भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त को पूरे देश में मनाया जाएगा. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की कामना करती है. भाई भी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है. इसी भावना को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए काशी के रहने वाले जूनियर साइंटिस्ट श्याम चौरसिया के नेतृत्व में एक निजी स्कूल की छात्राओं ने जवानों के लिए अनोखी AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी तैयार की है. देखने में यह राखी जैसी ही नजर आती है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. छात्राओं और श्याम चौरसिया के मुताबिक, इस प्रोटोटाइप का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के बीच संचार और सुरक्षा में मदद करना है. इसे इस तरह तैयार किया गया है कि जवान इसे प्रयोग कर सकें और जरूरत के मुताबिक इसमें आगे और सुधार भी किया जा सके.
वाराणसी के श्याम चौरसिया को जूनियर साइंटिस्ट के नाम से जाना जाता है. इससे पहले भी वह जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं. इनमें इलेक्ट्रॉनिक आर्मी हैंड ग्लव्स, आर्मी एंटी अटैक सिस्टम और AI आर्मी जैकेट का प्रोटोटाइप शामिल है. अब रक्षाबंधन के मौके पर श्याम चौरसिया के नेतृत्व में छात्राओं ने जवानों के लिए AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी तैयार की है. इस राखी के जरिए छात्राओं ने रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा से जोड़ने का प्रयास किया है.
जवानों की सुरक्षा के लिए पहले भी बना चुके हैं तकनीक
इस खास राखी को तैयार करने में कई तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है. छात्राओं ने इसमें 2.1 इंच डिस्प्ले, ट्रांसमीटर-रिसीवर, ब्लूटूथ मॉड्यूल, कैमरा और माइक्रोफोन लगाया है. इसके साथ ही राखी में 3.7 वोल्ट की बैटरी भी लगाई गई है. इसमें सोलर के साथ सेल्फ-चार्जिंग सिस्टम भी दिया गया है. छात्राओं के मुताबिक, राखी में सैटेलाइट आधारित डिस्प्ले के जरिए मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी जवानों के बीच ऑडियो-वीडियो संचार की सुविधा देने का प्रयास किया गया है.
छात्राओं ने इस प्रोटोटाइप को करीब 70 ग्राम वजन का रखा है. इसे तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा. छात्राओं के अनुसार, इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में लगभग एक लाख रुपये की लागत आई है. श्याम चौरसिया का कहना है कि इस प्रोटोटाइप का इस्तेमाल जवान कर सकते हैं. साथ ही इसे आगे और बेहतर बनाया जा सकता है. छात्राओं ने इस तकनीक को तैयार करने के पीछे रक्षाबंधन की भावना को जवानों तक पहुंचाने का उद्देश्य बताया है.
करीब 70 ग्राम है प्रोटोटाइप का वजन
AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी तैयार करने के बाद छात्राओं और स्कूल प्रबंधन ने रक्षा मंत्री को ईमेल भेजा है. इसमें जवानों को राखी सौंपने के लिए समय मांगा गया है. छात्राएं चाहती हैं कि उनके हाथों से तैयार की गई यह राखी देश की सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचे. इसके अलावा छात्राएं वाराणसी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में एक पत्रक भी देंगी. इसके जरिए प्रधानमंत्री से जवानों तक राखी पहुंचाने में मदद की मांग की जाएगी.
श्याम चौरसिया ने केवल जवानों की सुरक्षा को लेकर ही तकनीक आधारित प्रोटोटाइप तैयार नहीं किए हैं. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने लिपस्टिक और झुमका जैसे उपकरण बनाए हैं. इनका उद्देश्य तकनीक के जरिए महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रयास करना है. अब छात्राओं के साथ मिलकर तैयार की गई AI सोलर सोल्जर सेफ्टी राखी को लेकर भी उनका फोकस जवानों की सुरक्षा और संचार व्यवस्था पर है. छात्राओं ने इसमें आधुनिक तकनीक को रक्षाबंधन की भावना के साथ जोड़ने का प्रयास किया है.
तीन महीने में तैयार हुई राखी
छात्राओं ने बताया कि इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में करीब तीन महीने लगे. लगभग एक लाख रुपये की लागत से तैयार की गई इस राखी का वजन करीब 70 ग्राम है। इसमें डिस्प्ले से लेकर कैमरा, माइक्रोफोन और संचार से जुड़े उपकरण लगाए गए हैं. छात्राओं के अनुसार, इसका मकसद सिर्फ एक राखी तैयार करना नहीं है, बल्कि रक्षाबंधन के पर्व को देश के सैनिकों की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा से जोड़ना है. अब छात्राएं चाहती हैं कि उनके द्वारा तैयार की गई यह राखी जवानों तक पहुंचे. इस पूरे प्रयास में श्याम चौरसिया के साथ छात्राओं ने तकनीक और भावनाओं को जोड़ने की कोशिश की है. एक तरफ रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है, वहीं दूसरी तरफ छात्राओं ने इसी भावना को देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाने का प्रयास किया है.
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