भोपाल की बहुचर्चित ट्विशा केस में आरोपी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत को अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दिया है. दोनों की न्यायिक रिमांड सोमवार को समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया.
सुनवाई के दौरान CBI ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की. एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे की प्रक्रिया के लिए आरोपियों का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है. CBI की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ाने का आदेश दिया. इसके तहत दोनों अब 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे.
ट्विशा केस की जांच CBI कर रही है. एजेंसी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई है. मामले की अगली सुनवाई और जांच की प्रगति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं.
क्या है पूरा मामला?
ट्विशा शर्मा मामला साल 2026 का एक बेहद हाई-प्रोफाइल और चर्चा में रहने वाला आपराधिक मामला है, जो दहेज प्रताड़ना, संदिग्ध मौत और रसूखदार आरोपियों के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आया. इस मामले की पृष्ठभूमि यह है कि 33 वर्षीय पूर्व मिस पुणे और मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की शादी नवंबर 2025 में भोपाल के एक वकील समर्थ सिंह से हुई थी, जिनकी मां गिरिबाला सिंह एक रिटायर्ड जिला जज हैं. शादी के महज 6 महीने बाद, 12 मई 2026 को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत पाई गईं और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगना बताई गई.
ड्रग्स लेने के आरोप लगे थे
इस घटना के बाद ट्विशा के परिवार और उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही ट्विशा को उनके पति समर्थ और सास गिरिबाला सिंह द्वारा लगातार दहेज के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार का यह भी आरोप था कि पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर के चोटों के निशानों को छुपाया गया और आरोपियों के रसूख के कारण पुलिस ने जांच में ढील दी. दूसरी ओर, आरोपी सास गिरिबाला सिंह ने इन दावों को खारिज करते हुए मीडिया में बयान दिया कि ट्विशा मानसिक बीमारी (सिजोफ्रेनिया) और ड्रग्स की लत से जूझ रही थीं, जिसका ट्विशा के परिवार ने कड़ा विरोध किया.
भोपाल पुलिस की जांच पर सवाल उठने, FIR में देरी होने और आरोपी पति के फरार रहने के कारण यह मामला लगातार तूल पकड़ता गया, जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी. इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वतः संज्ञान लिया और एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों के पैनल द्वारा ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया. सीबीआई जांच में पुलिस की गंभीर लापरवाही भी सामने आई, जिसमें पता चला कि जिस बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई थी, उसे न तो पोस्टमॉर्टम के समय भेजा गया और न ही उसकी जब्ती के मेमो पर गवाहों के दस्तखत थे, जिसके लिए एक पुलिस अधिकारी पर जुर्माना भी लगाया गया.
रवीश पाल सिंह