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केरल में क्यों बढ़ रही है एक्सट्रीम बारिश? 124 साल के डेटा ने दिया बड़ा संकेत

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST
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केरल में बारिश का तरीका बदल रहा है. 124 साल के बारिश के आंकड़ों पर हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है. स्टडी के मुताबिक राज्य में 24 घंटे के अंदर 20.4 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होने के मामले बढ़ रहे हैं. यह बदलाव सबसे ज्यादा उत्तरी केरल और पश्चिमी घाट के इलाकों में देखा गया है. Photo: PTI

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यह स्टडी मौसम विभाग (IMD), अमृता विश्व विद्यापीठम, एनआईटी पटना और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. उनका कहना है कि अगर यही ट्रेंड आगे भी जारी रहा तो बाढ़ और सूखे का खतरा बढ़ सकता है. Photo: PTI

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वैज्ञानिकों ने 124 साल के बारिश के रिकॉर्ड को देखा. इसमें पता चला कि अब बारिश पहले की तरह पूरे मौसम में बराबर नहीं हो रही. अब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो रही है. इससे एक तरफ बाढ़ का खतरा बढ़ता है, तो दूसरी तरफ लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर पानी की कमी भी हो सकती है. Photo: PTI

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इस स्टडी में प्रीसिरिटेशन कॉन्सनट्रेशन इंडेक्स (PCI) का इस्तेमाल किया गया. यह एक पैमाना है, जिससे पता चलता है कि बारिश पूरे साल बराबर हुई या कुछ दिनों और कुछ जगहों पर ही ज्यादा हुई. Photo: PTI

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स्टडी में पाया गया कि केरल में PCI लगातार बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि बारिश अब पहले के मुकाबले ज्यादा असमान हो रही है। यानी कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश हो रही है, जबकि कई इलाकों में कम बारिश हो रही है। इससे मौसम से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. Photo: ITG

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स्टडी के मुताबिक उत्तरी केरल और पश्चिमी घाट के इलाकों में सबसे ज्यादा बदलाव देखा गया है. यहां कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने के मामले बढ़े हैं. इससे नदियां जल्दी भर सकती हैं, बाढ़ आ सकती है और लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ सकता है. Photo: PTI

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अगर बारिश कुछ ही दिनों में बहुत ज्यादा हो और बाकी समय कम हो, तो खेती और पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है. इससे लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है. Photo: PTI

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पिछले कुछ सालों में केरल में कई बार भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं हुई हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में हो रहे बदलाव ऐसे मामलों को और बढ़ा सकते हैं. इसलिए लंबे समय के बारिश के आंकड़ों का अध्ययन करना जरूरी है. Photo: PTI

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इस स्टडी से साफ है कि केरल में सिर्फ बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसका पैटर्न भी बदल रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जानकारी का इस्तेमाल पहले से तैयारी करने, बाढ़ से बचाव और पानी के बेहतर इस्तेमाल की योजना बनाने में किया जा सकता है. Photo: PTI

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