भारत का न्यूक्लियर विस्तार प्लान: कलपक्कम से लेकर कुडनकुलम तक जानिए कब शुरू होंगे नए प्लांट

कलपक्कम का 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. भाविनी के आरटीआई जवाब में यह बात कही गई है. यह रिएक्टर होमी भाभा की तीन चरणों वाली योजना का अहम हिस्सा है और थोरियम के इस्तेमाल का रास्ता खोल सकता है. एनपीसीआईएल के मुताबिक रावतभाटा का आरएपीपी-8 2026 में चालू हो सकता है, जबकि कुडनकुलम की चार यूनिट 2027 से 2030 के बीच पूरी होंगी.

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कलपक्कम में बन रहा 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है (File Photo: ITG) कलपक्कम में बन रहा 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है (File Photo: ITG)

बिश्वजीत

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:50 AM IST

तमिलनाडु के कलपक्कम में बन रहा 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह जानकारी भाविनी ने आरटीआई के तहत दी है. एनपीसीआईएल के जवाबों में मौजूदा रिएक्टरों, नए प्रोजेक्टों की तारीखों और विस्तार योजना का ब्योरा भी है. भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली क्षमता हासिल करने का है.

भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड यानी भाविनी ने 4 सितंबर के आरटीआई जवाब में बताया कि वह कलपक्कम में 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चालू कर रहा है. यह रिएक्टर होमी भाभा की तीन चरणों वाली परमाणु योजना का अहम हिस्सा है. फास्ट ब्रीडर जितना ईंधन खर्च करता है, उससे ज्यादा इस्तेमाल लायक ईंधन बनाता है. इससे आगे भारत के बड़े थोरियम भंडार के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा.

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एनपीसीआईएल यानी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जवाब में कई प्रोजेक्ट हैं, जिनकी तारीखें 2030 तक जाती हैं. राजस्थान के रावतभाटा में 700 मेगावाट का आरएपीपी-8 दबावयुक्त भारी पानी रिएक्टर चालू होने के आखिरी चरण में है और 2026 में शुरू हो सकता है. आरएपीपी-7 और 8 की कुल मंजूर लागत 22,924 करोड़ रुपये है. आरएपीपी-7 में कारोबारी उत्पादन शुरू हो चुका है.

तमिलनाडु के कुडनकुलम में रूस के सहयोग से 1,000 मेगावाट के चार और लाइट वाटर रिएक्टर बन रहे हैं. यूनिट 3 और 4 जून 2027 और जून 2028 तक पूरी होंगी, मंजूर लागत 68,893 करोड़ रुपये है. यूनिट 5 और 6 जून 2029 और मार्च 2030 तक पूरी होंगी, मंजूर लागत 69,437 करोड़ रुपये है.

यह भी पढ़ें: कलपक्कम रिएक्टर ने हासिल की क्रिटिकैलिटी, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग, PM बोले- निर्णायक कदम

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कर्नाटक के कैगा में 700 मेगावाट की दो रिएक्टर यूनिट 5 और 6 का निर्माण जरूरी मंजूरियों के बाद 1 मार्च 2026 को पहला कंक्रीट डालने के साथ शुरू हुआ. हरियाणा के गोरखपुर में 700 मेगावाट की यूनिट 1 और 2 बन रही हैं, जो पहला कंक्रीट डालने के करीब छह साल में पूरी होने की उम्मीद है. इसके अलावा 700 मेगावाट की आठ यूनिट शुरुआती तैयारी में हैं: गोरखपुर की 3 और 4, मध्य प्रदेश के चुटका की 1 और 2, और राजस्थान के माही बांसवाड़ा की 1 से 4. माही बांसवाड़ा के प्रोजेक्ट मंजूरी के चरण में हैं और अश्विनी के जरिए बनेंगे.

मौजूदा रिएक्टर छह राज्यों में हैं. तारापुर में यूनिट 1 और 2 की क्षमता 160 मेगावाट और यूनिट 3 और 4 की 540 मेगावाट है. रावतभाटा में यूनिट 2 की 200 मेगावाट, यूनिट 3 से 6 की 220 मेगावाट और यूनिट 7 की 700 मेगावाट है. कलपक्कम में मैप्स-1 और 2 की 220 मेगावाट, कुडनकुलम में यूनिट 1 और 2 की 1,000 मेगावाट है. नरौरा की दोनों यूनिट 220 मेगावाट की हैं. काकरापार में यूनिट 1 और 2 की 220 मेगावाट और यूनिट 3 और 4 की 700 मेगावाट है. कैगा की यूनिट 1 से 4 सभी 220 मेगावाट की हैं.

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