शरद पूर्णिमा का पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है. इसलिए इसकी रोशनी में खीर रखकर खाने से बड़ा पुण्य मिलता है. हालांकि इस बार शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज हैं. कोई 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा बता रहा है तो कोई 26 अक्टूबर को. हालांकि ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्रा ने पंचांग देखकर सही तारीख बता दी है. आइए जानते हैं.
शरद पूर्णिमा कब है?
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से लेकर 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और खीर रखने की परंपरा है. इसलिए शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर को रखना उचित होगा. इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें और मां लक्ष्मी की आराधना करें.
शरद पूर्णिमा पर स्नान-दान का मुहूर्त
ज्योतिषविद के अनुसार, 26 अक्टूबर की सुबह ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. पवित्र नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालु इस अवधि में स्नान कर सकते हैं और स्नान के बाद भगवान का पूजन और दान-पुण्य के काम कर सकते हैं.
शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का महत्व
शरद पूर्णिमा पर रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है और खीर में भी उसका प्रभाव आता है. अगले दिन खीर को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है.
ज्योतिषविद ने बताया कि खीर को खुले आसमान के नीचे रखते समय उसके ऊपर पतला सूती कपड़ा ढक सकते हैं. सुबह खीर को भगवान को अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों में प्रसाद बांटने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं में इस प्रसाद को सकारात्मकता, स्वास्थ्य और देवी-देवताओं की कृपा से भी जोड़ा जाता है.
चंद्रमा की 16 कलाओं से परिपूर्ण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना जाता है. इस कारण इस रात चंद्रमा की पूजा, मंत्र जाप, भजन और जागरण का विशेष महत्व बताया जाता है. मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मकता बढ़ती है.
धार्मिक ग्रंथों में भगवान श्रीराम को 12 कलाओं से युक्त और भगवान श्रीकृष्ण को 16 कलाओं का पूर्ण अवतार बताया गया है. चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम अमृता, मानदा, पुष्पा, पुष्टि, तुष्टि, धृति, शशिनी, चंद्रिका, कांति, ज्योत्स्ना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्णा, पूर्णामृत आदि बताए जाते हैं. इनका संबंध चंद्रमा की विभिन्न अवस्थाओं और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है.
प्रवीण मिश्र, ज्योतिषी