Vrat For Women 2026: करवा चौथ से अहोई तक, जल्द आने वाले हैं महिलाओं के 4 सबसे बड़े व्रत

दशहरा, दिवाली, धनतेरस और भाई दूज जैसे कई प्रमुख त्योहार दस्तक देने वाले हैं. त्योहारों के इस मौसम में सुहागन महिलाओं के लिए भी कई खास व्रत आने वाले हैं. शादीशुदा महिलाओं को पूरे साल इन त्योहारों को बेसब्री से इंतजार रहता है.

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महिलाओं के लिए साल के सबसे बड़े व्रत आने वाले हैं. (Photo: ITG) महिलाओं के लिए साल के सबसे बड़े व्रत आने वाले हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:06 PM IST

अक्टूबर-नवंबर का महीना बड़े त्योहारों की रौनक से सजा रहने वाला है. इसमें दशहरा, दिवाली, धनतेरस और भाई दूज जैसे कई प्रमुख त्योहार दस्तक देने वाले हैं. त्योहारों के इस मौसम में सुहागन महिलाओं के लिए भी कई खास व्रत आने वाले हैं. शादीशुदा महिलाओं को पूरे साल इन त्योहारों को बेसब्री से इंतजार रहता है. आइए जानते हैं अक्टूबर-नवंबर में इनके लिए कौन-कौन से खास व्रत आने वाले हैं.

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जितिया व्रत 2026
इस साल जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर दिन शनिवार को रखा जाएगा. यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना से करती हैं. इस दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. व्रत के दौरान संतान की सलामती के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं.

करवा चौथ 2026
हर साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर दिन गुरुवार को रखा जाएगा. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना से यह व्रत रखती हैं. पूरे दिन भूखी प्यासी रहने के बाद महिलाए शाम को चंद्र दर्शन के बाद ही यह उपवास खोलती हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन रात 8:17 बजे चंद्रोदय होगा.

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अहोई अष्टमी 2026
संतान की सुख-समृद्धि, उन्नति और दीर्घायु के लिए 1 नवंबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं अहोई माता की पूजा करती हैं. पूरे दिन भूखी प्यासी रहकर व्रत की कथा सुनती हैं. कई परंपराओं में तारों के दर्शन के बाद व्रत खोलने की मान्यता है.

छठ पूजा 2026
छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला प्रमुख पर्व है. इसकी शुरुआत 13 नवंबर 2026 को नहाय-खाय से होगी. इसके अगले दिन 14 नवंबर को खरना होगा. फिर 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य का रहेगा. इस दिन व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इसके बाद 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है. इसके बाद व्रती पारण करते हैं.

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