भीषण गर्मी अब कोई स्थानीय समस्या नहीं रह गई है. भारत के बांदा जैसे इलाकों से लेकर ब्रिटेन और यूरोप तक एक ही कहानी सुनाई दे रही है - जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो का घातक मिश्रण. यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है. फ्रांस में अकेले 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 2 और 4 साल के दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं. Photo: Reuters
बोर्डो में तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जबकि ब्रिटेन में जून के रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. यह गर्मी सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि बदलते मौसम के पैटर्न और मानवीय गतिविधियों का नतीजा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गर्मी के पीछे अल-नीनो का प्रमुख हाथ है. Photo: AFP
अल-नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की घटना है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है. इस बार अल-नीनो ने यूरोप में गर्म हवा को उत्तर की ओर खींच लिया. Photo: AP
मौसम विशेषज्ञों ने इसे ओमेगा ब्लॉक नाम दिया है. यह ग्रीक अक्षर ओमेगा (Ω) के आकार का होता है, जिसमें बीच में गर्म हवा का गुब्बारा बन जाता है और दोनों तरफ ठंडी हवा रहती है. Photo: AFP
इस ब्लॉक के कारण उत्तर अफ्रीका के सहारा मरुस्थल से गर्म हवा यूरोप पहुंच रही है. हवा में नमी कम होने और हवा न चलने से गर्मी और बढ़ जाती है. फ्रांस के बोर्डो और पोइटियर्स में तापमान 41 डिग्री के पार पहुंच गया, जो पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ रहा है. Photo: AFP
स्पेन के सैन सेबेस्टियन में भी 40 डिग्री तापमान पहुंचने की आशंका है, जबकि वहां जून का औसत तापमान आमतौर पर 20 डिग्री के आसपास रहता है. Photo: AFP
फ्रांस में यह गर्मी जानलेवा साबित हो रही है. दो छोटे बच्चों को उनकी मां ने कार में बेहोश हालत में पाया. कारपेंट्रास शहर में दोनों बच्चों (2 और 4 साल) को बचाने की कोशिश नाकाम रही. गर्म कार में बच्चों को छोड़ना कितना खतरनाक है, यह घटना फिर याद दिला रही है. Photo: AFP
इसके अलावा बोर्डो क्षेत्र में 80 से 95 साल के तीन बुजुर्गों की मौत गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से हुई. कुल 18 मौतें दर्ज की गई हैं. गर्मी के दौरान डूबने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं. फ्रांस में पिछले साल गर्मी के मौसम में डूबने से मौतें 172% बढ़ गई थीं क्योंकि लोग ठंडक के लिए पानी में कूद रहे थे. इस बार भी 13 लोग डूबकर मारे गए. स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है. कई जगहों पर छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं. Photo: AP
ब्रिटेन में मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस हफ्ते तापमान 39 डिग्री तक पहुंच सकता है, जो जून का अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड तोड़ देगा. मई में ही ब्रिटेन ने अपना रिकॉर्ड तोड़ लिया था. लंदन के लोग 36 डिग्री तापमान को बहुत बुरा बता रहे हैं. पेरिस में भी जून का सबसे ज्यादा तापमान 38.4 डिग्री दर्ज हो सकता है. Photo: AFP
इटली में 12 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है. स्पेन और बेल्जियम में भी पक्षी और जानवर गर्मी से परेशान हैं. बेल्जियम में छतों पर तापमान 50-60 डिग्री तक पहुंच जाने से चिड़ियां घोंसलों से कूदकर भाग रही हैं. Photo: AP
विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है. गर्मी की लहरें और तूफान अब ज्यादा तीव्र और लगातार हो गए हैं. क्लेयर बार्न्स जैसी विशेषज्ञों का कहना है कि मानव गतिविधियों से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है. Photo: Reuters
अल-नीनो प्राकृतिक है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसे ज्यादा खतरनाक बना रहा है. गर्म हवाएं, सूखा, बाढ़ और मौतें – ये सब अब सामान्य हो चले हैं. भारत के उत्तर प्रदेश के बांदा समेत कई इलाकों में भी पिछले दिनों जबरदस्त गर्मी पड़ी. लू और हीटस्ट्रोक से कई मौतें हुईं. इससे साफ है कि कोई देश अकेला नहीं है. Photo: Reuters
पूरी दुनिया एक ही जलवायु संकट का सामना कर रही है. विकसित देश यूरोप भी अब इसकी मार झेल रहे हैं, जहां एयर कंडीशनिंग और ठंडक के इंतजाम सामान्य नहीं हैं. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसे मौसम के पैटर्न भविष्य में और बढ़ेंगे. Photo: AFP
सरकारों को जरूरी कदम उठाने होंगे – बेहतर मौसम पूर्वानुमान, गर्मी से बचाव के इंतजाम, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा, बिजली व्यवस्था को मजबूत करना और सबसे जरूरी – कार्बन उत्सर्जन कम करना. Photo: Reuters
यह गर्मी सिर्फ एक मौसम की घटना नहीं है. यह मानवता के सामने एक चेतावनी है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का खामियाजा अब सभी को भुगतना पड़ रहा है – चाहे वह बांदा हो या ब्रिटेन. Photo: AP