बारिश पर ब्रेक! सितंबर-अक्टूबर में कम बरसेंगे बादल, इन 4 इलाकों में राहत

बारिश का मौसम अभी खत्म भी नहीं हुआ और अगले दो महीनों का अनुमान चिंता बढ़ा रहा है. ECMWF मॉडल के मुताबिक सितंबर-अक्टूबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश कम रह सकती है.

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ऋषिकेश में छाए मॉनसूनी बादल और गंगा नदी. (File Photo: PTI) ऋषिकेश में छाए मॉनसूनी बादल और गंगा नदी. (File Photo: PTI)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

सितंबर-अक्टूबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. ECMWF के मौसम मॉडल के ताजा अनुमान में इन दो महीनों में देश के बड़े हिस्से में कम बारिश के संकेत मिले हैं. हालांकि जम्मू-कश्मीर, दक्षिण तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रह सकती है.

अगर आगे भी यही अनुमान बना रहता है, तो मॉनसून के आखिरी दौर में देश के कई हिस्सों में बारिश कम हो सकती है. यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब 2026 का मॉनसून पहले से ही कमजोर चल रहा है. IMD ने पूरे जून से सितंबर के मॉनसून सीजन में देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया था. IMD के मुताबिक इस दौरान बारिश सामान्य की करीब 90 फीसदी रह सकती है.

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सितंबर की बारिश क्यों जरूरी है?

सितंबर मॉनसून का आखिरी महीना होता है. इस महीने होने वाली बारिश खेती और पानी के लिए काफी जरूरी होती है. अगर सितंबर में बारिश कम रहती है तो खेतों की नमी कम हो सकती है और जलाशयों में भी पानी कम भर सकता है. कम बारिश का असर उन इलाकों पर ज्यादा पड़ सकता है जहां खेती के लिए बारिश पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है. पानी की उपलब्धता पर भी इसका असर आने वाले महीनों में दिखाई दे सकता है.

इन इलाकों में सामान्य बारिश

ECMWF मॉडल के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, दक्षिण तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर भारत में सितंबर-अक्टूबर में बारिश सामान्य रह सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि यहां हर दिन बारिश होगी या भारी बारिश होगी. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि इन दो महीनों में कुल बारिश सामान्य के आसपास रह सकती है. पूर्वोत्तर भारत को लेकर IMD का अनुमान भी बाकी कई हिस्सों की तुलना में बेहतर रहा है. IMD ने मॉनसून सीजन में इस क्षेत्र में सामान्य बारिश की संभावना जताई थी.

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बाकी देश में क्या स्थिति?

देश के बाकी हिस्सों में सितंबर-अक्टूबर के दौरान कम बारिश का अनुमान चिंता बढ़ा सकता है. खासकर अगर सितंबर में बारिश कमजोर रहती है तो मॉनसून के जाने से पहले पानी की कमी की स्थिति बन सकती है. कम बारिश का असर खेती के साथ-साथ नदियों, तालाबों और जलाशयों में पानी पर भी पड़ सकता है. हालांकि इसका असर हर राज्य और इलाके में एक जैसा नहीं होगा.

अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ECMWF का अनुमान एक लंबी अवधि का मॉडल अनुमान है. इसे पक्की मौसम भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता. मौसम की स्थिति आगे बदल सकती है और नए मॉडल अपडेट के साथ बारिश का अनुमान भी बदल सकता है. इसलिए सितंबर-अक्टूबर में असल में कितनी बारिश होगी, इसकी ज्यादा साफ तस्वीर आने वाले दिनों में IMD और दूसरे मौसम अपडेट से मिलेगी.

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