भूकंप से होटल ध्वस्त...100 लोग लापता, कुछ ही देर पहले अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे

अमेरिका से वेनेजुएला के 100 नागरिकों को निर्वासित कर दिया. ये भूकंप आने से कुछ घंटे पहले होटल में ठहरे थे. भूकंप आया और होटल मलबे में बदल गया, अब वे लापता हैं. बचाव कार्य जारी है.

Advertisement
वेनेजुएला के ला ग्वाएरा प्रांत में गिरी एक इमारत. (File Photo: AP) वेनेजुएला के ला ग्वाएरा प्रांत में गिरी एक इमारत. (File Photo: AP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:46 AM IST

वेनेजुएला में 24 जून 2026 को आए दो बड़े भूकंपों ने पूरे देश को हिला दिया है. 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले इन झटकों ने हजारों इमारतों को ध्वस्त कर दिया. इसी बीच एक दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. अमेरिका से हाल ही में निर्वासित किए गए 100 से ज्यादा वेनेजुएला के नागरिक भूकंप आने से महज कुछ घंटे पहले ला ग्वायरा इलाके के एक होटल में पहुंचे थे. भूकंप ने उस होटल को पूरी तरह मलबे में बदल दिया. 

Advertisement

अब ये लोग लापता बताए जा रहे हैं. परिवार रो रहे हैं, बचाव दल मलबे में जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन उम्मीद कम होती जा रही है. यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि इसमें इमिग्रेशन पॉलिसी, गरीबी और नियति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है. 

यह भी पढ़ें: अल-नीनो का असर, 2032 तक भारत को 94 लाख करोड़ के नुकसान की चेतावनी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सख्त निर्वासन अभियान के तहत सैकड़ों वेनेजुएला के लोग वापस भेजे जा रहे थे. इनमें कई ऐसे थे जो सालों से अमेरिका में रह रहे थे, काम कर रहे थे और बेहतर जीवन की तलाश में थे. एक आईसीई फ्लाइट से 146 लोग (जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे) मियामी से वेनेजुएला पहुंचे.

हवाई अड्डे से सीधे उन्हें ला ग्वायरा के होटल सैंटुआरियो ला ल्लानाडा में ले जाया गया. वहां उनका मेडिकल चेकअप और दस्तावेजी प्रक्रिया चल रही थी. ठीक उसी रात भूकंप आ गया.

Advertisement

निर्वासितों की कहानी: सपने टूटे या नई शुरुआत?

वेनेजुएला आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और अपराध के कारण लाखों लोग विदेश भागे थे. अमेरिका में रह रहे कई वेनेजुएला के नागरिकों को हाल के वर्षों में निर्वासित किया गया. कुछ पर गैंग से जुड़े होने के आरोप थे, कुछ बिना कागजात के रह रहे थे. अमेरिका सरकार का कहना है कि अवैध प्रवास को रोका जाना जरूरी है. लेकिन निर्वासित लोगों के परिवार कहते हैं कि वे वहां मेहनत से जी रहे थे.

जिन लोगों को भूकंप वाले दिन भेजा गया, वे होटल में बस कुछ घंटे ही रहे. कुछ बच गए. लिस्बेथ पोर्टिलो जैसी महिलाएं मलबे से बाहर निकलकर मदद मांगती रहीं. उन्होंने बताया कि करीब 20 लोग उनके साथ सुरक्षित निकले, लेकिन बाकी अब भी मलबे के नीचे हैं. होटल की इमारत पुरानी थी. भूकंप की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई मजबूत इमारतें भी ढह गईं.

यह भी पढ़ें: चीन ने बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा डैम, 315 मीटर ऊंचे पावर स्टेशन से बनेगी 7.7 अरब यूनिट बिजली

भूकंप की भयावहता और वेनेजुएला की स्थिति

वेनेजुएला में यह 125 साल का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है. दो झटके महज 39 सेकंड के अंतर पर आए. इसके केंद्र ला ग्वायरा और करीब के इलाकों के पास थे. हजारों इमारतें ढह गईं, सड़कें टूट गईं, बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई. मरने वालों की संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी है. लापता लोगों की संख्या 46 हजार से ज्यादा बताई जा रही है. 

Advertisement

सरकार और अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात काम कर रही हैं. मेक्सिको, स्पेन, कतर, अमेरिका और ब्रिटेन से टीम पहुंची हैं. कुत्तों, माइक्रो ड्रोन्स और भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है. लेकिन वेनेजुएला की आर्थिक हालत खराब होने के कारण बचाव कार्य में कई दिक्कतें आ रही हैं. अस्पतालों में जगह नहीं है, दवाइयों की कमी है.

क्या हो सकता था बचाव?

यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्वासित लोगों को होटल में रखना सही था? क्या भूकंप की आशंका को देखते हुए उन्हें सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया जा सकता था? वेनेजुएला सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने समय पर चेतावनी नहीं दी या तैयारी नहीं की. परिवारों का कहना है कि उनके रिश्तेदार अमेरिका से लौटकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे, लेकिन नियति ने कुछ और ही फैसला कर दिया.

इस घटना ने वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी है. एक तरफ अमेरिका की सख्त डिपोर्टेशन नीति पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदाओं में प्रवासियों की असुरक्षा पर बहस हो रही है. जलवायु परिवर्तन और भूकंप जैसे खतरों के समय में ऐसे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिनके पास संसाधन कम होते हैं.

अब भी बचाव कार्य तेजी से चल रहा है. कुछ बच्चों सहित लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है, लेकिन निर्वासितों वाले होटल से ज्यादा उम्मीद नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंच रही है, लेकिन लंबे समय तक पुनर्निर्माण की जरूरत होगी. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »