राधाष्टमी पर गांधी सागर में उतरी मादा चीता 'राधा'... CM मोहन यादव ने कूनो के बाद दूसरे घर में रिलीज किया चीता

मध्य प्रदेश न केवल 'चीता स्टेट', बल्कि 'टाइगर स्टेट', 'घड़ियाल स्टेट' और 'गिद्ध स्टेट' के रूप में भी विश्वभर में अपनी पहचान बना चुका है. प्रदेश में असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं और हाथियों की संख्या भी बढ़कर लगभग 100 हो गई है.

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गांधी सागर अभयारण्य में अब 4 हुए चीते.(Photo:ITG) गांधी सागर अभयारण्य में अब 4 हुए चीते.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • मंदसौर,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST

मध्यप्रदेश के गांधी सागर वन्य अभयारण्य में रविवार को एक और मादा चीता छोड़ी गई. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राधाष्टमी के अवसर पर मादा चीता का नाम 'राधा' रखते हुए उसे गांधी सागर के जंगल में रिलीज किया. राधा के गांधी सागर पहुंचने के बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है. गांधी सागर में पहले से दो नर चीते प्रभास और पावक समेत एक मादा चीता धीरा मौजूद हैं. अब अभयारण्य में दो नर और दो मादा चीते हो गए हैं.

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि चीता प्रोजेक्ट सफलता के नए मानदंड स्थापित कर रहा है. मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को फिर से बसाने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष छोड़े गए चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं.

कूनो के बाद गांधी सागर में बढ़ रहा चीता संरक्षण का दायरा

गांधी सागर में एक और चीते को छोड़ा जाना मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. गांधी सागर को चीतों के दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है.

मादा चीता राधा के आने के बाद यहां चीतों के संरक्षण के साथ भविष्य में उनके प्रजनन की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा. वन विभाग की टीम चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण में उनके अनुकूलन की लगातार निगरानी करेगी.

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पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी सागर में चीतों के आने से वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब चीता स्टेट के साथ-साथ टाइगर स्टेट, घड़ियाल स्टेट और गिद्ध स्टेट के रूप में भी जाना जाने लगा है. असम से जंगली भैंसे भी मध्यप्रदेश लाए गए हैं और प्रदेश में गजराज की संख्या करीब 100 हो गई है.

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'सेकंड होम ऑफ चीता' बुकलेट का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने वन विभाग की ओर से प्रकाशित 'सेकंड होम ऑफ चीता- गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी' बुकलेट का विमोचन भी किया.

चीता पुनर्स्थापना के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गरोठ विधायक चंदर सिंह सिसोदिया, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू और मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव डॉ. समिता राजौरा भी मौजूद रहीं.

CM बोले- स्थानीय वातावरण में खेलते-कूदते दिखाई दे रहे चीते

मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश का चीता प्रोजेक्ट एशिया का पहला प्रोजेक्ट है. उनके मुताबिक, एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने इनके पुनर्वास का संकल्प लिया.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है.जिन चीतों का अस्तित्व सैकड़ों साल पहले खत्म हो गया था, वे अब स्थानीय वातावरण में खेलते-कूदते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने इसे वन्यजीवों के प्रति 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत के आधार पर मिली उपलब्धि बताया और कहा कि मध्यप्रदेश के जंगलों का आबाद होना सभी के लिए सौभाग्य की बात है.

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