा था. इस बार यह आंकड़ा उससे भी ज्यादा हो सकता है.
दुनिया के मौसम पर क्या असर होगा?
अल-नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता. कुछ जगहों पर ज्यादा गर्मी पड़ सकती है. कुछ इलाकों में बारिश कम हो सकती है और सूखा पड़ सकता है. वहीं कुछ जगहों पर ज्यादा बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है. यानी अल-नीनो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का पैटर्न बदल सकता है. किसी देश में इसका असर कितना होगा, यह वहां के मौसम और दूसरी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा.
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समुद्र का इतना गर्म होना क्यों जरूरी है?
पैसिफिक ओशन के जिस हिस्से में अल-नीनो बन रहा है, वहां समुद्र की सतह के साथ नीचे का पानी भी काफी गर्म है. अगस्त में नीनो 3.4 रीजन का सी सरफेस टेम्परेचर सामान्य से 2.5 डिग्री ज्यादा था. अब अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसके 3.7 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. समुद्र में इतनी ज्यादा गर्मी होने से दुनिया के टेम्परेचर पर भी असर पड़ सकता है. पहले से ग्लोबल टेम्परेचर बढ़ रहा है. ऐसे में मजबूत अल-नीनो गर्मी को और बढ़ा सकता है. WMO ने भी कहा है कि इससे एक्सट्रीम वेदर का खतरा बढ़ सकता है.
गर्मी से मौतों का भी खतरा
इस मजबूत अल-नीनो को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के रिसर्चर्स ने भी अनुमान लगाया है. उनके मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच करीब 4.51 लाख एक्स्ट्रा डेथ्स हो सकती हैं. भारत को लेकर भी करीब 15,800 एक्स्ट्रा हीट-रिलेटेड डेथ्स का अनुमान लगाया गया है. हालांकि यह एक अनुमान है और असली आंकड़ा अलग हो सकता है.
फिलहाल WMO का अनुमान है कि अल-नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. आने वाले महीनों में इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के टेम्परेचर और बारिश में देखने को मिल सकता है.
आजतक साइंस डेस्क