बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश (Bandhavgarh National Park, Madhya Pradesh) के उमरिया जिले में स्थित भारत के सबसे प्रसिद्ध और जैव-विविधता से भरपूर राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है. यह पार्क विशेष रूप से रॉयल बंगाल टाइगर की अधिक संख्या के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसे “टाइगर लैंड” भी कहा जाता है. प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगल और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम बांधवगढ़ को पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक बनाता है.
इस राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,536 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें कोर एरिया और बफर जोन शामिल हैं. यहां की भौगोलिक संरचना में साल, सागौन, बांस और घास के मैदान प्रमुख हैं, जो वन्यजीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करते हैं. बांधवगढ़ का नाम यहां स्थित प्राचीन बांधवगढ़ किले से लिया गया है, जिसका उल्लेख रामायण काल से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि भगवान राम ने यह किला अपने भाई लक्ष्मण को भेंट किया था.
वन्यजीवों की बात करें तो बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान बाघों के अलावा तेंदुआ, भालू, भेड़िया, नीलगाय, सांभर, चीतल और जंगली सूअर जैसे अनेक जानवरों का घर है. इसके साथ ही यहां 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें मोर, बाज, उल्लू और विभिन्न प्रवासी पक्षी शामिल हैं. यही कारण है कि यह स्थान वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग माना जाता है.
पर्यटन के लिए बांधवगढ़ में जीप सफारी की सुविधा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से पर्यटक जंगल के भीतर जाकर वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देख सकते हैं. पार्क को मुख्य रूप से तलिया, मगधी और खितौली जोन में विभाजित किया गया है. अक्टूबर से जून तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान न केवल वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि यह भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी एक अमूल्य हिस्सा है.
MP News: टाइगर रिजर्व पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को परस्पर जोड़ने वाली सड़कों की लंबाई 625 किमी होगी. रूट्स को अपग्रेड और विकसित करने के लिए 5 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.
मध्य प्रदेश के उमरिया में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से फिर चिंताजनक खबर सामने आई है. रिजर्व क्षेत्र के भीतर एक पुराने कुएं में वयस्क बाघ का शव मिला है. दो दिनों के भीतर यह दूसरी बार किसी बाघ की मौत की घटना सामने आई है.