Sharad Purnima 2026: 25 या 26 अक्टूबर, कब है शरद पूर्णिमा? जानें खीर रखने का सही समय

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा 2026 में 25 या 26 अक्टूबर को कब है? जानें सही तारीख, पूर्णिमा तिथि, खीर चांदनी में रखने का समय, मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व और इस रात से जुड़ी खास मान्यताएं.

Advertisement
शरद पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त शरद पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

Sharad Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इसे साल की सबसे खास पूर्णिमा तिथियों में से एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी रोशनी को अमृत के समान माना जाता है. यही वजह है कि शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. हालांकि, इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों के मन में सवाल है कि शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी या 26 अक्टूबर को. आइए जानते हैं सही तारीख, पूजा का समय और इस पर्व से जुड़ी खास मान्यताएं.

Advertisement

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी. ऐसे में तारीख को लेकर भ्रम होना स्वाभाविक है, लेकिन शरद पूर्णिमा की रात और चंद्रमा की पूजा से जुड़ी परंपराओं के लिए 25 अक्टूबर की रात महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 9:41 बजे
- पर्व की प्रमुख रात: 25 अक्टूबर

पूजा और व्रत के समय में स्थानीय पंचांग तथा परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है. इसलिए अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि जरूर कर लें.

शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रात में चांदनी के नीचे रखने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं. इसी विश्वास के चलते दूध, चावल और चीनी से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है. बाद में इसे परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

Advertisement

आमतौर पर खीर को चंद्रोदय के बाद चांदनी में रखा जाता है. इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को है, इसलिए इसी रात खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी. हालांकि, खीर को कितनी देर रखना है, इसे लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग मान्यताएं हैं.

ध्यान रखें कि चांदनी में खीर रखने से उसमें अमृत या औषधीय गुण आने की बात धार्मिक मान्यता है. खीर को साफ बर्तन में ढककर रखें और दूध से बनी चीजों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर छोड़ने से बचें.

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा क्यों होती है?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं,  जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. 'कोजागरी' शब्द का संबंध 'को जागर्ति' से माना जाता है, जिसका अर्थ है- कौन जाग रहा है?

इसी मान्यता के चलते कई लोग शरद पूर्णिमा की रात जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं. घर की साफ-सफाई की जाती है, दीपक जलाए जाते हैं और माता को खीर, मिठाई या अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है. भक्त मां लक्ष्मी से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.

शरद पूर्णिमा का भगवान कृष्ण से क्या संबंध है?

Advertisement

शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से भी जोड़ा जाता है. ब्रज की धार्मिक परंपराओं में इस रात का खास महत्व है. मान्यता है कि शरद ऋतु की पूर्णिमा की चांदनी में भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था. इसी कारण कई जगह इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है.

इस अवसर पर कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. भक्त भगवान कृष्ण की आराधना कर प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं.

शरद पूर्णिमा को क्यों माना जाता है खास?

शरद पूर्णिमा बारिश के मौसम के बाद आने वाली शरद ऋतु की पूर्णिमा है. इस समय आसमान साफ रहने और चांदनी खिलने की संभावना अधिक होती है. भारतीय परंपरा में चंद्रमा को मन और शीतलता से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए इस रात चंद्र दर्शन, पूजा-पाठ और ध्यान का विशेष महत्व माना गया है.

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. कहीं इसे कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है, तो कहीं शरद पूनम या रास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. नाम और रीति-रिवाज भले अलग हों, लेकिन इस पर्व का मुख्य भाव भक्ति, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »