भीमबेटका पहुंचे ब्रिक्स डेलीगेट्स, हजारों साल पुराने हाथी, हिरण और जंगली सूअर के चित्रों ने खींचा ध्यान

BRICS देशों के प्रतिनिधियों ने यूनेस्को विश्व धरोहर भीमबेटका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण किया. हजारों साल पुराने शैलचित्रों के जरिए मानव, वन्यजीव और प्रकृति के प्राचीन संबंध को करीब से समझा.

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यूनेस्को धरोहर भीमबेटका में विदेशी डेलीगेट्स ने जाना मानव सभ्यता का इतिहास.(Photo:ITG) यूनेस्को धरोहर भीमबेटका में विदेशी डेलीगेट्स ने जाना मानव सभ्यता का इतिहास.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • रायसेन,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:33 PM IST

मध्य प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर भीमबेटका रॉक शेल्टर्स में रविवार को BRICS देशों के प्रतिनिधियों ने प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता और प्रकृति से उसके गहरे रिश्ते को करीब से देखा. दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन समेत BRICS देशों से आए 15 से अधिक डेलीगेट्स ने हजारों साल पुराने शैलचित्रों और सांस्कृतिक विरासत का अनुभव किया.

गाइडेड हेरिटेज टूर के दौरान प्रतिनिधियों ने अलग-अलग शैलाश्रयों का भ्रमण किया. उन्हें बताया गया कि इन चित्रों के जरिए प्राचीन मानव की जीवनशैली, उसके सामाजिक जीवन और वन्यजीवों के साथ उसके संबंध को समझा जा सकता है.

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हाथी, हिरण और जंगली सूअर के चित्रों ने खींचा ध्यान

डेलीगेट्स ने हाथी, गौर, हिरण, बंदर और जंगली सूअर जैसे जानवरों के चित्रों को खास रुचि से देखा. इन चित्रों से पता चलता है कि हजारों साल पहले भी मानव और प्रकृति का रिश्ता कितना गहरा था. साथ ही यह भी समझ आता है कि उस समय के लोग कला के माध्यम से अपने आसपास की दुनिया को कैसे व्यक्त करते थे.

क्यों खास है भीमबेटका?

भीमबेटका में 750 से ज्यादा रॉक शेल्टर्स हैं, जिनमें 100 से अधिक जगहों पर शैलचित्र मिले हैं. इन चित्रों में शिकार, सामूहिक जीवन, जुलूस, योद्धा और धार्मिक गतिविधियों जैसे दृश्य दिखाई देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये चित्र अलग-अलग कालखंडों की कला और संस्कृति की निरंतरता को दर्शाते हैं.

सिर्फ पुरातात्विक स्थल नहीं, मानव सभ्यता की कहानी

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BRICS प्रतिनिधियों के लिए यह सिर्फ एक पर्यटन या पुरातात्विक स्थल का दौरा नहीं था. यह अनुभव मानव सभ्यता की विकास यात्रा को समझने का भी अवसर बना. हजारों साल पहले चट्टानों पर बनाए गए ये चित्र आज भी उस दौर के लोगों की सोच, रचनात्मकता और प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता को जीवंत रूप में दिखाते हैं.

इस दौरे के जरिए मध्य प्रदेश की प्रागैतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास पहचान दर्ज कराई.

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