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अल-नीनो की गर्मी ने निकाला PAK में मजदूरों का 'तेल', खजूर पर मौसम का खेल

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर जिले में जुलाई में खजूर तोड़ने का काम शुरू होता है. इस समय यहां तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी गर्मी में भी हजारों मजदूर खजूर तोड़ने में लगे हैं. गर्मी से बचने के लिए मजदूर सूरज निकलने से पहले काम शुरू करते हैं. दिन में वे थोड़ी-थोड़ी देर काम करते हैं. बीच में आराम करते हैं. तापमान बढ़ने के साथ काम करना उनके लिए और मुश्किल हो जाता है. Photo: AFP

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खैरपुर पाकिस्तान के बड़े खजूर उत्पादक इलाकों में शामिल है. देश की आधे से ज्यादा खजूर इसी इलाके में पैदा होती है. यहां खजूर की खेती से बड़ी संख्या में किसान और मौसमी मजदूर जुड़े हैं. Photo: AFP

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खजूर तोड़ने के लिए मजदूरों को ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है. पेड़ों से फल निकालने के बाद उन्हें अलग किया जाता है. इसके बाद खजूर को आगे बेचने और इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है. Photo: AFP

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कुछ जगहों पर खजूर को उबालने का काम भी होता है. ऐसे में मजदूरों को बाहर की तेज गर्मी के साथ गर्म पानी और भाप की गर्मी भी सहनी पड़ती है. इससे काम और ज्यादा कठिन हो जाता है. सिंध पाकिस्तान के उन इलाकों में है जहां गर्मी काफी ज्यादा पड़ती है. जुलाई में यहां तापमान कई बार 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है. कुछ दिनों में यह 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है. Photo: AFP

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इतनी गर्मी में खुले में लंबे समय तक काम करने से शरीर पर गर्मी का असर बढ़ सकता है. इसलिए मजदूर सुबह जल्दी काम शुरू करते हैं. गर्मी बढ़ने पर वे काम रोककर कुछ देर आराम करते हैं. Photo: AFP

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लेकिन खजूर की तुड़ाई का मौसम सीमित समय के लिए होता है. इसलिए मजदूर काम को पूरी तरह रोक नहीं सकते. फसल समय पर तैयार करना उनके लिए जरूरी है, क्योंकि इसी से उनकी कमाई जुड़ी होती है. पाकिस्तान क्लाइमेट चेंज से प्रभावित देशों में शामिल है. देश में पिछले कुछ समय से ज्यादा गर्मी, हीटवेव, अनियमित बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं देखने को मिली हैं. इसका असर खेती और किसानों पर भी पड़ रहा है. Photo: AFP

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ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस इमिशन में पाकिस्तान की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है. इसके बावजूद देश को क्लाइमेट चेंज का बड़ा असर झेलना पड़ रहा है. बढ़ता तापमान खेती से जुड़े मजदूरों के लिए भी परेशानी बढ़ा रहा है. साल 2022 में पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ ने देश के करीब एक-तिहाई हिस्से को प्रभावित किया था. लाखों लोग बेघर हुए थे. सिंध प्रांत भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था और खेती को नुकसान हुआ था. Photo: AFP

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अब बढ़ती गर्मी खेती के काम को और मुश्किल बना रही है. खजूर की तुड़ाई में लगे मजदूरों को ऐसे समय काम करना पड़ रहा है जब तापमान बहुत ज्यादा रहता है. इससे काम के दौरान गर्मी से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है. Photo: AFP

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मौसम में बदलाव का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है. बारिश का समय बदलना और लंबे समय तक गर्मी रहना भी खेती को प्रभावित कर सकता है. इसका असर किसानों के साथ-साथ मौसमी मजदूरों की कमाई पर भी पड़ सकता है. Photo: AFP

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खैरपुर के खजूर मजदूरों का काम बढ़ती गर्मी की इस चुनौती का एक उदाहरण है. सुबह जल्दी काम शुरू करना और बीच-बीच में आराम करना अब उनके काम का हिस्सा बन गया है. बढ़ते तापमान के बीच ऐसे मजदूरों के लिए सुरक्षित तरीके से काम करना जरूरी होगा. Photo: AFP

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