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समंदर किनारे बसे मुंबई में बारिश का पानी क्यों नहीं निकलता? बाढ़ का असली कारण क्या है?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST
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मुंबई शहर अरब सागर के किनारे बसा है, फिर भी हर साल भारी बारिश में यह शहर पानी में डूब जाता है. सड़कें नदियों में बदल जाती हैं. ट्रेनें बंद हो जाती हैं. इलाके डूब जाते हैं. रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ जाती है. लोग पूछते हैं कि समंदर इतना करीब होने के बावजूद बारिश का पानी निकल क्यों नहीं पाता? क्या बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) जिम्मेदार है या पूरा दोष पुराने ड्रेनेज सिस्टम का है? Photo: PTI
 

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मुंबई तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ शहर है. अरब सागर इसकी पश्चिमी सीमा बनाता है. सामान्य स्थिति में बारिश का पानी समुदर में जाकर निकल जाना चाहिए. लेकिन हकीकत इसके उलट है. जब भारी बारिश होती है तो पानी सड़कों पर, बस्तियों में और निचले इलाकों में जमा हो जाता है. Photo: PTI

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इसका सबसे बड़ा कारण शहर की निचली भू-संरचना है. मुंबई का बड़ा हिस्सा समुद्र तल से बहुत कम ऊंचाई पर बना है. कई इलाके तो समुद्र तल से नीचे हैं. ऐसे में पानी को निकलने के लिए प्राकृतिक ढाल नहीं मिल पाती. Photo: PTI

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मुंबई का ड्रेनेज सिस्टम ब्रिटिश काल का है. 19वीं और 20वीं शताब्दी में बनाए गए ये नाले और पाइप आज की जरूरतों के हिसाब से पूरी तरह अपर्याप्त हैं. शहर की आबादी तब करीब 10-15 लाख थी, आज यह 2 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है. इस बढ़ती आबादी, अनियोजित निर्माण और स्लम एरिया के कारण ड्रेनेज सिस्टम पर भारी बोझ पड़ रहा है. Photo: PTI

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नाले समय-समय पर साफ नहीं किए जाते. इनमें कचरा, प्लास्टिक और मलबा जमा हो जाता है. बारिश के मौसम में ये नाले ब्लॉक हो जाते हैं. पानी बहने के बजाय उफनने लगता है. कई जगहों पर ड्रेनेज पाइप बिल्कुल छोटे हैं जो भारी बारिश का पानी सहन नहीं कर पाते. Photo: PTI

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बीएमसी शहर की सबसे बड़ी नगरपालिका है और ड्रेनेज सिस्टम, सड़क रखरखाव और बाढ़ प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी इसी के पास है. कई वर्षों से बीएमसी पर आरोप लगते रहे हैं कि वह बारिश से पहले नालों की सफाई नहीं कर पाती. पंपिंग स्टेशन समय पर काम नहीं करते. कई पुराने पंप खराब हालत में हैं. Photo: PTI

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बीएमसी भी दावा करती है कि वह बड़े पैमाने पर काम कर रही है. मुंबई में कई बड़े ड्रेनेज प्रोजेक्ट चल रहे हैं जैसे मध्यवर्ती नाले का विस्तार, पंपिंग स्टेशनों का आधुनिकीकरण आदि. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि काम की गति बहुत धीमी है और लागत बढ़ती जा रही है. भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं. Photo: PTI

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मुंबई में पिछले कई दशकों से बेतरतीब निर्माण हुआ है. मैंग्रूव क्षेत्रों को काटकर, पहाड़ काटकर और निचले इलाकों को भरकर बिल्डिंगें बनाई गई हैं. इससे प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद हो गए. मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता कम हो गई है. Photo: Reuters

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स्लम एरिया, अवैध कॉलोनियां और रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति के बने निर्माण ड्रेनेज लाइनों को ब्लॉक करते हैं. परिणामस्वरूप पानी का बहाव रुक जाता है और बाढ़ आ जाती है. जलवायु परिवर्तन अब मुंबई की बाढ़ का बड़ा कारण बन गया है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है. इससे अरब सागर से आने वाली नम हवाएं ज्यादा भारी बारिश ला रही हैं. अब बारिश कम दिनों में लेकिन बहुत तेज होती है. Photo: PTI

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समुद्र स्तर भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इससे मुंबई जैसे निचले शहरों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. हाई टाइड और भारी बारिश एक साथ होने पर पानी निकलने में और दिक्कत होती है क्योंकि समुद्र का पानी ऊंचा होने से ड्रेनेज सिस्टम बैकफ्लो कर देता है. Photo: PTI

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अल-नीनो और ला-नीना महासागरों में होने वाले तापमान चक्र मॉनसून को प्रभावित करते हैं. इस साल अल-नीनो के कमजोर पड़ने के बावजूद मुंबई में भारी बारिश हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो सीधे बाढ़ का कारण नहीं है, लेकिन यह मॉनसून पैटर्न को अनियमित जरूर बनाता है.  Photo: Reuters

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कभी-कभी अल-नीनो के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और कुछ में सूखा पड़ता है. मुंबई जैसे तटीय शहरों में नमी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर तेज बारिश होती है. मुंबई में रोजाना हजारों टन कचरा उत्पन्न होता है. इसका बड़ा हिस्सा नालों में फेंक दिया जाता है. मैंग्रूव व प्राकृतिक बाढ़ रोकथाम प्रणाली की तरह काम करते हैं. इनका विनाश बाढ़ बढ़ाता है. Photo: PTI

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कई पुल, नाले और पाइपलाइन दशकों पुरानी हैं जो अब क्षमता से ज्यादा लोड सहन नहीं कर पातीं. विशेषज्ञ लंबे समय से मुंबई के लिए एक समग्र मास्टर प्लान की मांग कर रहे हैं. ड्रेनेज सिस्टम का पूर्ण आधुनिकीकरण, मैंग्रूव संरक्षण और विस्तार, अनियोजित निर्माण पर सख्ती, रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाना और स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा. Photo: PTI

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मुंबई में बाढ़ का मुद्दा एक कारण से नहीं है. यह पुराने ड्रेनेज सिस्टम, बीएमसी की कमियों, अनियोजित विकास, जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनियमितताओं का मिलाजुला परिणाम है. समंदर किनारे होने के बावजूद शहर का निचला स्तर, ब्लॉक नाले और बढ़ता समुद्र स्तर पानी निकासी को मुश्किल बना देते हैं. Photo: PTI

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अब समय है कि बीएमसी, महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार मिलकर ठोस कदम उठाएं. अगर सही समय पर काम नहीं किया गया तो भविष्य में बाढ़ और भी खतरनाक रूप ले सकती है. मुंबई को विश्व स्तर का बाढ़ प्रतिरोधी शहर बनाने के लिए तत्काल और सतत प्रयासों की जरूरत है. Photo: PTI

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