बंगाल के बाद पंजाब SIR पर बवाल, क्‍या केजरीवाल के ल‍िए नया मोर्चा तैयार हो रहा है

पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद अब पंजाब में SIR की बारी है. 15 जून से पंजाब में SIR का काम शुरू हो जाएगा. पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव से पहले SIR कराए जाने पर सवाल उठाए हैं. पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, और अरविंद केजरीवाल के लिए यह नई चुनौती है.

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AAP नेता अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (Photo: PTI) AAP नेता अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

पंजाब में चुनाव आयोग ने 15 जून से SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू करने की घोषणा की है. बिहार और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया पूरी हो गई थी. पंजाब में अगले साल, 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं - और, इसीलिए पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले SIR कराए जाने पर विरोध जताया है.

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पंजाब के कांग्रेस नेताओं ने एसआईआर की टाइमिंग को लेकर चिंता जताई है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का आरोप है कि बीजेपी शासन में संवैधानिक संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है - अगले साल होने वाले चुनाव के लिए तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी के सामने यह नई चुनौती है. 

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में हाई कोर्ट से अवमानना की कार्यवाही का सामना करने जा रहे अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों के लिए SIR का मुद्दा चुनाव कैंपेन के लिहाज से तो अच्छा है, लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के बाद बिहार और पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने आगे की लड़ाई काफी मुश्किल होने का संकेत दे रहे हैं. 

अब पंजाब में होगा SIR

पंजाब में इससे पहले 2005 में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 31 जुलाई को वोटर सूची का ड्राफ्ट जारी होगा. 31 जुलाई से 30 अगस्त के बीच आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी, और 28 सितंबर तक उनका निपटारा किया जाएगा. 30 सितंबर तक फाइनल वोटर लिस्ट प्रिंट की जाएगी - और 1 अक्टूबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो जाएगी. 

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SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरीफिकेशन करेंगे. SIR के दौरान नए वोटर के नाम जोड़े जाएंगे, और गलत या फर्जी या डबल नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे. पंजाब में करीब 2.14 करोड़ वोटर हैं.  

पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनंदिता मित्रा के मुताबिक, SIR के लिए 2 फॉर्म भरे जाएंगे. 25 जून से 24 जुलाई, 2026 तक बीएलओ पूरे पंजाब में घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन फॉर्म भरवाएंगे. उसकी एक कॉपी वोटर को दी जाएगी. अगर दरवाजा बंद रहा, या घर पर कोई नहीं मिला, तो BLO घर के अंदर फॉर्म  डाल देंगे. अगर उसके बाद भी उस मतदाता से भेंट नहीं होती, तो BLO महीने में तीन बार घर जाकर मिलने का प्रयास करेगा. 

CEO अनिंदिता मित्रा ने बताया, राज्य के सभी मतदाताओं को एसआईआर अभियान के तहत फॉर्म जमा करना होगा. प्री-एसआईआर मैपिंग के तहत राज्य के कुल 2,14,57,160 मतदाताओं में से 1,79,56,656 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है, जो कुल मतदाताओं का 83.69 फीसदी है. पंजाब के ग्रामीण इलाकों में 89.58 फीसदी मैपिंग पूरी हो चुकी है. शहरी इलाकों में मैपिंग का काम 73 फीसदी पूरा हो चुका है.

पंजाब में SIR का विरोध शुरू

पंजाब में आम आदमी पार्टी के संयोजक अमन अरोड़ा और पंजाब की भगवंत मान सरकार में मंत्री हरपाल चीमा ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर SIR पर अपनी बात रखी. AAP नेताओं का आरोप है, बीजेपी शासन में देश की संवैधानिक संस्थाएं तेजी से अपनी निष्पक्षता खो रही हैं, और उनका इस्तेमाल केंद्र में सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है.

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आम आदमी पार्टी का आरोप है, बीजेपी उन राज्यों में, जहां वह अपने दम पर लोकतांत्रिक तरीके से जीत हासिल नहीं कर सकती, चुनाव आयोग का राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है... बीजेपी पहले वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के नाम पर SIR जैसे अभियान चलाती है, और बाद में चुनावी फायदा लेने के लिए बड़े पैमाने पर वोटर के नाम हटाने में उनका इस्तेमाल करती है.

