13 रुद्राक्ष और 12 ज्योतिर्लिंग... आर्टिस्ट ने तैयार की ऐसी राखी, जिसे देखने के लिए कैमरा भी करना पड़ेगा जूम

राखी तो आपने खूब देखी होंगी. रेशम की, मोतियों वाली, चांदी-सोने की और कार्टून कैरेक्टर वाली भी. लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच में एक कलाकार ने ऐसी राखी तैयार की है, जिसमें सिर्फ धागा और रुद्राक्ष नहीं, बल्कि भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों की पूरी आस्था समाई है. 13 रुद्राक्षों से बनी इस खास राखी के 12 रुद्राक्षों पर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की मिनिएचर पेंटिंग बनाई गई है.

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13 रुद्राक्षों से तैयार की गई है स्पेशल राखी. (Photo: ITG) 13 रुद्राक्षों से तैयार की गई है स्पेशल राखी. (Photo: ITG)

अजय बाड़ोलिया

  • नीमच,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:25 PM IST

रक्षाबंधन आते ही बाजार राखियों से सज जाते हैं. कहीं रंग-बिरंगी राखियां, कहीं बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियां, तो कहीं भाई की पसंद के हिसाब से डिजाइन की गई राखियां. लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच में इस बार एक कलाकार ने राखी को कुछ ऐसा रूप दिया है, जिसमें धागे के साथ कला, आस्था और मालवा की धार्मिक पहचान भी जुड़ गई है. ये राखी तैयार की है नीमच जिले के कुचड़ोद गांव के चित्रकार राहुल कुमार लोहार ने.

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इसे बनाने के लिए उन्होंने कोई बड़ा कैनवास नहीं चुना. उन्होंने चुने रुद्राक्ष के छोटे-छोटे दाने. राहुल ने कुल 13 रुद्राक्षों से ये खास राखी तैयार की है. इनमें 12 रुद्राक्षों पर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों की सूक्ष्म तस्वीरें बनाई गई हैं. इनमें महाकालेश्वर, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, वैद्यनाथ समेत सभी 12 ज्योतिर्लिंग शामिल हैं.

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अब जरा मुश्किल समझिए. रुद्राक्ष की सतह कितनी बड़ी होती है? बहुत ज्यादा नहीं. ऊपर से उसकी सतह सीधी भी नहीं होती. उस पर उभार और घुमाव होते हैं. ऐसी सतह पर किसी मंदिर की पहचान बताने वाली तस्वीर बनाना अपने आप में बड़ी चुनौती है. लेकिन राहुल ने इसी छोटी सी जगह को अपना कैनवास बना दिया.

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इस काम में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात पेंटिंग का आकार है. राहुल ने रुद्राक्षों पर चित्र बनाने के लिए सामान्य ब्रश का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने एक या दो बाल वाले बेहद महीन ब्रश से इन चित्रों को उकेरा.

यानी जिस जगह पर एक छोटी सी लाइन बनाने में भी हाथ जरा सा हिला तो पूरी तस्वीर बिगड़ सकती है, वहां कलाकार ने ज्योतिर्लिंगों की पहचान बनाए रखने की कोशिश की. इसके लिए सिर्फ पेंटिंग का हुनर काफी नहीं था. धैर्य चाहिए था. एकाग्रता चाहिए थी. और आंखों की ऐसी बारीकी चाहिए थी कि रुद्राक्ष की छोटी सी सतह पर भी तस्वीर का हर जरूरी हिस्सा उभर सके.

12 ज्योतिर्लिंगों के बीच विराजमान हैं पशुपतिनाथ

अब इस राखी का सबसे खास हिस्सा आता है. 12 रुद्राक्षों को गोलाकार रूप में सजाया गया है. हर रुद्राक्ष पर एक ज्योतिर्लिंग का चित्र है. लेकिन इन 12 ज्योतिर्लिंगों के ठीक बीच में एक और रुद्राक्ष रखा गया है. और उस पर बनाया गया है मंदसौर के प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ महादेव का चित्र. एक तरफ देश के 12 ज्योतिर्लिंग और दूसरी तरफ मालवा की धार्मिक पहचान. राहुल भी मालवा क्षेत्र से आते हैं. उन्होंने इस राखी में भगवान पशुपतिनाथ की तस्वीर तैयार की है.

राहुल बताते हैं कि एक कलाकार होने के नाते वह लगातार कुछ नया करने की कोशिश करते रहते हैं. रक्षाबंधन का त्योहार सामने था तो उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसी राखी बनाई जाए, जिसमें कुछ अलग नजर आए. फिर उन्होंने भगवान शिव को समर्पित राखी बनाने का फैसला किया. 

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इसके बाद रुद्राक्ष चुना गया और उस पर 12 ज्योतिर्लिंगों के स्वरूप बनाने का प्रयोग शुरू हुआ. चूंकि वह मालवा से आते हैं और मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है, इसलिए उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों के बीच पशुपतिनाथ महादेव को केंद्र में स्थापित कर दिया.

छोटी सी राखी में बड़ी कहानी

आमतौर पर राखी भाई की कलाई पर बंधती है और भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक होती है. लेकिन राहुल की बनाई ये राखी उस रिश्ते के साथ कला और आस्था की एक अलग कहानी भी कहती है. एक नजर में ये रुद्राक्षों की राखी दिखाई देती है. थोड़ा करीब जाकर देखिए तो 12 ज्योतिर्लिंग नजर आते हैं. और फिर बीच में नजर टिकती है तो वहां मालवा के भगवान पशुपतिनाथ विराजमान दिखाई देते हैं.

यानी एक छोटी सी राखी में 12 ज्योतिर्लिंग, पशुपतिनाथ महादेव, रुद्राक्ष और मिनिएचर पेंटिंग- सब कुछ समा गया. रक्षाबंधन पर बाजार में लाखों राखियां बिकती हैं. लेकिन नीमच के कुचड़ोद गांव के राहुल लोहार की ये राखी इसलिए अलग है, क्योंकि इसे सिर्फ बांधा नहीं जा सकता, इसे देखना भी पड़ता है- वो भी बेहद करीब जाकर. इस राखी की सबसे बड़ी खूबसूरती भी यही है- कलाई पर बंधी एक छोटी सी चीज, जिसमें कलाकार ने आस्था और अपनी महीन कारीगरी की पूरी दुनिया समेट दी है.

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(रिपोर्ट: अजय बडोलिया)

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