बाघों के लिए देश-दुनिया में फेमस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब हाथियों के लिए भी घर बन गया है. यहां हाथियों का कुनबा लगातार फल-फूल रहा है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के लैंडस्केप में करीब 50 से 70 जंगली हाथियों की मौजूदगी का अनुमान है. वहीं, शहडोल जिले के पश्चिमी ब्यौहारी इलाके में भी करीब 25 हाथियों का दल पिछले लगभग डेढ़ साल से लगातार रह रहा है.
टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के मुताबिक, बांधवगढ़ में हाथियों की नियमित मौजूदगी अक्टूबर 2018 में दर्ज हुई, जब ये हाथी संजय गांधी टाइगर रिजर्व से कॉरिडोर के जरिए यहां पहुंचे थे. उसके बाद इनका दायरा खेतौली, पनपथा कोर, ताला और कल्लवाह तक फैल गया.
यहां हाथी किसी एक जगह टिकते नहीं, बल्कि भोजन, पानी और सुरक्षा के हिसाब से अपना रास्ता बदलते रहते हैं. यही वजह है कि एक रेंज में उनकी स्थाई संख्या गिनना मुश्किल है, लेकिन वन विभाग लगातार उनकी चाल पर नजर रख रहा है. विस्तृत जंगल, बांस के क्षेत्र, साल और मिश्रित वन इनके लिए मजबूत आकर्षण बन गए हैं.
हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने वन्यजीव पर्यटन में भी नई थ्रिलर जोड़ दी है. पर्यटक अब खुले जंगल में झुंड, बच्चों के साथ चलते हाथी और उनका सामाजिक व्यवहार देखकर रोमांचित हो रहे हैं. लेकिन यह रोमांच तभी टिकेगा, जब मानव-हाथी दूरी सही रखी जाए.
वन विभाग ने निगरानी के लिए गजरक्षक ऐप, एलीफेंट कंट्रोल रूम, रेडियो कॉलरिंग और वैज्ञानिक पहचान पद्धति को मजबूत किया है. हाथियों की पहचान उनके कान, दाग-धब्बे, दांत और पूंछ से की जा रही है. फ्रंटलाइन स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि अलर्ट मिलते ही त्वरित कार्रवाई हो सके.
शहडोल उत्तर वनमंडल की DFO तरुणा वर्मा के मुताबिक, ब्यौहारी में भी हालात इसी ओर इशारा कर रहे हैं. बाणसागर के बैकवाटर, कम मानव बस्तियां और पर्याप्त बांस के जंगल हाथियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं.
भारतीय वन्यजीव संस्थान और प्रोजेक्ट एलीफेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश में अभी जंगली हाथियों की संख्या 97 दर्ज की गई है. अब असली जंग यह तय करेगी कि मध्यप्रदेश हाथियों का स्थायी घर बनता है या खेत-गांव की सीमा पर नया टकराव जन्म लेता है. अगले कुछ महीने बताएंगे कि संरक्षण की यह रणनीति गजराजों और इंसानों, दोनों के लिए कितना मजबूत भविष्य लिखती है.
aajtak.in