दीपावली से पहले कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला धनतेरस केवल धन-संपत्ति और सोने-चांदी की खरीदारी का पर्व नहीं है. इस दिन का मूल संबंध भगवान धनवंतरी के प्राकट्य और आरोग्य की कामना से जुड़ा है. भगवान धनवंतरी को आयुर्वेद का देवता व देवताओं का वैद्य माना जाता है. समुद्र मंथन में वह अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. यही कारण है कि धनतेरस पर उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया है. इस साल धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा.
समय के साथ इस पर्व पर धन-संपत्ति की कामना, सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा अधिक प्रचलित हो गई. इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी कई परिवारों में की जाती है. हालांकि, भगवान धनवंतरी की उपासना का उद्देश्य केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि निरोगी जीवन और दीर्घायु की कामना भी है. इसलिए धनतेरस के आध्यात्मिक संदेश को केवल धन की प्राप्ति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
शरीर है सभी कर्तव्यों का आधार
महाकवि कालिदास ने अपने संस्कृत महाकाव्य कुमारसंभवम् में कहा है “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” इसका अर्थ है कि शरीर ही धर्म और कर्तव्यों के पालन का प्रमुख साधन है. जब शरीर स्वस्थ और सक्षम होता है तो मनुष्य अपने जीवन के दायित्वों का निर्वहन कर पाता है. धन-संपत्ति जीवन को सुविधाजनक बना सकती है, लेकिन अच्छे स्वास्थ्य के बिना उन सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना कठिन हो जाता है.
भगवान धनवंतरी की पूजा इसी संकल्प की याद दिलाती है कि जीवन में स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए जितना धन और समृद्धि को दिया जाता है.
भगवान धनवंतरी की पूजा विधि
धनतेरस के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजन स्थल की सफाई करके भगवान धनवंतरी के चित्र या प्रतिमा को स्थापित करें. उनके सामने दीपक जलाएं, पुष्प अर्पित करें और स्वच्छ जल चढ़ाएं. अपनी परंपरा के अनुसार फल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें.
भगवान धनवंतरी का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जप किया जा सकता है-
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः।”
पूजा के दौरान रोगियों के स्वस्थ होने, जरूरतमंदों को औषधि उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संकल्प भी जरूर लें. शाम को यमदीपदान की परंपरा हो तो उसे भी परिवार की मान्यता के अनुसार निभाएं.
धनतेरस पर सोना-चांदी या बर्तन खरीदना अनिवार्य नहीं है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करना या श्रद्धापूर्वक पूजा करना पर्याप्त है. इस पर्व का संदेश है कि धन की कामना के साथ निरोगी शरीर, संयमित जीवन और दूसरों के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता को भी महत्व दिया जाना चाहिए.
अंशु पारीक