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दो दिन की बारिश ने NCR के शहरों की तैयारियों की पोल खोल दी, खासकर नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद की

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST
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राजधानी दिल्ली सहित पूरे NCR में दो दिनों की भारी बारिश ने शहरों की तैयारियों की सच्चाई उजागर कर दी है. जहां नोएडा में 36 घंटे में 176.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, वहीं गाजियाबाद में 133.5 मिलीमीटर और दिल्ली में 105 मिलीमीटर पानी बरसा. गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत भी प्रभावित हुए. Photo: PTI

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सड़कें तालाब बन गईं, गाड़ियां पानी में फंसीं, पेड़ उखड़ गए और यातायात ठप हो गया. यह घटना साफ बताती है कि NCR के शहर बरसात से निपटने के लिए अभी भी तैयार नहीं हैं. मौसम विभाग के अनुसार, पिछले दो दिनों में NCR के विभिन्न इलाकों में काफी भारी बारिश हुई. Photo: PTI

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नोएडा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 36 घंटे में 176.5 मिलीमीटर बारिश हुई. गाजियाबाद में 14 घंटे में 133.5 मिलीमीटर, दिल्ली में 33 घंटे में 105 मिलीमीटर, फरीदाबाद में 49 मिलीमीटर और सोनीपत में 19 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इस बारिश ने पूरे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी. Photo: PTI

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गुरुग्राम में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सर्विस लेन पानी में डूब गई, जिससे लोग घंटों फंसे रहे. गाजियाबाद और नोएडा की कई गलियों में पानी इतना भर गया कि छोटी गाड़ियां तक आगे नहीं बढ़ पाईं. कई जगहों पर पेड़ गिरने से बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए. इलाके अंधेरे में चले गए. यह बारिश सामान्य मॉनसून की बारिश से ज्यादा थी, लेकिन NCR के शहरों पर ये भारी पड़ गई. Photo: PTI

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बारिश के दो दिन NCR की सबसे बड़ी समस्या जलभराव बनकर उभरी. नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में सड़कें नदियों में बदल गईं. गाड़ियां पानी में फंस गईं. लोग पैदल घर पहुंचे और ऑफिस जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहे. गुरुग्राम में कई सोसाइटीज में पानी घरों में घुस गया. गाजियाबाद के कुछ इलाकों में कच्चे मकानों की दीवारें गिर गईं, जिससे लोग घायल हुए. Photos: Reuters

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दिल्ली के कई इलाकों में भी पानी भर गया, लेकिन NCR के उपनगरों की स्थिति सबसे खराब रही. कारण साफ है - पुराना ड्रेनेज सिस्टम, अनियोजित निर्माण और नालियों की सफाई न होना. वर्षों से चली आ रही यह समस्या हर बारिश में दोहराई जाती है, लेकिन स्थाई समाधान नहीं निकल पाता. Photo: PTI

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NCR के शहरों में बाढ़ प्रबंधन, ड्रेनेज और इमरजेंसी प्लानिंग की कमी दिखी. नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे शहर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचा पुराना पड़ गया है. नालियां जाम रहती हैं. पंपिंग स्टेशन समय पर काम नहीं करते. अतिक्रमण ने जल निकासी के रास्ते बंद कर दिए हैं. Photo: Reuters

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प्रशासन की तरफ से पहले से चेतावनी दी जाती है, लेकिन बारिश शुरू होते ही सिस्टम चरमरा जाता है. पेड़ गिरने, बिजली गुल होने और यातायात ठप होने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं. यह दिखाता है कि शहरों की प्लानिंग में मॉनसून को लेकर गंभीरता की कमी है. मौसम विभाग पहले से भविष्यवाणी करता है, फिर भी तैयारी नाकाफी साबित होती है. Photo: PTI

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नोएडा में सबसे ज्यादा बारिश होने से कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया. गाजियाबाद में सड़कों पर गड्ढों में गाड़ियां फंस गईं. गुरुग्राम में हाईवे पर जलभराव से ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया. कई जगहों पर स्कूल-कॉलेज बंद रहे या ऑनलाइन क्लासेस लगाई गईं. Photo: PTI

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दिल्ली-एनसीआर में हर साल बारिश में यही हाल होता है. गरीब और मध्यम वर्गीय इलाकों में नुकसान ज्यादा होता है. कच्चे मकानों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. आर्थिक नुकसान भी बड़ा है - गाड़ियों का नुकसान, काम पर न पहुंचना और स्वास्थ्य समस्याएं. Photo: PTI

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इस समस्या के लिए स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, डीडीए, नोएडा अथॉरिटी, गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण जिम्मेदार हैं. नालियों की नियमित सफाई, नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, अतिक्रमण हटाना और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में मॉनसून तैयारियों को शामिल करना जरूरी है. Photo: Reuters

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विशेषज्ञों का कहना है कि इंटीग्रेटेड ड्रेनेज प्लान, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का सख्ती से पालन और पुराने सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत है. दिल्ली-एनसीआर में एक समन्वित बाढ़ प्रबंधन प्रणाली बनाई जानी चाहिए, जिसमें सभी एजेंसियां साथ काम करें. Photo: Reuters

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दो दिन की बारिश ने NCR शहरों की तैयारियों की पोल खोल दी है. नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों को अब गंभीर कदम उठाने होंगे. अगर अभी सुधार नहीं हुए तो भविष्य में और भारी बारिश या बादल फटने जैसी घटनाएं बड़े संकट पैदा कर सकती हैं. Photo: Reuters

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सरकार और प्रशासन को इस घटना से सबक लेते हुए लंबे समय के प्लान पर काम करना चाहिए. नागरिकों को भी जागरूक रहना होगा और अनियोजित निर्माण का विरोध करना चाहिए. बेहतर प्लानिंग, सख्त अमल और समन्वय से NCR को बारिश का सामना करने वाला मजबूत क्षेत्र बनाया जा सकता है. Photo: PTI

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