Hindu Muslim Kanwar: हिंदू-मुस्लिम दोस्त लाए कांवड़! 101 लीटर जल से किया शिवलिंग का अभिषेक

राजस्थान के धौलपुर जिले के सैपऊ उपखंड के एक प्राचीन महादेव मंदिर पर सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. यहां छह हिन्दू-मुस्लिम दोस्त कांवड़ में 101 लीटर गंगाजल लेकर आए शिवलिंग का अभिषेक किया.

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सभी दोस्त पांच दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के सौरों से कांवड़ लेने के लिए रवाना हुए थे. (Photo: ITG) सभी दोस्त पांच दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के सौरों से कांवड़ लेने के लिए रवाना हुए थे. (Photo: ITG)

उमेश मिश्रा

  • धौलपुर,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:37 PM IST

सावन के पहले सोमवार राजस्थान के सैपऊ महादेव मंदिर पर सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल देखने को मिली. यहां छह हिन्दू-मुस्लिम दोस्त उत्तर प्रदेश के सोरों शहर से 101 लीटर की कांवड़ लेकर यहां पहुंचे. सभी दोस्तों ने भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक किया. सैपऊ उपखंड क्षेत्र के रहने वाले इन छह दोस्तों में पांच हिंदू और एक मुस्लिम शामिल है. ये पांच दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के सौरों से कांवड़ लेने के लिए रवाना हुए थे. सभी दोस्त करीब 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर 101 लीटर की कांवड़ लेकर सैपऊ के महादेव मंदिर पहुंचे और भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक किया.

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राहुल, सुखवीर, सौरभ, कुलदीप, मनीष और मांकरा गांव निवासी के मुस्लिम युवक सद्दाम खान कांवड़ में 101 लीटर जल लेकर सौरों से सैपऊ महादेव मंदिर तक पहुंचे हैं. सभी दोस्तों ने बिना किसी भेदभाव के एकसाथ पैदल यात्रा की और पूरे रास्ते आपसी भाईचारे का संदेश दिया.

कहां है महादेव के ये दिव्य मंदिर?
धौलपुर जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर सैपऊ उपखंड से होकर गुजर रही पार्वती नदी के पास त्रेता युग का ऐतिहासिक महादेव मंदिर न केवल जन-जन की श्रद्धा का केंद्र हैं, बल्कि भव्यता ओर नक्काशी का अद्भुत नमूना भी है. यह मौर्यकालीन स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है. इनको राम रामेश्वर भी कहा जाता है. पार्वती नदी की ओर धौलपुर जिले के सैपऊ कस्बे से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर महाराजा भगवंत सिंह ओर उनके संरक्षक कन्हैया लाल राजधर की धार्मिक आस्था का परिचय है.

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800 साल पुराना है मंदिर
इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब आठ सौ वर्ष पुराना है. यह शिवलिंग संवत 1305 में तीर्थाटन करते हुए श्याम रतन पुरी अपनी बहन लीला बाई के साथ यहां लाए थे. कहते हैं कि उन्हें भोलेनाथ ने सपने में आकर शिवलिंग का दर्शन कराया था. तब से इस मंदिर को स्वयं शंभू महादेव भी कहा जाने लगा. इसके बाद उन्होंने एक पेड़ के नीचे अपना धुना लगा लिया और वहां मौजूद झाड़ियों के पास एक गाय आती थी, जो थनों से दूध टपका कर चली जाती थी.

कुछ दिन बाद उन्हें आभास हुआ कि इन झाड़ियों में शिवलिंग दबा हो सकता है. झाड़ियों को हटाकर इस जगह की खुदाई की तो शिवलिंग दिखाई दिया. खुदाई करते समय शिवलिंग खंडित हो गया और खंडित मूर्ति को निषेध मानकर श्याम रतन पुरी ने मिट्टी से दबाना शुरू किया तो मूर्ति मिट्टी में नहीं दबी. उसे जितना दबाते गए वो उतनी ही बाहर निकलती गई और आठ फीट तक मिट्टी का ढेर लगाने के बाद भी शिवलिंग दिखता रहा. इसके बाद उन्होंने गोलाकार चबूतरा नुमा बनाकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना शुरू कर दी.

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