स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा बुधवार को चांद से टकराएगा. यह टक्कर चांद के उत्तरी हिस्से में मौजूद आइंस्टीन क्रेटर (Einstein Crater) के पास होगी. यह रॉकेट जनवरी 2026 में दो निजी मून लैंडर को लेकर गया था. मिशन पूरा होने के बाद इसका ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया. बाद में सूरज की गतिविधियों और अंतरिक्ष में मौजूद ग्रैविटी के असर से इसकी दिशा बदल गई और अब यह चांद की ओर बढ़ गया.
वैज्ञानिक इस घटना को इसलिए अहम मान रहे हैं क्योंकि इससे चांद की सतह और वहां उड़ने वाली धूल के बारे में नई जानकारी मिल सकती है. नासा ने साफ कहा है कि इस टक्कर से धरती को कोई खतरा नहीं है. रॉकेट का यह हिस्सा करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद से टकराएगा.
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इसका वजन करीब 4,000 किलोग्राम है. वैज्ञानिकों का मानना है कि टक्कर के बाद चांद की सतह से धूल और छोटे-छोटे पत्थरों का गुबार उठ सकता है, जिसे बड़े टेलीस्कोप से देखा जा सकता है. रॉकेट का यह हिस्सा उसी फॉल्कन 9 रॉकेट मिशन का है, जिसने जनवरी में दो निजी मून लैंडर को अंतरिक्ष में पहुंचाया था.
मिशन के बाद रॉकेट का पहला हिस्सा वापस धरती पर आ गया, लेकिन दूसरा हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया. आमतौर पर ऐसे रॉकेट को सुरक्षित दिशा में भेज दिया जाता है, लेकिन इस बार समय के साथ इसकी दिशा बदल गई और अब यह चांद से टकराने वाला है.
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?
वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद पर अक्सर मेटेरॉयट गिरते रहते हैं, लेकिन किसी रॉकेट का इस तरह चांद से टकराना बहुत कम होता है. इसलिए इस टक्कर के बाद उठने वाली धूल, मलबे और बनने वाले नए गड्ढे की स्टडी की जाएगी. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ऐसी टक्कर का चांद की सतह पर क्या असर पड़ता है.
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नासा ने कहा है कि इस टक्कर से धरती को कोई खतरा नहीं है. एजेंसी इस पूरी घटना पर नजर रखे हुए है. टक्कर के बाद वैज्ञानिक उस जगह का भी अध्ययन करेंगे. अगर मौसम और रोशनी ठीक रही, तो कुछ लोग बड़े टेलीस्कोप की मदद से धूल का गुबार भी देख सकते हैं.
भविष्य के मिशनों में कैसे मिलेगी मदद?
नासा आने वाले समय में चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों को भेजने की तैयारी कर रहा है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि अंतरिक्ष का मलबा चांद की सतह पर क्या असर डालता है. इस टक्कर से मिलने वाली जानकारी फ्यूचर के चंद्र मिशनों और वहां भेजे जाने वाले उपकरणों की योजना बनाने में मदद कर सकती है.
यह टक्कर किसी खतरे की नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा अध्ययन है. इससे चंद्रमा की सतह, अंतरिक्ष मलबे के असर और फ्यूचर के चंद्र मिशनों के लिए जरूरी जानकारी मिलने की उम्मीद है.
आजतक साइंस डेस्क