असम में बाढ़ से हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. सोमवार को दो और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 100 पहुंच गई. पिछले कई दिनों से हुई तेज बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों का पानी बढ़ गया है. कुछ नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. Photo: AFP
इससे कई इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा बना हुआ है. पिछले महीने शुरू हुई इस बाढ़ से अब तक 7 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के दौरान करीब 3 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सरकारी राहत शिविरों में जाना पड़ा था. Photo: AP
अब कुछ इलाकों में पानी कम होने लगा है और लोग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं. लेकिन करीब 49 हजार लोग अभी भी 125 राहत शिविरों और राहत केंद्रों में रह रहे हैं. जिन लोगों ने घर लौटना शुरू किया है, उनके सामने भी कई परेशानियां हैं. Photo: AFP
कई घरों में पानी के साथ गाद और मिट्टी भर गई है. घर का सामान खराब हो गया है और कई जगह सड़कें भी टूट गई हैं. ऐसे में पानी कम होने के बाद भी लोगों के लिए सामान्य जिंदगी शुरू करना आसान नहीं है. Photo: AP
बाढ़ से असम के गांवों और शहरों दोनों पर असर पड़ा है. कई जगह खेत पानी में डूब गए. इससे फसलों को नुकसान हुआ है. ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में मवेशियों की भी मौत हुई है. खेती और पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए यह बड़ा नुकसान है. बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है, क्योंकि कई जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा है. Photo: AP
प्रशासन की ओर से राहत और बचाव का काम लगातार चल रहा है. सरकार अब बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा हिसाब जुटा रही है. इसके आधार पर प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद देने की तैयारी की जा रही है. असम के कृषि और सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने बताया कि करीब 5 लाख प्रभावित लोगों को अंतरिम आर्थिक मदद दी जा चुकी है. अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान का आकलन पूरा करने के लिए कहा गया है. Photo: PTI
असम में हर साल मॉनसून के दौरान बाढ़ आती है. इसकी बड़ी वजह राज्य से होकर गुजरने वाली ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियां हैं. तेज बारिश होने पर इन नदियों का पानी तेजी से बढ़ जाता है और आसपास के निचले इलाकों में फैल जाता है. असम सरकार के अनुसार, राज्य का करीब 39.6 फीसदी हिस्सा बाढ़ की चपेट में आने वाला इलाका है. यानी हर साल राज्य के एक बड़े हिस्से में बाढ़ का खतरा बना रहता है. Photo: AP
असम में सिर्फ बाढ़ ही समस्या नहीं है. नदियों के किनारे जमीन का कटना भी बड़ी परेशानी है. पानी का तेज बहाव कई जगह नदी के किनारों की मिट्टी को काट देता है. इससे खेत, सड़क और घर तक प्रभावित होते हैं. Photo: AP
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1950 के बाद से असम में नदी कटाव के कारण करीब 4.27 लाख हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जो नदी के किनारे रहते हैं और खेती या छोटे कामों पर निर्भर हैं. Photo: AP
इस बार की बाढ़ में भी तेज बारिश और नदियों का बढ़ा जलस्तर मुख्य कारण रहे हैं. ब्रह्मपुत्र का जलस्तर बढ़ने पर असम के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है. जहां जरूरत पड़ रही है, वहां लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है. Photo: AP
बाढ़ का एक संबंध बदलते मौसम से भी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण बारिश का तरीका बदल रहा है. कई जगह कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे नदियों में अचानक ज्यादा पानी आ सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. Photo: AP
हर बाढ़ को सिर्फ क्लाइमेट चेंज से जोड़ना सही नहीं होगा. स्थानीय बारिश, नदी का जलस्तर, जमीन की स्थिति और जल निकासी जैसी कई चीजें भी बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करती हैं. फिलहाल असम में सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को दोबारा सामान्य जिंदगी में लौटाना है, जिन्होंने बाढ़ में अपना घर, खेती, सामान या मवेशी खोए हैं. Photo: AP
पानी कम होने के बाद अब लोगों को घरों की सफाई, खराब सामान को हटाने और खेती को दोबारा शुरू करने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. वहीं, कई नदियों का पानी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है. इसलिए प्रशासन को राहत के साथ-साथ किसी नई बाढ़ की आशंका पर भी लगातार नजर रखनी होगी. Photo: AP