शहीद के माता-पिता और पत्नी में बंटेगी 1 करोड़ की अनुग्रह राशि, मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य पुलिस के किसी जवान के शहीद होने की स्थिति में सरकार द्वारा दी जाने वाली एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि मृतक की पत्नी और माता-पिता के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी.

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फाइल फोटो) मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 20 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य पुलिस के किसी जवान के शहीद होने की स्थिति में दी जाने वाली एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि को मृतक की पत्नी और माता-पिता के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा. 

शुक्रवार को एक सरकारी अधिकारी ने मुख्यमंत्री के हवाले से बताया कि "हमने निर्णय लिया है कि अगर राज्य पुलिस जवान शहीद होता है तो दी जाने वाली एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि उसकी पत्नी और माता-पिता के बीच 50:50 के अनुपात में बांटी जाएगी."

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कैप्टन अंशुमान के माता पिता ने की  थी नियमों में बदलाव की मांग

यह निर्णय हाल में शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता द्वारा दिवंगत अधिकारी की पत्नी के कथित तौर पर घर से चले जाने के बाद ‘नेक्स्ट ऑफ किन’ (एनओके) नियमों में संशोधन की मांग किये जाने पर उठे विवाद के मद्देनजर अहम माना जा रहा है.

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कैप्टन सिंह पिछले साल जुलाई में सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना के एक शिविर में लगी भीषण आग से लोगों को बचाते हुए शहीद हो गए थे. इस महीने की शुरुआत में उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है.

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NOK नियम क्या हैं?
NOK (Next of Kin) का अर्थ व्यक्ति के जीवनसाथी, निकटतम रिश्तेदार, परिवार के सदस्य या कानूनी अभिभावक से है. जब कोई शख्स सेना में भर्ती होता है तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को NOK के रूप में नामांकित किया जाता है. सेना के नियमों के अनुसार, जब कोई कैडेट या अधिकारी शादी करता है, तो उसके माता-पिता के बजाय उसके जीवनसाथी का नाम उसके निकटतम रिश्तेदार (NOK) के रूप में नामांकित किया जाता है. ड्यूटी के दौरान किसी सैनिक की मृत्यु होने पर अनुग्रह राशि उसके निकटतम रिश्तेदार को दी जाती है.

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