9 फीट के मूषक पर विराजे 7 फीट के गणपति बप्पा...कोटा में त्योहार के रंग आस्था के संग

कोटा की रेलवे कॉलोनी में इस बार गणेश जी का बहुत सुंदर और अलग पंडाल लगाया गया है. यहां 9 फीट लंबे विशाल मूषक पर 7 फीट ऊंचे बप्पा को विराजमान किया गया है. पिछले 10 साल से यहाँ नवयुवक मंडल के लोग हर साल मिट्टी के गणेश जी ही लाते हैं, ताकि पर्यावरण साफ रहे और बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में पता चले.

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9 फीट की सवारी पर विराजे 7 फीट के गणपति देवा(photo itg) 9 फीट की सवारी पर विराजे 7 फीट के गणपति देवा(photo itg)

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

राजस्थान के  कोटा की रेलवे कॉलोनी में इस बार का गणेश उत्सव आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. त्योहारों के रंग और आस्था का संगम कहे जाने वाले गणेश उत्सव पर इस बार कुछ अनोखा देखने को मिल रहा है. यहां हर साल की तरह इस साल भी गणपति बप्पा की भव्य स्थापना की गई है. लेकिन इस बार बप्पा की सवारी मूषक के विशाल स्वरूप ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 9 फीट लंबे मूषक पर विराजे 7 फीट के गणपति को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.

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 रेलवे कॉलोनी में बालाजी नवयुवक मंडल की ओर से गणेश चतुर्थी के अवसर पर भव्य गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है. इस मंडल द्वारा पिछले करीब 10 सालों से लगातार गणेश उत्सव मनाया जा रहा है और हर साल मिट्टी की इको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित करना इसकी सबसे बड़ी खासियत है.इस साल उत्सव को ज्यादा खास बनाने के लिए नवयुवक मंडल ने 9 फीट लंबे विशाल मूषक पर विराजमान 7 फीट ऊंचे बप्पा  की मूर्ती को स्थापित किया गया है. यह अनोखा स्वरूप पांडाल में आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है.

इस मंडल से जुड़े नागेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि हर साल गणेश उत्सव में कुछ नया और आकर्षक करने का प्रयास किया जाता है. इस बार भी विशाल मूषक तैयार कराया गया है. उनका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना भी है. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मंडल ने शुरू से ही मिट्टी से बनी मूर्ती की परंपरा को अपनाया है और आगे भी इसे जारी रखने का संकल्प लिया है.
 

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गणेश उत्सव से जोड़े गये कई सांस्कृतिक कार्यक्रम

गणेश उत्सव के दौरान पांडाल में नाट्य मंचन, रामायण और महाभारत से जुड़े कार्यक्रम, जागरण सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं. इस आयोजन में आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जिससे पूरा पांडाल श्रद्धालुओं से भरा रहता है. स्थानीय लोगों की यही भागीदारी पिछले कई सालों से इस आयोजन को लगातार ऊर्जा दे रही है. विसर्जन के बाद भी मंडल के सदस्यों का उत्साह कम नहीं होता और अगले गणेश उत्सव की तैयारियां कई महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं.

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