आम आदमी पार्टी की ही तरह कांग्रेस ने भी पंजाब में चुनाव से ठीक पहले SIR कराए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा का सवाल है, पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एसआईआर अभियान को आगे क्यों बढ़ाया जा रहा है?

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि बूथ स्तर पर कांग्रेस के कार्यकर्ता सतर्क होकर पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे. बोले, एक भी असली मतदाता का नाम हटाने नहीं दिया जाएगा, और किसी भी नागरिक को मतदान के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं होने दिया जाएगा. पंजाब चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर की हर कोशिश का विरोध करेगा.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब के सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेद को किनारे रखें, और सतर्कता बरतते हुए सुनिश्चित करें कि चुनाव से ठीक पहले पंजाब के मतदाताओं को वोटिंग के उनके अधिकार से वंचित न किया जाए, क्योंकि बीजेपी को शक है कि वे उसे वोट नहीं देंगे.

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क्या कांग्रेस और केजरीवाल हाथ मिलाएंगे

SIR का विरोध कांग्रेस के एजेंडे का स्थायी भाव है. कांग्रेस ने बिहार में भी SIR का विरोध किया था, और पश्चिम बंगाल में भी. फर्क बस यह था कि बिहार में राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव और महागठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कांग्रेस को एंट्री ही नहीं दी. ममता बनर्जी ने अकेले ही SIR विरोधी मुहिम चलाई. सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक. 

कांग्रेस पंजाब में भी SIR का विरोध कर रही है, और आम आदमी पार्टी भी विरोध कर रही है. अभी यह साफ नहीं है कि पश्चिम बंगाल की तरह दोनों अलग-अलग विरोध जताएंगे, या बिहार की तरह हाथ मिलाकर. ममता बनर्जी तो पश्चिम बंगाल की हार के बाद नरम पड़ गई हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल दिल्ली की हार के बाद भी अपने रुख पर कायम हैं. देखा जाए तो अरविंद केजरीवाल भी उसी मुहाने पर खड़े हो गए हैं, जहां चुनावों से पहले बिहार में तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी खड़ी थीं.

कांग्रेस के साथ कभी दुश्मनी तो कभी दोस्ती का केजरीवाल का पुराना रिश्ता रहा है. दिल्ली में कांग्रेस का विरोध करके 2013 में विधानसभा चुनाव जीते, लेकिन सीटें कम पड़ जाने पर कांग्रेस के ही सपोर्ट से सरकार भी बना ली. 2024 के लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन तो किया था, लेकिन पंजाब से बाहर ही. दिल्ली की बात करें, तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन रहा, लेकिन विधानसभा चुनाव में दोनों आमने सामने देखे गए. 

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जब राहुल गांधी ने दिल्ली चुनाव कैंपेन के दौरान अरविंद केजरीवाल के 'शीशमहल' और दिल्ली शराब घोटाले का मुद्दा उछाला, तो अरविंद केजरीवाल भी जोर जोर से पूछने लगे कि आखिर गांधी परिवार के लोग और रॉबर्ट वाड्रा अभी तक जेल क्यों नहीं भेजे गए? 

कांग्रेस नेतृत्व तो आम आदमी पार्टी से लंबे समय तक दूरी बनाकर चल रहा था, लेकिन संसद में लाए गए दिल्ली सेवा बिल पर कांग्रेस के सार्वजनिक रूप से समर्थन की घोषणा के बाद ही अरविंद केजरीवाल विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक में शामिल हुए. ममता बनर्जी ने तो अब इंडिया ब्लॉक के साथ चलने की घोषणा कर दी है, लेकिन अरविंद केजरीवाल अभी मुद्दों के आधार पर ही समर्थन देते हैं, और आम आदमी पार्टी इंडिया ब्लॉक में नहीं होने का दावा करती है. 

सवाल है कि क्या अरविंद केजरीवाल पंजाब चुनाव में कांग्रेस से हाथ मिलाएंगे? टीएमसी का हाल देखने के बाद भी चुनावों से पहले वाली ममता बनर्जी जैसा व्यवहार तो नहीं करेंगे? आम आदमी पार्टी स्टैंड जो भी ले, अरविंद केजरीवाल के सामने नया मोर्चा तो खुल ही गया है.

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