'वन स्टेट, वन इलेक्शन' का पहला प्रयोग आज, राजस्थान निकाय चुनाव में किसका क्या दांव पर?

राजस्थान में 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के तहत 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों के लिए पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच 57 लाख से अधिक मतदाता 20,623 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं.

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राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग (Photo-ITG) राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:14 AM IST

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों के पहले चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है. प्रदेश में 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के तहत कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराए जा रहे हैं. इसके पहले चरण में 162 नगरीय निकायों के लिए वोट डाले जा रहे हैं, जिनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं.

राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों के जरिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है.

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शहरी निकाय चुनाव के पहले चरण के तहत राजस्थान के 39 जिलों के 5,393 वार्डों में मतदान हो रहा है. इस चरण में 20,623 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 57,52,278 मतदाता करेंगे.

जानिए किस शहर की किस सीट पर चुनाव
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिका के वार्डों में मतदान हो रहे हैं. पहले चरण में चार प्रमुख नगर निगमों- अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा में भी वार्ड पार्षदों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. राजधानी जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में होगा. हालांकि, जयपुर जिले की 18 अन्य निकायों (जैसे चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू आदि) में पहले चरण में वोटिंग कराई जा रही है. 

27 नगर परिषद में लिए चुनाव है, जिसमें नागौर, ब्यावर, कोटपूतली , चुरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमू, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी , झालावाड़, बांसवाड़ा, चितौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना , कुचामन सीटी, करोली, भिवाड़ी, खैरथल, तिजारा, जैसलमेर, बाड़मेर नगर परिषद.

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वहीं, 131 नगर पालिका के वार्डों में पार्षद के लिए चुनाव है. इसमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली, खंडार. बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी, वाटिका नगर पालिका शामिल हैं.

बीजेपी-कांग्रेस किसका क्या दांव पर लगा 
राजस्थान के पहले चरण के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस सहित क्षेत्रीय दलों के साख दांव पर लगी है.  डबल इंजन और सरकार के कामकाज की पहली बड़ी परीक्षा है. दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद यह भजनलाल शर्मा सरकार की शहरी मतदाताओं के बीच पहली सबसे बड़ी परीक्षा है. बीजेपी ने 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के तहत इन चुनावों को आगे बढ़ाया है, इसलिए नतीजे सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों और काम पर जनादेश माने जाएंगे.  

राजस्थान के शहरी निकायों और नगर निगमों (जैसे बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर) को पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत वोट बैंक माना जाता है. पार्टी पर अपने इस शहरी किले को बचाए रखने का भारी दबाव है.  बीजेपी ने इस बार बड़ी संख्या में पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाया है. ऐसे में निर्दलीय मैदान में उतरे पार्टी के बागियों को साधना और भितरघात से बचना संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

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वहीं, कांग्रेस के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है. विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए यह निकाय चुनाव राजस्थान के शहरी इलाकों में अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने का बड़ा मौका है. प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व सीएम अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस ने स्थानीय नागरिक समस्याओं (सफाई, सड़क, बिजली, स्थानीय प्रशासन की विफलता) को मुद्दा बनाकर आक्रामक प्रचार किया है. 

राजस्थान में Gen-Z वोटर्स कितने अहम
राजस्थान शहरी निकाय चुनाव में सभी की निगाहें Gen-Z वोटर्स पर है. इस चुनाव ममें 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 36.60 लाख मतदाता हैं. यानी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 58 लाख मतदाता हैं.  इस तरह 18 से 29 साल के Gen Z वोटर्स की संख्या करीब 35 लाख के करीब हैं. Gen Z वोटर्स की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है, जो काफी निर्णायक है. 

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